पैमाने की मितव्ययिताएँ - Economies of Scale

पैमाने की मितव्ययिताएँ - Economies of Scale


प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. मार्शल के अनुसार एक फर्म या उत्पादने संस्था को बड़े पैमाने की उत्पत्ति से निम्न दो प्रकार की बचते प्राप्त होती हैं : (1) आन्तरिक बचतें (2) बाह्य बचते। आन्तरिक मितव्ययिताएँ व्यक्तिगत संस्था या फर्म को उसके बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के कारण प्राप्त होती है। जैसे विशिष्टीकरण एवं श्रम विभाजन, तकनीकि सुविधा, प्रबन्धकीय कुशलता, वित्तीय लाभ, विपणन कार्य में बचत तथा व्यापारिक बचते। जबकि बाह्य बचतें उद्योग की अनेक अथवा समस्त फर्मों को नियोजन, केंन्द्रीयकरण, राष्ट्रीय महत्व अथवा बड़े आकार के कारण प्राप्त होती हैं। अब हम सर्वप्रथम आन्तरिक बचतों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।


1. आन्तरिक बचते (Internal Economies)


आन्तरिक बचतें केवल बड़ी फर्मों को ही प्राप्त होती हैं, छोटी फर्मों को ये बचतें प्राप्त नहीं हो सकती हैं। क्योंकि आन्तरिक बचतों का कारण अविभाज्य साधनों का समुचित प्रयोग जैसे मशीन अथवा प्लान्ट की पूर्ण क्षमता तक प्रयोग, विशिष्टीकरण एवं श्रम विभाजन, उत्पादन कार्य में नवीन एवं आधुनिक विधियों का प्रयोग, प्रबन्धकीय कुशलता, श्रेष्ठ आन्तरिक संगठन आदि आन्तरिक बचतों की निम्न विशेष ताएँ होती है :


(1) ये बचते व्यक्तिगत फर्म या संस्था को ही प्राप्त होती है।


(2) ये बचते फर्म के स्वयं के किय-कलापों का परिणाम है अर्थात् ये बचते अन्य फर्मों के कार्यों पर आश्रित नहीं होती है।


(3) ये बचतें एक व्यक्तिगत फर्म के द्वारा उत्पादन के पैमाने में वृद्धि के कारण प्राप्त होती हैं अतः आन्तरिक बचते तब तक प्राप्त नहीं हो सकती है जब तक फर्म द्वारा उत्पादन में वृद्धि नहीं की जाय। 


(4) आन्तरिक बचतें फर्म द्वारा अपनाई गई उत्पादन विधियों का श्रेष्ठतम तरीके से प्रयोग का परिणाम है।


(5) ये बचते प्लान्ट एवं मशीनों का श्रेश्ठतम प्रयोग करके प्राप्त की जा सकती हैं।