अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना - Establishment of International Monetary Fund
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना - Establishment of International Monetary Fund
द्वितीय महायुद्ध का विश्व की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा। इस अवस्था का सुधार करने के उद्देश्य से अमेरिका में जुलाई 1944 में ब्रेटेन वुड्स नामक स्थान पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया गया, जिसमें 44 मित्र राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि सभी देशों के आर्थिक विकास के लिए दो संस्थाएं स्थापित की जाए।
(क) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
(ख) अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण तथा विकास बैंक ।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
27 दिसंबर 1945 को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना की गई।
इस संस्था ने 1 मार्च 1947 अपना कार्य आरंभ कर दिया। वर्तमान में इस कोष के सदस्य 184 राष्ट्र हैं।
प्रो. हॉम ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बारे में कहा कि यह संस्था केंद्रीय बैंकों का बैंक है अर्थात जिस प्रकार किसी देश का केंद्रीय बैंक अपने देश के व्यापारिक तथा अन्य बैंकों के नकद कोषों की व्यवस्था करता है उसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा को सदस्य राष्ट्रो के साधनों का केंद्रीयकरण करके अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सहायता करता है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के उद्देश्य
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं
(i) अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग की स्थापना:- इस कोष का प्रथम उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मौद्रिक सहयोग स्थापित करता है तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समस्याओं को सुलझाने में समय-समय पर सुझाव देना है।
(ii) अंतरराष्ट्रीय व्यापार के संतुलित विकास को बढ़ावा देना:- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का दूसरा महत्वपूर्ण उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रों में आपसी व्यापार में उत्पन्न होने वाली बाधाओं को समाप्त करना है। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार को संतुलित रूप से प्रोत्साहित करना है, ताकि सदस्य राष्ट्रों के बीच रोजगार एवं वास्तविक आय का स्तर ऊंचा हो सके।
(iii) भुगतानों की बहुपक्षीय व्यवस्था कोष का यह भी उद्देश्य है
कि वह सदस्य देशों के बीच भुगतान व्यवस्था के सम्बन्ध में द्विपक्षीय भुगतान व्यवस्था के स्थान पर बहुपक्षीय भुगतान की व्यवस्था करवाए।
(iv) विनिमय दरों में स्थिरता - मुद्रा कोष के उद्देश्यों में यह भी उद्देश्य है कि वह सदस्य देशों की विनिमय दरों में स्थिरता बनाए रखने का प्रयत्न करेगा। अब इस उद्देश्य में संशोधन कर दिया गया है।
(v) विनिमय नियंत्रण को हटाना यह कोष सदस्य देशों द्वारा विदेशी विनिमय पर लगाए गए नियंत्रणो को हटाने का प्रयत्न करेगा।
(vi) सदस्य राष्ट्रों की विदेशी मुद्राएं उपलब्ध करवाना:- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष उन देशों को विदेशी मुद्रा उपलब्ध करवाता है
जिन्हें विदेशी मुद्रा की वास्तव में आवश्यकता होती है। इस विषय पर प्रो. क्राउथर ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा घाटे वाले देशों की विदेशी मुद्रा उपलब्ध करवाना है। वे इससे घाटे को पूरा करते हैं।
(vii) संकटकाल में सदस्यों की सहायता - फंड का उद्देश्य संकटकाल में सदस्य देशों को अल्पकालीन मौद्रिक सहायता देना है।
(viii) अंतरराष्ट्रीय भुगतान असंतुलन को कम करना इस फंड का उद्देश्य सदस्य देशों के अंतरराष्ट्रीय भुगतानों के असंतुलन की अवधि तथा मात्रा को कम करना है। इसके लिए उन्हें मौद्रिक सहायता देना है।
(ix) पूंजी का लाभप्रद निवेश इस कोष का उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों को उनकी दीर्घकालीन पूंजी को लाभप्रद कार्यों में लगाने में सहायता करना है। यह विशेष रूप से धनी देशों को निर्धन देशों में पूजी का निवेश करने में सहायता प्रदान करता है।
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