अपवाद - exception

अपवाद - exception


सामान्यत: क्रेता की सावधानी का नियम लागु होता है किन्तु निम्नलिखित परिस्थितियों में क्रेता की सावधानी का नियम लागु नहीं होता है और माल के दोष के संबंध में विक्रेता की उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।


1. विक्रेता को उद्देश्य प्रकट करने की दशा में यदि माल खरीदने समय क्रेता द्वारा अपना उद्देश्य - स्पष्ट कर दिया जाये जिसके लिए माल खरीदना है तो विक्रेता का यह कर्त्तव्य है कि उस निश्चित उद्देश्य के अनुसार वस्तु है।


2. वर्णन द्वारा विक्रय की दशा में :- यदि माल का विक्रय वर्णन द्वारा हुआ तो गर्भिय शर्त है कि माल वर्णन के अनुसार होगा। ऐसी स्थिति में माल में 'व्यापार योग्यता होना आवश्यक है। यहाँ पर क्रेता की सावधानी का नियम लागु नहीं होगा।


3. नमूने द्वारा विक्रय की दशा में :- यदि विक्रेता द्वारा माल का विक्रया नमूने द्वारा किया जाता है तो ऐसी स्थिति में यह गर्भित शर्त है कि माल नमूने के अनुसार ही होगा।


4. विक्रेता द्वारा मिथ्या वर्णन की दशा में यदि विक्रेता माल के संबंध में मिथ्या वर्णन करता है।

और क्रेता उसपर विश्वास करता है तो क्रेता की सावधानों का नियम लागु नहीं होगा। 


5. छल-कपट की दशा में यदि विक्रेता से किसी वस्तु बेचने की सहमति छल-कपट से प्राप्त की है तो विक्रेता उत्तरदायी होगा क्रेता नहीं।


6. व्यापार की रीति अथवा परंपरा की दशा में कुछ अनुबंधों में व्यापार की रीति अथवा परंपरा के अनुसार माल की किस्म अथवा उपयुक्तता की शर्त हो सकती है। ऐसी स्थिति में क्रेता की सावधानी का नियम लागु नहीं होगा।