औद्योगिक बीमारी के कारण - due to industrial disease

औद्योगिक बीमारी के कारण - due to industrial disease


औद्योगिक बीमारी के दो मुख्य कारण हैं.


1. आंतरिक कारण


2. बाह्रा कारण


1. आंतरिक कारण


ये वे कारण हैं जो उद्योगों के आंतरिक प्रक्रिया से ही उत्पन्न होते हैं तथा उद्योगों के नियंत्रण में होते है।


(क) औद्योगिक झगड़े - कई बार मालिक और मजदूरों में झगडे हो जाते हैं। इसके कारण हड़ताल और तालाबंदी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। परिणामस्वरूप उत्पादन की हानि होती है ।


(ख) पुरानी तकनीक का प्रयोग - उद्योगों में पुरानी तकनीक का प्रयोग किया जाता है तथा कई बार पुरानी मशीनें ही प्रयोग में लाई जाती है, परिणामस्वरूप उत्पादन कम होता है।


(ग) धन का हस्तांतरण:- उद्योगों के मालिक एक कारखाने की पूजी का दूसरे कारखाने में हस्तांतरण करते रहते हैं। इस कारण वह उद्योग, जिसमें से धन निकाला जाता है औद्योगिक बीमारी का शिकार हो जाता है।


(घ) गलत तकनीक का चुनाव औद्योगिक बीमारी का कारण यह भी है कि वस्तुओं का उत्पादन की जाने वाली तकनीक का चुनाव गलत किया जाता है।


(ङ) उत्पादन क्षमता का कम प्रयोग बिजली, कोयले, कच्चे माल तथा परिवहन की कमी के कारण उद्योगों की उत्पादन क्षमता का पूर्ण प्रयोग नहीं किया जाता। इस कारण औद्योगिक इकाइया बीमार हो जाती हैं। 


(च) अशधारियो में झगड़ा अशधारी केवल अपने स्वार्थ में लगे रहते हैं। परिणामस्वरूप उनमें झगड़े होने लगते हैं, जिससे औद्योगिक बीमारी की समस्या उत्पन्न होने लगती है। 


(छ) उचित प्रबंध का अभाव उद्योगों का उचित ढंग से प्रबंध नहीं किया जाता। उचित प्रबंध के अभाव से औद्योगिक इकाइयां बीमार हो जाती हैं।


(ज) प्रतियोगी शक्ति का अभाव उद्योगों में उत्पादन लागत अधिक आती है, जिसके कारण वस्तुओं की कीमतें ऊंची रखनी पड़ती है। परिणामस्वरूप इन इकाइयों की प्रतियोगी शक्ति कम हो जाती है। इससे औद्योगिक इकाइयां बीमार होने लगती है। 


(झ) उत्पादन का पैमाना आवश्यकता के अनुसार नहीं- उत्पादन का पैमाना आवश्यकता के अनुसार नहीं होता। यह कभी आवश्यकता से कम तथा कभी आवश्यकता से अधिक होता है। 


2. बाह्य कारण


ये वे कारण है जो उद्योगों में बाहर से पनपते हैं तथा उद्योगों के नियंत्रण में नहीं होते।


औद्योगिक बीमारी के बाह्य कारण निम्नलिखित हैं (क) शक्ति संकट औद्योगिकरण के कारण बिजली,

कोयला तथा तेल की मांग निरंतर बढ़ रही है। इनकी पूर्ति, मांग की अपेक्षा कम होती है। बिजली के संबंध में कृषि को प्राथमिकता दी जाती है, परंतु उद्योगों पर बिजली कटौती लागू की जाती है। इसी प्रकार कोयले तथा तेल की कमी के कारण भी औद्योगिक उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।


(ख) सरकार की नीति- कई बार सरकार अपनी नीतियों जैसे औद्योगिक लाइसेंसिंग, कर, आयात-निर्यात इत्यादि में अचानक परिवर्तन कर देती है। इसके परिणामस्वरूप औद्योगिक इकाइयां बीमार हो जाती है। उदाहरण के तौर पर किसी विशेष उत्पादन के लिए उदारवादी आयात नीति उसी प्रकार की घरेलू उत्पादन इकाइयों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है। 


(ग) कच्चे माल का अभाव- कई औद्योगिक इकाइयों को कच्चा माल विदेशों से आयात करना पड़ता है। यातायात की सुविधाओं की कमी होने के कारण कच्चा माल समय पर नहीं पहुंचता। इससे उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पडता है। 


(घ) बिक्री में कठिनाई - जो वस्तुए उद्योगों द्वारा उत्पादित की जाती हैं उन्हें कई बार बाजार में बेचना कठिन हो जाता है। मंदी के कारण बाजार में मांग कम हो जाती है। परिणामस्वरूप स्टॉक बिक नहीं पाता। बिक्री के अभाव में औद्योगिक इकाइयां रुग्ण अवस्था में पहुच जाती हैं। 


(ङ) तकनीकी परिवर्तन - औद्योगिक क्षेत्र में निरंतर तकनीकी परिवर्तन हो रहे हैं। नए आविष्कार - अथवा नई तकनीक कुछ उत्पादों को अप्रचलित बना देती है। परिणामस्वरूप औद्योगिक इकाइया बीमार हो जाती है।


(च) साख का अभाव - औद्योगिक इकाइयों को ऋण के लिए विशेष तौर पर बैंको पर निर्भर रहना पड़ता है। कोई भी बैंक ऐसी औद्योगिक इकाई का ऋण नहीं देना चाहता जिसे एक बार हानि होने लगे। परिणामस्वरूप औद्योगिक इकाई का कार्यशील पूंजी के अभाव की समस्या उत्पन्न होने लगती है। अधिकतर इकाइयां रुग्ण हो रही हैं।


(छ) विश्व व्यापार संघ से समझौता - भारत ने 1996 में विश्व व्यापार संगठन समझौते पर हस्ताक्षर किए। परिणामस्वरूप कई औद्योगिक इकाइयां समाप्त हो गई। उदारीकरण की नीति अपनाने के कारण भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियां प्रवेश कर रही है। इससे घरेलू उद्योगों को हानि हो रही है। अधिकतर इकाइया रूग्ण हो रही हैं।


उपरोक्त वर्णन से प्रतीत होता है कि आंतरिक तथा बाह्य दोनों प्रकार के कारण औद्योगिक बीमारी के लिए उत्तरदायी है परंतु दोनों में से आंतरिक कारण अधिक योगदान देते हैं। 1984 की तिवारी समिति की रिपोर्ट के अनुसार औद्योगिक इकाइयों की रूग्णता आंतरिक कारणों ( दोषपूर्ण प्रबंधन) से है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भी 67 औद्योगिक बीमारी के लिए आंतरिक कारण जैसे अकुशल प्रबंध इत्यादि ही उतरदायी है। अत औद्योगिक बीमारी मुख्य रूप से आंतरिक कारणों से ही उत्पन्न होती है।