क्षेत्रीय असंतुलन के प्रभाव - effects of regional imbalance

क्षेत्रीय असंतुलन के प्रभाव - effects of regional imbalance


भारत में क्षेत्रीय या प्रादेशिक असंतुलन के काफी प्रभाव पडते है। मुख्य प्रभाव निम्नलिखित है (i) साधनों के पूर्ण उपयोग का अभाव क्षेत्रीय असंतुलन के परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्र विकसित - नहीं हो पाते। अविकसित क्षेत्रों में साधनों का अल्प प्रयोग होता है। इस प्रकार साधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता।


(ii) साधनों के उचित उपयोग का अभाव क्षेत्रीय असंतुलन के कारण निजी उद्यमी सीमित प्राकृतिक साधनों का उचित प्रयोग नहीं करते। जिससे उस क्षेत्र में साधनों का अपव्यय होता है। इससे प्राकृतिक असंतुलन उत्पन्न हो जाता है। यह असंतुलन देश के हित में नहीं होता ।


(iii) बेरोज़गारी में वृद्धि क्षेत्रीय असंतुलन के कारण विकसित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर अधिक होते हैं। इसलिए ऐसे क्षेत्रों में बेरोजगारी कम होती है। इसके विपरीत पिछड़े हुए क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में कम वृद्धि होती है। परिणामस्वरूप बेरोजगारी अधिक फैलती है।


(iv) जीवन स्तर में अंतर:- क्षेत्रीय असंतुलन के कारण पिछड़े हुए क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय कम होती है। परिणामस्वरूप जीवन स्तर भी निम्न होता है। विकसित क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय अधिक होने के कारण जीवन स्तर भी ऊंचा होता है। इस प्रकार क्षेत्रीय असंतुलन के जीवन स्तर में भी काफी अंतर उत्पन्न हो जाता है।


(v) आय तथा धन की असमानता क्षेत्रीय असंतुलन के कारण आय तथा धन की असमानता भी बढ़ती है। निर्धन लोग और निर्धन बन जाते है तथा धनी लोग अधिक धनी बनते जाते हैं। गांवों तथा शहरों के बीच में भी आय तथा धन के वितरण की असमानता बढ़ती जाती है।


(vi) सामाजिक लागतों में वृद्धि क्षेत्रीय असमानता के कारण किसी विशेष क्षेत्र में औद्योगिकरण बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप पर्यावरण प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है। इसका श्रमिकों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। श्रमिक अनेक प्रकार की बीमारियों के शिकार हो जाते है।

उनके इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तथा अस्पतालों की स्थापना बड़े पैमाने पर करनी पड़ती है। इससे सामाजिक लागत में वृद्धि होती है।


(vii) आधारभूत सुविधाओं का अभाव- क्षेत्रीय असंतुलन के कारण कुछ क्षेत्रों में अधिक विकास होता है। ऐसे विशेष क्षेत्रों में श्रमिकों की संख्या में वृद्धि होती है। परिणामस्वरूप अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं जैसे आवास की समस्या, बिजली की समस्या, यातायात की समस्या, जलापूर्ति की समस्या इत्यादि। इस प्रकार आधारभूत सुविधाओं की कमी हो जाती है। 


(viii) असामाजिक क्रियाओं में वृद्धि क्षेत्रीय असंतुलन के कारण अविकसित क्षेत्रों में रोजगार के कम अवसर उपलब्ध होते हैं।

परिणामस्वरूप सभी व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त नहीं होता। इससे असामाजिक क्रियाओं में वृद्धि होती है, जैसे- चोरी, रिश्वतखोरी इत्यादि ।


(ix) राजनैतिक अस्थिरता क्षेत्रीय असंतुलन के कारण राजनैतिक अस्थितरता भी बढ़ जाती है।

भारत में कुछ राज्यों में आतंकवाद और उग्रवाद का मुख्य कारण क्षेत्रीय असंतुलन ही है। 


(x) प्राकृतिक विपदा का डर यदि कुछ क्षेत्रों में प्राकृतिक विपदा जैस बाढ़ भूकंप आ जाए तो इसका संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। पर यदि सभी क्षेत्रों का विकास एक समान हो तो एक क्षेत्र में आने वाली प्राकृतिक विपदा का देश की संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर कम प्रभाव पड़ेगा।


इस वर्णन से प्रतीत होता है कि क्षेत्रीय असंतुलन के बहुत ही बुरे प्रभाव पडते हैं। क्षेत्रीय असंतुलन आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक तथा प्राकृतिक दृष्टि से देश के लिए हानिकारक है। इसका देश की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पडता है। इसलिए क्षेत्रीय असंतुलन को कम किया जाना अत्यंत आवश्यक है।