नई औद्योगिक नीति के प्रभाव - Effects of New Industrial Policy

नई औद्योगिक नीति के प्रभाव - Effects of New Industrial Policy


जुलाई, 1991 की औद्योगिक नीति उदारवादी नीति थी। इस नीति के औद्योगिक उत्पादन पर अनेक प्रभाव पड़े। मुख्य प्रभाव निम्नलिखित है:


1. औद्योगिक वृद्धि दर पर प्रभाव नई औद्योगिक नीति के कारण 1995-96 में औद्योगिक वृद्धि सबसे अधिक 121 प्रतिशत रही। इसके पश्चात यह कम हो गई, परंतु नई औद्योगिक नीति के कारण ही आठवीं पंचवर्षीय योजना में वार्षिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत इसके पश्चात नौवीं पंचवर्षीय योजना में वृद्धि दर कम होकर 5 प्रतिशत हो गई। परंतु दसवीं योजना के दौरान यह 8.7 प्रतिशत वार्षिक रही।


2. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर प्रभाव नई औद्योगिक नीति के कारण प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में काफी वृद्धि हुई। सन 1991-92 में 408 करोड़ रु का विदेशी निवेश हुआ।

इसमें निरंतर वृद्धि होती गई। सन 2006-07 में यह बढ़कर 45098 करोड़ रू हो गया। इस प्रकार इसमें अब तक 110 गुना वृद्धि हुई। 1991-92 से 2006-07 तक 232041 करोड़ रु का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ। इस प्रकार इस नीति का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर बहुत अच्छा प्रभाव रहा।


3. लघु तथा कुटीर उद्योगों पर प्रभाव- नई औद्योगिक नीति के कारण लघु उद्योगों की संख्या में वृद्धि हुई। 1992-93 में इनकी संख्या 22 लाख थी जो 2013-014 में 129 लाख (रजिस्टर्ड 20 गैर रजिस्टर्ड 109 ) हो गई।

इस प्रकार सन 1992 से सन् 2014 तक लघु उद्योगों की संख्या में उत्पादन में तथा रोजगार में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई । गुना की दृष्टि से देखा जाए तो लघु उद्योगों की संख्या में 5 गुना उत्पादन में 2 गुना तथा रोजगार में 1 गुना वृद्धि हुई।


परंतु यदि वृद्धि दर को देखा जाए तो इसमें काफी कमी हुई है, जैसे 1992-93 में लघु उद्योगों की संख्या की वृद्धि दर 79 प्रतिशत उत्पादन की वृद्धि दर 17 प्रतिशत थी जो 2013-14 में कम होकर 4 प्रतिशत तथा उत्पादन वृद्धि दर 12 प्रतिशत रह गई। इस कमी का मुख्य कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अधिक महत्व देना है। इन कंपनियों के आने से लघु उद्योगों की प्रतियोगिता में वृद्धि हो गई। परिणामस्वरूप लघु उद्योगों के उत्पादन पर बहुत प्रभाव पड़ा।