प्रभावी निष्पादन मूल्यांकन प्रणाली की अनिवार्य आवश्यकताएं - Essential Requirements of an Effective Performance Appraisal System
प्रभावी निष्पादन मूल्यांकन प्रणाली की अनिवार्य आवश्यकताएं - Essential Requirements of an Effective Performance Appraisal System
एक प्रभावी निष्पादन मूल्यांकन प्रणाली के निम्न आवश्यक हैं:
1. पारस्परिक विश्वासः
भरोसे और विश्वास के माहौल का महत्त्व इतना अधिक है कि दोनों पर्यवेक्षक और कर्मचारी स्पष्ट रूप से विभिन्न मुद्दों पर पर चर्चा कर सकते हैं और उन सुझावों की पेशकश कर सकते हैं जो संगठन तथा कर्मचारी के सुधार के लिए बेहद लाभप्रद हो सकते हैं। मूल्यांकन प्रणाली को प्रस्तुत एवं क्रियान्वित करने से पहले संगठन में आपसी विश्वास और आत्मविश्वास का माहौल बनाया जाना चाहिए। मूल्यांकन पर स्पष्ट चर्चा एवं बेहतर परिणामों के लिए ऐसा वातावरण आवश्यक है। यह मूल्यांकन प्रणाली में कर्मचारियों का विश्वास प्राप्त करने में भी मदद करता है।
2. स्पष्ट उद्देश्य:
निष्पादन मूल्यांकन के उद्देश्य और उपयोग स्पष्ट और विशिष्ट होने चाहिए। उद्देश्य प्रासंगिक, समय पर और प्रत्यक्ष होने चाहिए। पर्यवेक्षक को कर्मचारी के प्रदर्शन का अच्छी तरह से मूल्यांकन करना चाहिए जिससे कि वह अपने द्वारा की गयी अधीनस्थों की अपनी रेटिंग के बारे में चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।
3. मानकीकरण:
अच्छी तरह से परिभाषित प्रदर्शन कारक और मापदंड विकसित किए जाने चाहिए। इन कारकों के साथ-साथ मूल्यांकन प्रपत्र, प्रक्रियाएं और तकनीकों को मानकीकृत किया जाना चाहिए।
यह एकरूपता और रेटिंग की तुलना सुनिश्चित करने में मदद करेगा। मूल्यांकन तकनीकों को वही मापना चाहिए जिसके मापन के उद्देश्य के लिए उनका प्रयोग किया जा रहा हो। साथ ही साथ इनके प्रशासन एवं उपयोग की विधि भी सरल तथा किफायती होनी चाहिए। मूल्यांकन प्रणाली को प्रदर्शन आधारित एवं एकरूप होना चाहिए। कर्मचारियों को प्रदर्शन मानकों के बारे में पूरी तरह से अवगत होना चाहिए और उन्हें मानकों को निर्धारित करने में सम्मिलित करना चाहिए।
4. प्रशिक्षण:
मूल्यांकनकर्ताओं को उनके दर्शन और मूल्यांकन की तकनीक में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उन्हें मूल्यांकन के अभिलेखन, मूल्यांकन पश्चात साक्षात्कार, रेटिंग त्रुटियों इत्यादि के लिए ज्ञान और कौशल प्रदान किया जाना चाहिए।
5. नौकरी सम्बद्धता:
मूल्यांककर्ताओं को नौकरी से संबंधित व्यवहार और कर्मचारियों के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। व्यक्तित्व गुणों के बजाय प्रदर्शन के परिणामों को उचित वजन दिया जाना चाहिए। सुधार के लिए सुझावों को कार्य से सम्बंधित वस्तुनिष्ठ तथ्यों के प्रति निर्दिष्ट होना चाहिए, जैसे कि, काम की समय-सारणी, उत्पादन, पूर्ण प्रतिवेदन, विक्रय, हानि, लाभ आदि से सम्बंधित
6. शक्ति और कमजोरियाँ:
मूल्यांकनकर्ताओं को अपनी रेटिंग का औचित्य प्रमाणित करने की आवश्यकता होनी चाहिए। पर्यवेक्षक को किसी कर्मचारी की ताकत और कमजोरियों का विश्लेषण करने की कोशिश करनी चाहिए तथा उन कमजोरियों को ठीक करने के लिए उन्हें सलाह देना चाहिए।
7. प्रतिपुष्टि और सहभागिता:
कर्मचारियों और मूल्यांकनकर्ताओं, दोनों के बीच मूल्यांकन पर संवाद करने के लिए व्यवस्था की जानी चाहिए। कर्मचारियों को कार्यप्रणाली प्रबंधन और मूल्यांकन की निरंतर प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। पर्यवेक्षकों को श्रेष्ठ मार्गदर्शक और परामर्शदाता की भूमिका निभानी चाहिए। आकलन के समग्र उद्देश्य निर्णयात्मक होने की बजाय विकासात्मक होना चाहिए।
8. वैयक्तिक भिन्नताएं:
मूल्यांकन प्रणाली को डिजाइन करते समय, संगठनों को वैयक्तिक भिन्नताओं को संज्ञान में लेना चाहिए। प्रत्येक संगठन आकार, प्रकृति, आवश्यकताओं और पर्यावरण के संदर्भ में भिन्न होता है, इसलिए मूल्यांकन प्रणाली को संगठन विशेष के लिए बनाया जाना चाहिए। प्रतिपुष्टि, गतिशीलता, आत्मविश्वास और ग्राह्यता के मामले में मूल्यांकन की आवश्यकताओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
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