उपरोक्त नियम के अपवाद -exceptions to the above rule
उपरोक्त नियम के अपवाद -exceptions to the above rule
निम्नलिखित परिस्थितियों में क्रेता का अधिकार विक्रेता से श्रेष्ठ होगा :
I. गारोध द्वारा अधिकार की दशा में:- यदि माल का वास्तविक स्वामी अपने आचरण द्वारा क्रेता को यह विश्वास दिलाता है कि विक्रेता ही माल का वास्तविक स्वामी है, अथवा माल को बेचने के लिए स्वामी से उसे अधिकार प्राप्त है और क्रेता को इस विश्वास पर माल खरीदने के लिए प्रेरित करता है, तो बाद में वह यह नहीं कह सकता है कि विक्रेता को माल बेचने का अधिकार नहीं था। ऐसी परिस्थिति में क्रेता को अच्छा अधिकार प्राप्त हो जाता है।
II. व्यापारिक एजेण्ट द्वारा विक्रय की दशा में यदि किसी व्यापारिक एजेण्ट के अधिकार में स्वामी की सहमति से माल अथवा माल के अधिकार संबंधी प्रलेख हों,
तो व्यापार की साधारण प्रगति में उसके द्वारा की गई बिक्री उतनी ही मान्य होगी जैसे उसे माल के स्वामी द्वारा माल के विक्रय करने का स्पष्ट अधिकार प्राप्त हो, बरात क्रेता ने सद्विश्वास के साथ कार्य किया हो एवं विक्रय अनुबंध के समय उसे सूचना प्राप्त न हो कि विक्रेता को माल बेचने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
III. संयुक्त स्वामियों में से किसी एक के द्वारा विक्रय जहाँ माल के अनेक सामियों में से किसी एक स्वामी को सहस्वामियों की सहमति से माल पर एकाकी अधिकार प्राप्त हो और माल का स्वामित्व ऐसे व्यक्ति को हस्तांतरित हो जाता है, जो उसको सदविश्वास के साथ खरीद लेता है तथा जिसे विक्रय का अनुबंध करतेसमय यह सूचना प्राप्त नहीं है कि विक्रेता को माल बेचने का अधिकार नहीं है तो ऐसे क्रेता का अधिकार श्रेष्ठ होता है।
IV. व्यर्थनीय अनुबंध के अंतर्गत माल पर अधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा विक्रय - यदि विक्रेता ने माल पर अधिकार भारतयी अनुबंध अधिनियम की धारा 19 (अ) के अधीन व्यर्थनीय अनुबंध माल विक्रय के समय तक निरस्त किया गया हो, तो क्रेता को ऐसे माल का श्रेष्ठ अधिकार प्राप्त होगा बशर्ते उसे सहविश्वास के साथ खरीदा हो तथा उसे विक्रेता के दोषपूर्ण अधिकार की जानकारी न हो।
V. विक्रय के बाद माल पर अधिकार रखने वाले विक्रेता द्वारा किया जब विक्रेता माल को बेच देने के पश्चात भी माल के अधिकार संबंधी प्रलेख अपने पास रखता है तथा बाद में वह स्वयं तथा उसका व्यापारिक एजेण्ट उस माल को किसी तृतीय पक्षकार के हाथ बेच देता है तो क्रेता का अधिकार श्रेष्ठ रहेगा, बशर्ते उसने सदविश्वास के साथ माल खरीदा हो तथा उसे पहले के विक्रय की जानकारी न हो।
VI. माल पर अधिकार रखनेवाले क्रेता द्वारा विक्रय- यदि कोई क्रेता विक्रेता की सहमति से माल का स्वामित्व हस्तांतरित होने से पूर्व माल अथवा माल के अधिकार संबंधी प्रलेख प्राप्त कर लेता है और इसके पश्चात किसी तीसरे व्यक्ति को बेच देता है, तो क्रेता का अधिकार श्रेष्ठ रहेगा।
VII. अदत्त विक्रेता द्वारा पुनः विक्रय की दशा में विक्रय अनुबंध अधिनियम की धारा 54(c) के अनुसार, “एक अदत्त विक्रेता अपने ग्रहणाजिकार अथवा माल की मार्ग में रोकने के अपने अधिकार को प्रयोग करने के पश्चात उस माल की पुनः बेच सकता है। ऐसी स्थिति में माल के क्रेता अधिकार श्रेष्ठ रहता है।"
VIII. खाये हुए माल के पाने वाले द्वारा विक्रय खोये हुए माल के पानेवाले को कुछ परिस्थितियों में माल बेचने का अधिकार होता है। ऐसी दशा में भी क्रेता को श्रेष्ठ अधिकार प्राप्त होता है।
IX. बंधक गृहिता द्वारा विक्रय - बंधनगृहित को भी कुछ परिस्थितियों में बंधक में रखे गये माल की बेचने का अधिकार होता है। ऐसी दशा में भी क्रेता को श्रेष्ठ अधिकार प्राप्त होता है।
X. न्यायालय की आज्ञा के अंतर्गत विक्रय न्यायालय की आज्ञा के अंतर्गत विक्रय की दशा में भी क्रेता का अधिकार श्रेष्ठ रहता है।
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