उत्पीड़न के आवश्यक तत्व - essential elements of harassment
उत्पीड़न के आवश्यक तत्व - essential elements of harassment
i. भारतीय दंड विधान में वर्जित कार्य को करना यदि एक पक्षकार अपने कार्य को पूरा करने के लिए दुसरे पक्षकार के साथ कुछ ऐसा करता है जो भारतीय दंड विधान द्वारा वर्जित है, तो उसे उत्पीड़न कहा जाता है। जैसे किसी व्यक्ति की हत्या करना, डाका डालना, अपहरण करना, आत्महत्या करना इत्यादि ।
ii. भारतीय दंड विधान में वर्जित किसी कार्य को करने की धमकी देना यदि एक पक्षकार अपने कार्य को पूरा करने के लिए भारतीय दंड विधान द्वारा वर्जित किस कार्य को करता नहीं जय बल्कि उसे करने की धमकी देता है तो उसे उत्पीड़न माना जाता है। ऐसी धमकी का प्रयोग कर किया गया अनुबंध पीड़ित पक्षकार की अच्छा पर व्यर्थनीय होता है।
iii. अवैध रूप से संपत्ति रोकना किसी व्यक्ति को हानि पहुंचाने के उद्देश्य से उसकी संपत्ति को अवैध रूप से रोकना उत्पीड़न कहलाता है।
iv. अवैध रूप से संपत्ति रोकने की धमकी देना- यदि कोई पक्षकार दूसरे पक्षकार की संपत्ति को अवैध रूप से रोककर रखने की धमकी देता है तो वह भी उत्पीड़न कहलाता है।
V. उत्पीड़न स्वयं पक्षकार द्वारा अथवा किसी एनी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है - उत्पीड़न का प्रयोग एक पक्षकार स्वयं दूसरे पक्षकार पर कर सकता है अथवा किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा वह दूसरे पक्षकार पर उत्पीड़न कर अनुबंध करने के लिए बाध्य कर सकता है।
उत्पीड़न का प्रयोग स्वयं पक्षकार के विरुद्ध अथवा किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध किया जा सकता है।
vi. उत्पीड़न का प्रयोग - एक पक्षकार द्वारा दूसरे पक्षकार के ऊपर स्वयं किया जा सकता है। अथवा किसी अन्य व्यक्ति जो पक्षकार से समबन्धित है के विरुद्ध किया जा सकता है
vil. उत्पीड़न का स्थान - उत्पीड़न का प्रयोग अनुबंध करने के उद्देश्य से किसी भी स्थान पर क्यों न किया जाये, उत्पीड़न ही माना जायेगा। दूसरे शब्दों में, उत्पीड़न का प्रयोग ऐसे स्थान पर भी हो सकता है जहाँ पर भारतीय दंड विधान लागु नहीं होता है।
viii. कुछ धमकियाँ उत्पीड़न नहीं होती सभी धमकियाँ उत्पीड़न नहीं होती है।
ऐसी धमकियाँ जो उत्पीड़न नहीं होती है निम्नलिखित हैं:
• किसी व्यक्ति के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही करने की धमकी देना अथवा इस आधार पर संपत्ति को रोकना अथवा रोकने की धमकी देना उत्पीड़न नहीं है।
• यदि किसी कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को अनुबंध करने के लिए बाध्य किया जाता है तो वह उत्पीड़न नहीं है।
• कर्मचारियों द्वारा अपनी मांग मनवाने के लिए दी जानेवाली धमकियाँ उत्पीड़न नहीं है।
ix. उत्पीड़न की विद्यमानता - उत्पीड़न की विद्यमानता केवल उसी समय मानी जाएगी जबकि दूसरे पक्षकार ने वास्तविक रूप से इससे प्रभावित होकर अपनी सहमति दी हो।
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