पारस्परिक वचनों का निष्पादन - execution of reciprocal promises

पारस्परिक वचनों का निष्पादन - execution of reciprocal promises


भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 2 (F) के अनुसार, "वचन जो एक-दुसरे के लिए प्रतिफल अथवा आंशिक प्रतिफल होते हैं, पारस्परिक वचन कहलाते हैं।"


पारस्परिक वचनों के निष्पादन संबंधी नियम निम्नलिखित है:


i. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 51 के अनुसार, “जब अनुबंध में ऐसे पारस्परिक वचन होते हैं जिन्हें एक साथ पूरा किया जाता है, तो जब तक वचनगृहीता अपने वचन के निष्पादन के लिए इच्छुक तथा तत्पर नहीं हो जाता तब तक वचनदाता के लिए यह आवश्यक नहीं कि वह वचन का निष्पादन करे ।"


ii. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 52 के अनुसार, “जहाँ पर वचनों के निष्पादन के लिए क्रम स्पष्टतया निश्चित हो तो वचनों का निष्पादन उसी क्रमानुसार होगा और यदि क्रम स्पष्टतया निश्चित न हो, तो निष्पादन व्यवहार की प्रकृति के अनुसार होगा।"


iii. भारतीय अनुबंश अधिनियम की धारा 53 के अनुसार, "जब अनुबंध पारस्परिक वचनों का है और एक पक्षकार दुसरे पक्षकार को वचन देने व निष्पादन करने से रोकता है, तो उस रोके हुए पक्षकार की इच्छा पर अनुबंध व्यर्थनीय है और यदि निष्पादन न करने से उसे किसी भी प्रकार की हानि हुई है, तो वह उसकी क्षतिपूर्ति कराने का भी अधिकारी है।"


iv. भारतीय अनुबंध अधिनियम के धारा 54 के अनुसार,

“जब अनुबंध किसी ऐसे व्यापारिक वचनों का है जिसके अंतर्गत, जब तक एक वचन का निष्पादन नहीं हो जाता, तब तक दुसरे का निष्पादन नहीं हो सकता तो पहले वचन के निष्पादित न होने की दशा में, वचनदाता दूसरे वचन के निष्पादन की मांग नहीं कर सकता। इसके अतिरिक्त, यदि निष्पादन न करने से दुसरे पक्षकार को हानि हुई हो, तो उसे क्षतिपूर्ति करनी होगी।"


V. पारस्परिक वचन जिसमें समय अनुबंध का सार है भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा ५५ के अनुसार, इस संबंध में निम्न तीन नियम हैं : 


• जब अनुबंध का कोई पक्षकार निश्चित समय अथवा उससे पहले किसी कार्य को करने का वचन देता है।


• यदि पक्षकारों का अभिप्राय समय को सार मन्ना नहीं तह


• यदि समय अनुबंध का सार साई किनती वचनगृहीता निश्चित समय के अतिरिक्त भी किसी समय निष्पादन करना स्वीकार कर लेता है।


vi. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 57 के अनुसार, “जब पक्षकार पहले तो कुछ वैध कार्य करने के लिए तथा बाद में निश्चित परिस्थितियों में कुछ अवैध कार्य करने के लिए पारस्परिक वचन देते हैं, तो पहले वचनों का भाग अनुबंध होता है, परन्तु दुसरे वचनों का भाग व्यर्थ ठहराव है।"


vii. भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा ५८ के अनुसार, “वैकल्पिक वचन जिसका एक विकल्प वैध है तथा दूसरा अवैध है, केवल वैध विकल्प को ही प्रवर्तित कराया जा सकता है।"