क्या बैंक वास्तव में साख का निर्माण करते हैं? - Do Banks Really Build Credit?
क्या बैंक वास्तव में साख का निर्माण करते हैं? - Do Banks Really Build Credit?
साख तथा जमाराशि का निर्माण बैंक करता है अथवा जमाकर्ता? इस विषय पर अर्थशास्त्रियों में मतभेद है।
हार्टले विदर्स के अनुसार, "ऋण जमाराशियों को जन्म देते हैं और उनके निर्माण का श्रेय बैंको को है। यह ठीक है कि जमाकर्ता तथा ऋणी अपनी रकम को बैंक से निकालने अथवा किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित करने के लिए स्वतंत्र होते है, परंतु यह निकाली गई या हस्तांतरित की गई रकम किसी अन्य बैंक अथवा बैंक में पुनः जमा होने की प्रवृति दिखाती है। एक बैंक द्वारा दिया गया ऋण किसी अन्य बैंक अथवा बैंक की जमा के रूप में परिवर्तित हो जाता है। आज की बैंकिग प्रणाली में व्युत्पन्न जमाराशियों का महत्व इतना अधिक बढ़ गया है कि सेलिगमैन के अनुसार, पहले बैंक नकद जमा में व्यवसाय करते थे, आजकल वे प्रमुख रूप से साख जमा में व्यवसाय करते है।"
उपर्युक्त मत के विपरीत डा वाल्टर लीफ तथा प्रो कैनन के अनुसार साख निर्माण का श्रेय बैंक को नहीं दिया जा सकता क्योंकि इसका आरम्भ जमाकर्ता द्वारा होता है। जमाराशियो से ही बैंक को साधन उपलब्ध होते है और बैंक ऋण इसलिए दे पाते हैं कि जमाकर्ता अपनी पूरी रकम बैक से एक साथ नहीं निकालते। डॉ. कैनन ने बैंकिंग प्रणाली की तुलना एक सामान घर से की है। मान लीजिए, रात्रि क्लब के 100 सदस्य अपना अपना छाता सामान घर में जमा कराते हैं। छाता रखने वाला व्यक्ति अपने अनुभव से यह जानता है कि एक घंटे में 10 से अधिक छाते नहीं माँगे जाएंगे। वह एक रात के लिए 90 छाते किराये पर देकर लाभ कमा लेता है। परंतु इसका अर्थ यह तो नहीं हो सकता कि उस व्यक्ति ने 90 छातों का निर्माण लिया है। यही स्थिति बैंक की भी है। इसी प्रकार के तर्कों को ध्यान में रखते हुए कैनन ने लिखा है कि “प्रत्येक व्यावहारिक बैकर जानता है कि वह साख मुद्रा अथवा किसी अन्य वस्तु को निर्माता नहीं है, वरन् एक ऐसा व्यक्ति है जो उन व्यक्तियों से जिनके पास साधन है, अन्य व्यक्तियों को जो उनका प्रयोग कर सकते हैं, ऋण दिलाने की सुविधा प्रदान करता है।"
वास्तविकता यह है कि लीफ तथा कैनन के विचार भ्रमात्मक है और उन्हें केवल यहाँ तक माना जा सकता है कि बैंकों द्वारा साख निर्माण के कार्य में जमाकर्ताओं का सहयोग बैंक को प्रोत्साहन देता है। साख निर्माण की प्रक्रिया का अध्ययन करते समय हम यह देख चुके है कि एक अकेला बैंक एक रूपये की नकद जमा प्राप्त होने पर 5 रूपये की बैंक मुद्रा का निर्माण नहीं कर सकेगा। परंतु संपूर्ण बैंकिंग प्रणाली में सभी बैंक मिलकर यह कार्य आसानी से कर सकते हैं जबकि व्यक्तिगत रूप में सभी बैंकों ने अपनी प्रारंभिक जमाओं का केवल 4/5 भाग ऋण तथा निवेश के रूप में प्रयोग किया है। बैंकों द्वारा साख का निर्माण केवल नकद जमा तथा साख के द्वारा ही नहीं, बल्कि अधिकवर्ष की सुविधाएँ देकर भी किया जाता है। प्रतिभूतियों को खरीदकर इनका भुगतान अपने साधनों द्वारा करके भी बैंक साख का सृजन करते हैं केंद्रीय बैंक से अपने बिलों को पुनः भुनाकर भी बैंक अपनी साख निर्माण की शक्ति को बढ़ाते है। इसलिए यहीं कहना अधिक ठीक होगा कि बैंक साख का निर्माण करते है।
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