क्षेत्रीय असंतुलन के कारण - due to regional imbalance
क्षेत्रीय असंतुलन के कारण - due to regional imbalance
क्षेत्रीय असंतुलन के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं (i) जनसंख्या का असमान वितरण देश के विभिन्न राज्यों में जनसंख्या के वितरण में असमानता है। परिणामस्वरूप क्षेत्रीय असंतुलन की संभावना अधिक बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त जिन राज्यों में जनसंख्या की वृद्धि दर अधिक होती है वहां विकास की गति धीमी रहती है। जहां जनसंख्या की वृद्धि दर कम है वहां विकास तीव्र गति से होता है। इस प्रकार जनसंख्या वृद्धि क्षेत्रीय असंतुलन को जन्म देती है।
(ii) प्राकृतिक साधनों का असमान वितरण: कुछ राज्यों में प्राकृतिक साधन जैसे वन, जल, मिट्टी खनिज पर्याप्त मात्रा में विद्यमान हैं। जबकि कुछ राज्यों में इनका अभाव है। इस प्रकार प्राकृतिक साधनों के असमान वितरण के कारण देश में विकास के संबंध में विभिन्न राज्यों में असमानताएं उत्पन्न हो जाती है।
परिणामस्वरूप क्षेत्रीय असंतुलन उत्पन्न हो जाता है।
(iii) निर्धनता- देश के कुछ राज्यों में निर्धनता अधिक है जिससे उनका विकास रूक जाता है जैसे उड़ीसा और बिहार राज्य सबसे अधिक निर्धन है। परिणामस्वरूप वहां विकास की गति भी धीमी है। इसके विपरीत कुछ राज्यों में निर्धनता बहुत कम है, जैसे पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात इत्यादि। इन राज्यों में विकास की गति भी तीव्र है। इस प्रकार निर्धनता में विषमता के कारण इन राज्यों में विकास की गति भिन्न है। इस प्रकार निर्धनता में विषमता के कारण देश में क्षेत्रीय असंतुलन पैदा हो जाता है।
(iv) आर्थिक संरचना की असमानता- राष्ट्र का आर्थिक विकास, आर्थिक संरचना जैसे यातायात, संचार, विद्युत, शक्ति, इत्यादि पर निर्भर करता है।
जिन क्षेत्रों में इन सुविधाओं का अभाव होता है, वे राज्य अधिक पिछड़े हुए रहते हैं। परिणामस्वरूप राज्यों में आर्थिक संतुलन उत्पन्न हो जाता है।
(v) सामाजिक अधोसंरचना की असमानता यू.एन डी पी की रिपोर्ट के अनुसार मानव विकास के तीन अंग हैं (1) स्वास्थ्य, (ii) शिक्षा, (iii) आय यह कहा गया है कि स्वास्थ्य तथा शिक्षा की सुविधाओं के द्वारा आय में वृद्धि की जा सकती है। परंतु दोनों प्रकार की (स्वास्थ्य तथा शिक्षा की) सुविधाओं की विभिन्न राज्यों में असमानता है। कुछ राज्यों में ये सुविधाएं अधिक प्रदान होती हैं, जबकि कुछ राज्यों में कम परिणामस्वरूप विभिन्न राज्यों में असंतुलन उत्पन्न हो जाता है।
(vi) औद्योगिकरण की गति कुछ क्षेत्रों में औद्योगिकरण तेजी से हो रहा है। वहां विकास की गति भी तेज है। जिन क्षेत्रों में औद्योगिकरण की गति धीमी है वे राज्य पिछड़े हुए रह गए हैं। परिणामस्वरूप क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ रहा है।
(vii) नई कृषि तकनीक कुछ राज्यों ने हरित क्रांति अर्थात नई कृषि तकनीकों को अपनाया है जैसे पंजाब, हरियाणा। ये क्षेत्र अधिक विकसित हो गए है जो राज्य इसे नहीं अपना सके, वे पिछड़े हुए रह गए हैं। इस प्रकार असंतुलन और भी बढ़ता गया।
(viii) निजी निवेश: जिन क्षेत्रों में अधिक सुविधाए होती हैं, उद्योगपति निजी निवेश उन्हीं क्षेत्रों में करना पसंद करते हैं। पिछड़े हुए क्षेत्रों में निजी निवेश का अभाव होता है।
परिणामस्वरूप पिछड़े हुए क्षेत्र विकसित नहीं हो पाए और असंतुलन निरंतर बढ़ता गया।
(ix) सरकारी नीति :- योजनाकाल के दौरान सरकार ने विकसित क्षेत्रों में अधिक निवेश किया ताकि परिणाम शीघ्र प्राप्त हो सकें। पिछड़े हुए क्षेत्रों की ओर कम ध्यान दिया गया। अर्थात सरकारी नीति ने भी क्षेत्रीय असंतुलन को बढ़ावा दिया।
(x) राजनैतिक कारण:- जिन राज्यों में राजनैतिक स्थिरता रही है वहां विकास भी तीव्र गति से हुआ है। जिन प्रदेशों में अस्थिरता रही है वहां विकास की गति भी धीमी रही है। इस प्रकार राजनैतिक अस्थिरता ने भी असंतुलन को उत्पन्न किया है।
(xi) सामाजिक कारण जो क्षेत्र रूढ़िवादी है वहां के लोगों ने नई तकनीक तथा परिवर्तन को स्वीकार नहीं किया, ऐसे क्षेत्र पिछड़े हुए रहे। जिन क्षेत्रों के लोगों ने परिवर्तनों को स्वीकार किया है वहा विकास भी तीव्र गति से हुआ है। इस प्रकार क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ा है। (xii) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश: जो क्षेत्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, तकनीकी ज्ञान इत्यादि प्राप्त कर रहे हैं उनका विकास भी तीव्रता से हो रहा है। इसके विपरीत जो क्षेत्र ये सुविधाएं प्राप्त नहीं कर पा रहे वे विकास की दृष्टि से पिछड़ रहे हैं। इससे क्षेत्रीय असंतुलन उत्पन्न हो रहा है।
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