प्रतिदर्श चुनाव के कारण - due to sample selection
प्रतिदर्श चुनाव के कारण - due to sample selection
निदर्शन चुनाव करने के कारण - व्यावहारिक जीवन में सभी व्यक्ति किसी न किसी रूप में निदर्शन सिद्धान्त का प्रयोग करते हैं। चर्चिल के अनुसार, विपणन अनुसंधानकर्ता द्वारा प्रतिदर्श का चुनाव करने के अनेक कारण है।" इसमे से कुछ निम्न हैं:
(i) धन व समय की बचत निदर्शन - सिद्धान्त में धन, समय व श्रम की बचत होती है क्योकि इसमें कुछ छाटी हुई इकाइयों का ही अध्ययन किया जाता है।
(ii) विस्तृत जांच - कम होने के कारण उनकी विस्तृत जांच की जा सकती है।
(iii) विश्वसनीयता - यदि प्रतिदर्श समुचित आधार पर यथेष्ट मात्रा में छाटा जाये तो प्रतिदर्श अनुसंधान के परिणाम वही होंगे जो संगणना अनुसंधान द्वारा प्राप्त होते है।
(iv) एक मात्र विधि - कुछ वस्तुएं ऐसी होती है जो जाच के दौरान नष्ट हो जाती है जैस दियासलाई। ऐसी स्थिति में यदि सभी इकाइयों को परखा जाय तो सभी इकाइयों का विनाश हो जायेगा। अतः स्थिति दशा में एकमात्र उपयुक्त विधि प्रतिदश सिद्धान्त ही है।
लक, टेलर, वालस तथा रुबिन के अनुसार, निदर्शन प्रयोग के निम्नलिखित कारण है-
(i) निदर्शन परिणामों पर आधारित सूचनाए अपेक्षाकृत कम समय लेती हैं।
(ii) सूचनाओं के सकलन की लागत कम होती है।
(iii) कुछ विशिष्ट वस्तुओं में निदर्शन ही एक मात्र तकनीक है। उदाहरण के लिए, फोटोग्रॉफी फिल्म का परीक्षण।
(iv) निदर्शन उस दशा में भी वांछित होता है जहा समग्र गणना औचित्यपूर्ण नही होती है। उदाहरण के लिए श्रम जनगणना समक
(v) निदर्शन उस स्थिति में औचित्यपूर्ण होता है जहां पूरी जनसंख्या से सूचनाएं प्राप्त करना भौतिक रूप से असभव होता है।
इसके अनुसार अशुद्धियों या विभ्रमों के गणितीय सिद्धान्त पर आधारित होने के कारण प्रतिदर्श में परिशुद्धता की धारणा आरंभ से ही सर्वोपरि रहती है।
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