विज्ञापन प्रभावशीलता का मूल्यांकन - Evaluation of advertising effectiveness

विज्ञापन प्रभावशीलता का मूल्यांकन - Evaluation of advertising effectiveness


विज्ञापन इस उद्देश्य से किया जाता है कि नई पुरानी वस्तुओं की बाजार मांग में निरंतर वृद्धि होती रहे इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु विज्ञापन का मूल्यांकन करना अति आवश्यक हो जाता है कि किया गया विज्ञापन कितना प्रभावशाली एवं प्रयोगात्मक रहा है। प्रायः अधिकाश विज्ञापन कार्यक्रमों में मूल्यांकन के दो आधारभूत उद्देश्य होते हैं -


(i) कितने व्यक्तियों तक विज्ञापन पहुंचा है (श्रोताओं की संख्या का आकार)


(ii) ऐसे श्रोताओं द्वारा कितनी प्रभावशीलता से विज्ञापन को समझा या महसूस किया गया है?


कोटलर के अनुसार, "विज्ञापन का अच्छा नियोजन तथा नियन्त्रण मुख्यत विज्ञापन प्रभावशीलता के आलोचनात्मक मूल्यांकन पर निर्भर होता है।"


विज्ञापन अनुसंधान हैण्डबुक के अनुसार, "विज्ञापन प्रभावशीलता का मूल्यांकन योगदान को अधिकतम करने में मदद करता है जो कि विज्ञापन कर सकता है अगर विज्ञापन की प्रभावशीलता का मूल्यांकन नहीं किया जाता है तो विज्ञापन पर किया जाने वाले खर्च की कुशलता तथा प्रभाव की गणना नहीं की जा सकती है। तब विपणनकर्ता कोई फायदा नहीं उठा सकता है जो कि विज्ञापन विक्रय तथा लाभ को कर सकता है। लतीफ ने भी विज्ञापन प्रभावशीलता को विज्ञापन का सार बताया है विज्ञान एक खर्चीला कार्यक्रम है किंतु फिर भी आज के युग में अनिवार्यता माना गया है। अनेक विद्वानों की मान्यता है कि विज्ञापन पर किये गये खर्च का अधिकांश हिस्सा व्यर्थ हो जाता है। आधुनिक युग में विज्ञापन के महत्व को देखते हुए यह तो संभव नही है कि विज्ञापन न किया जाये, किंतु यह भी आवश्यक है कि हम विज्ञापन की प्रभावोत्पादकता का मूल्यांकन भी निरंतर करते रहे।


वास्तव में प्रभावोत्पादकता का मूल्यांकन कोई सरल कार्य नहीं है और न ही इसके लिए कोई एक विधि निश्चित की जा सकती है, क्योंकि विज्ञापन के विभिन्न उद्देश्य होते हैं। इस कार्य को करने में कंपनी अनेक कठिनाइयों का सामना करती है। जिन विज्ञापनों का उद्देश्य तुरन्त विक्रय करना नहीं होता, वहां पर तो यह कार्य और भी कठिन हो जाता है। कुछ ऐसे विवरण होते हैं जिनका उद्देश्य विक्रय वृद्धि करना ही नहीं होता एवं उनका प्रभाव आकना तो और भी अधिक कठिन कार्य होता है। आधुनिक युग में व्यवसाय में विज्ञापन एक अनिवार्यता बन गया है। प्रत्येक व्यवसाय द्वारा विज्ञापन पर विशाल धनराशि खर्च की जाती है अत इस व्यय के औचित्य को प्रमाणित करना अति आवश्यक प्रतीत होता है। कोलीन तथा क्राउथर का मत है कि,

"यदि विज्ञापन की प्रभावशीलता का माप नहीं किया जाता है तो विज्ञापन पर किये गये व्यय की कुशलता तथा प्रभावोत्पादकता की गणना नहीं की जा सकती है।" इन्होंने आगे लिखा है कि विज्ञापन प्रभावोत्पादकता का माप प्रबंधकों को योगदान अधिकतम योगदान करने में सहायता करता है, जो विज्ञापन कर सकता है।


विज्ञापन अनुसंधान हैंडबुक के अनुसार, "विज्ञापन प्रभावशीलता मापने की विधियों को मुख्यत छ भागों में बांटा जा सकता है।


(i) ऐच्छिक प्रत्युत्तर मापन


(ii) अनैच्छिक प्रत्युत्तर मापन


(iii) मनोवैज्ञानिक मापन


(iv) यान्त्रिक सुविधाए


(v) उद्देश्यात्मक मापन


(vi) नियन्त्रित परीक्षण