विनिमय दर - exchange rate

विनिमय दर - exchange rate


विनिमय दर से अभिप्राय एक मुद्रा की दूसरी मुद्रा में कीमत से है। दूसरे शब्दों में, यह यह अनुपात है जिस पर एक देश की मुद्रा दूसरे देश की मुद्रा से बदली जाती है। कुछ अर्थशास्त्री विनिमय दर को मुद्रा का बाह्य मूल्य भी कहते हैं। यदि एक डॉलर के बदले में 30 रूपये देने पड़ते हैं तो यह डॉलर की रूपये में विनिमय दर हैं। इस प्रकार अलग-अलग मुद्राओं की विनिमय दर भी अलग-अलग होती हैं। विनिमय दर की कुछ परिमाप निम्नलिखित है काउथर के अनुसार, "विनिमय दर एक देश की इकाई मुद्रा के बदले में दूसरे देश की कितनी मुद्रा इकाइयां मिल सकती हैं, उसकी माप है।"


हैन्स के अनुसार,  विनिमय दर एक देश की मुद्रा इकाई की दूसरे देश की मुद्रा में कीमत है। 


सेयर्स के अनुसार, विनिमय मुद्राओं के परस्पर मूल्यों को ही विदेशी विनिमय दर कहा जाता है।"


स्वतंत्र विनिमय बाजार में बाजार विनिमय दर तथा सामान्य विनिमय दर में अंतर हो सकता है। बाजार दर में समय-समय पर परिवर्तन होता रहता है. किन्तु यह परिवर्तन प्राय कुछ सीमाओं के आसपास ही होते है तथा सामान्य दर पर लौटने की प्रवृत्ति रखते हैं विनिमय दर में वृद्धि भुगतान संतुलन के लिए अनुकूल होती है और उसमें कमी होना प्रतिकूल होता है। विदेशी व्यापार के दृष्टिकोण से अनुकूल विनिमय दर का प्रभाव होता है कि विदेशी आयातों के बदले कम मुद्रा देनी पड़ती है, विदेशी आयात सस्ते पड़ते है और उनकी मात्रा बढ़ने लगती है. देश में उत्पादन करने के बजाय बाहर से माल मंगवाना सस्ता होने के कारण देश में उत्पादन गिरने लगता है निर्यात कम हो जाते हैं और विनिमय दर भी गिर जाती है। विनिमय दर का गिर जाना देश के लिए प्रतिकूल होता है। देश की मुद्रा सस्ती होने के कारण निर्यात बढ़ ने लगते हैं, औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन मिलता है, व्यापार सन्तुलन पक्ष में होता है.

देश की मुद्रा की मांग बढ़ती है और विनिमय दर भी बढ़ने लगती है। इस प्रकार किसी भी देश की मुद्रा की विनिमय दर बहुत अधिक समय तक अनुकूल नहीं रह पाती है।


विनिमय दर के निम्नलिखित रूप हो सकते है-


(क) हाजिर दर तथा अग्रिम दर हाजिर दर का संबंध एक निश्चित समय से है और इस पर विदेशी मुद्रा तत्काल प्राप्त की जा सकती है अग्रिम दर वह विनिमय दर है जिस पर भविष्य में किसी निर्धारित समय पर विदेशी मुद्रा का कय-विक्रय किया जा सकता है जो हाजिर दर से अधिक हो सकती है अथवा कम।


(ख) कय- दर तथा विकय दर जब विनिमय नियन्त्रण के अंतर्गत सरकार अथवा केन्द्रीय बैंक द्वारा विनिमय दर का निर्धारण किया जाता है तो विदेशी मुद्राओं के कय तथा विकय की दरें अलग-अलग निर्धारित की जाती है। कच-दर प्राय विक्रय दर से कम होती है। 


(ग) एक दर तथा बहु दरें सामान्यतया किसी अन्य देश की मुद्रा के लिए किसी समय एक ही विनिमय दर होती है। परंतु कुछ परिस्थितियों में एक से अधिक दरें भी हो सकती है जैसे निर्यात आयातों तथा पूंजी हस्तान्तरणों के लिए अलग-अलग दरें होना बहु दरों की प्रणाली भेदभावपूर्ण होती है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध किया जाता है।


(घ) स्थिर तथा चल दरें:- स्थिर विनिमय दरें स्वर्ण अथवा किसी अन्य मुद्रा के संबंध में स्थिर होती है। चल दरें विदेशी विनिमय की मांग और पूर्ति में परिवर्तना के अनुसार बदलती रहती है तथा इन परिवर्तनों के द्वारा मुद्रा की स्वाभाविक दर प्राप्त करती है। 


(ङ) बाजार दर तथा सन्तुलित दर:- बाजार दर अल्प काल में बाजार में मुद्रा का विनिमय दर है। इसके विपरीत, संतुलित दर ऐसी विनिमय दर है जो एक निश्चित अवधि में अर्थव्यवस्था में भुगतान सन्तुलन का साम्य प्राप्त करने में सहायक होती है। यह एक सैद्धान्तिक अवधारणा है जिसे विनिमय दर में लचक के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।