अन्वेषणात्मक अनुसंधान डिजाइन - exploratory research design

अन्वेषणात्मक अनुसंधान डिजाइन - exploratory research design


इस अनुसंधान प्ररचना में विचारों एवं तथ्यों पर अधिक बल दिया जाता है। जब किसी अनुसंधान कार्य का उद्देश्य किसी विपणन समस्या में अन्तर्निहित कारणों को ढूंढ निकालना होता है तो उससे सम्बद्ध रुपरेखा को अन्वेषणात्मक अनुसंधान प्ररचना कहते हैं।


सी. विलियम एमोर्य के मतानुसार, "इस प्रकार की अनुसंधान प्ररचना विशेषतः उस समय उपयोगी होती है जबकि अनुसंधानकर्ता के पास समस्या के स्पष्ट विचार का अभाव होता है जोकि उसे अध्ययन के दौरान पूरा करना है। अन्येपण के द्वारा अनुसंधानकर्ता समस्या को अधिक स्पष्ट रूप में विकसित करता है, उसकी प्राथमिकताओं का निर्धारण करता है और अन्य कई रूपों में अपनी अंतिम अनुसंधान प्ररचना का सुधार करता है।" अन्वेषण उसे समय तथा धन की बचत करने में भी सहायता करता है. यदि अध्ययन के बाद यह निर्धारित है

कि समस्या उतनी महत्वपूर्ण नही है जितनी उसने सोची थीं। इस प्रकार, इसमें अनुसंधान कार्य की रुपरेखा इस ढंग से प्रस्तुत की जाती है कि समस्या की प्रकृति व उसके वास्तविक कारणों की खोज की जा सके विपणन अनुसंधान में इस प्रकार की अनुसंधान प्ररचना अत्याधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र में अनुसंधान कार्य बहुत ही कम हुआ है। अतः अन्वेषणात्मक अनुसंधान द्वारा बदलते व्यवहारों एवं नीतियों का पता लगाया जाता है तथा नये विकल्पों का विकास किया जाता है।


ब्रॉयड तथा वेस्टफाल का मत है कि अन्वेषणात्मक अनुसंधान का प्राय प्रयोग किया जाता है जबकि एक ग्राहक या प्रबंधक द्वारा अनुसंधानकर्ता को बुलाया जाता है जो यह कहता है कि हम वांछित विक्रय परिणाम प्राप्त नहीं कर पा रहे है जितना हम सोचते थे क्या गलत हो गया है? यह इस बारे में सफलता चाहता है कि उसे क्या कार्यवाही करनी चाहिए? अन्वेषणात्मक अनुसंधान एक प्राकृतिक चरण है। यदि अनुभूत समस्या ज्यादा सामान्य नहीं है तो भी अन्वेषणात्मक अनुसंधान की आवश्यकता होती है।