मिथ्या वर्णन का प्रभाव - effect of misrepresentation
मिथ्या वर्णन का प्रभाव - effect of misrepresentation
मिथ्या वर्णन की दशा में पीड़ित पक्षकार को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त होते हैं:
i. अनुबंध का व्यर्थनीय होना पीड़ित पक्षकार की इच्छा पर अनुबंध व्यर्थनीय होता है अर्थात् वह अनुबंध को रद्द कर सकता है बशर्ते दशाएं ऐसी हों कि साधारण उद्योग से सत्य का पता नहीं चलाया जा सकता है।
ii. अनुबंध की अभिपुष्टि की मांग- यदि पीड़ित पक्षकार के हित में हो, तो वह अनुबंध की अभिपुष्टि कर सकता है और इसकी सभी शर्तों को पूरा करने के लिए दुसरे पक्षकार को बाध्य कर सकता है।
iii. प्रत्यास्थापन - अनुबंध को रद्द करने की दशा में पीड़ित पक्षकार प्रत्यास्थापन की मांग कर सकता है, अर्थात् वह दिया गया धन व संपत्ति वापस पाने का अधिकारी है, किन्तु वह क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी नहीं होगा।
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