विज्ञापन अनुसंधान पर व्यय - Expenditure on Advertising Research

विज्ञापन अनुसंधान पर व्यय - Expenditure on Advertising Research


विज्ञापन अनुसंधान का बजट बनाते समय विशेष रूप से ध्यान में रखना आवश्यक है कि -


(1) प्रत्येक अनुसंधान परियोजना पर कितना व्यय होगा?


(2) प्रत्येक अनुसंधान परियोजना से कितना लाभ होगा?


अनुसंधान परियोजना के व्यय और लाभ को निम्नलिखित तीन विधियों द्वारा आंका जा सकता है-


1 साधारण बचत विधि विज्ञापन अनुसंधान यथार्थ निर्णय होने की संभावना में वृद्धि करता है।

अन्य शब्दों में त्रुटिपूर्ण निर्णय लेने की संभावना कम हो जाती है। इस प्रकार अनुसंधान का कार्य उसी समय तक उचित होता है जब तक कि उसका होने से सम्पूर्ण निर्णय के कारण होने वाली हानि कम हो जाती है।


2. विनियोग पर प्रत्याय विधि भूतकाल में विज्ञापन अनुसंधान पर किये गये व्यय तथा भूतकाल की अनुसंधान द्वारा संस्था को होने वाले लाभ को दृष्टि में रखते हुए वर्तमान अनुसंधान परियोजना को वित्त उपलब्ध कराया जाता है। 


3. वर्तमान मूल्य विधि यह विधि इस मान्यता पर आधारित है

कि किसी अनुसंधान परियोजना का वर्तमान मूल्य परियोजना से समाप्त होने वाले कार्य के साथ ही शून्य नहीं रह जाता, अपितु उसका मूल्य सीमित भविष्य में भी बना रहता है अत किसी अनुसंधान परियोजना को एक निश्चित मूल्य पर क्रियान्वयन करने की वांछनीयता का निर्णय लेते समय परियोजना से संबंधित वर्षों की आय के साथ-साथ भविष्य की संभावित आय का भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।


जार्ज डाउनिंग के अनुसार, विज्ञापन बजट का निर्धारण निम्न रीतियों द्वारा किया जाता है -


(i) विगत विक्रय के प्रतिशत के आधार पर विज्ञापन राशि निर्धारित की जा सकती है। 


(ii) भावी अनुमानित विक्रय का एक निश्चित प्रतिशत विज्ञापन पर व्यय किया जा सकता है.


(iii) प्रतिशत इकाई विक्रय के एक स्थिर भाग को विज्ञापन पर व्यय का आधार माना जा सकता है।


(iv) प्रतिस्पर्धा विज्ञापन पर जितनी राशि खर्च कर रहे है, उसी के बराबर स्वयं द्वारा विज्ञापन पर खर्च किया जा सकता है।