भारत की विदेश व्यापार नीति में निर्यात वृद्धि की व्यूह रचना - Export Growth Strategy in India's Foreign Trade Policy
भारत की विदेश व्यापार नीति में निर्यात वृद्धि की व्यूह रचना - Export Growth Strategy in India's Foreign Trade Policy
भारत की विदेशी व्यापार नीति में निर्यात वृद्धि के लिए किए जाने वाले उपाय या उठाए जाने वाले कदम निम्न है -
भारत की विदेशी व्यापार नीति का मुख्य उद्देश्य सन 2020 तक विश्व व्यापार में भारत के निर्यात भाग को 3.5 प्रतिशत अर्थात दो गुना करना है।
इसके साथ ही निर्यात उन्मुख कियाओं के द्वारा रोजगार उत्पन्न करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए निम्न कदम उठाए गए हैं -
(क) कृषि के लिए विशेष पैकेज:- कृषि के अंतर्गत फलों फूलों, सब्जियों लघु वन उत्पादों और इनके मूल्य वर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए विशेष कृषि उपज योजना आरम्भ की गई। इसके द्वारा इन उत्पादों का निर्यात 5 प्रतिशत ड्यूटी फी केडिट एन्टाइटलमेंट के लिए होगा।
(ख) पांच परम्परागत निर्यातों पर फोकस कृषि के साथ चार और क्षेत्रों से निर्यात की और ध्यान दिया जाएगा जैसे चमड़ा एवं फुटवियर हस्तशिल्प, हथकरघा और रत्न एवं आभूषण आदि इस प्रकार कुल 5 क्षेत्रों के निर्यात पर फोकस करने का लक्ष्य है। ये क्षेत्र श्रम प्रधान हैं। इनसे निर्यातों में वृद्धि द्वारा अर्द्धशहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। इन क्षेत्रों के निर्यात वाले केंद्रों को टाउन्स ऑफ एक्सपोर्ट एक्सलेंस का दर्जा दिया गया है। इनके अन्तर्गत निर्यात सीमा को 1000 करोड़ से कम करके 250 करोड़ कर दिया गया है।
(ग) सेवाओं के लिए निर्यात को बढ़ावा इसके लिए निम्न योजनाएं आरम्भ की जाएगी-
(i) एक नई योजना सर्ल्ड फाम इंडिया योजना की घोषणा की गई है। इसके अन्तर्गत कम से कम 10 लाख रूपए की विदेशी मुद्रा कमाने वाले व्यक्तिगत सेवा उत्पादक अपनी विदेशी मुद्रा प्राप्तियों के 10 प्रतिशत की ड्यूटी केडिट एन्टाइटलमेंट के योग्य होंगे। यह एन्टाइटलमेंट अकेले रेस्टोरेंट के लिए 20 प्रतिशत होगा परंतु होटलों के लिए यह 5 प्रतिशत होगा।
(ii) इसके साथ ही विश्व बाजार में सेवाओं के निर्यात को बढ़ाने के लिए सेवा निर्यात संवर्द्धन परिषद का गठन होगा।
(घ) निर्यातोन्मुख इकाइयों के लिए सुविधाओं में वृद्धि - निर्यातोन्मुख इकाइयों के लिए निम्नलिखित योजनाएं आरम्भ की जाएगी
(i) एक नई योजना स्टार निर्यात घराने का दर्जा देने की योजना का आरंभ किया गया है।
इसमें चालू वर्ष और पिछले वर्षों के कुल निर्यातों के आधार पर वन स्टार से फाइव स्टार तक का दर्जा दिया जाएगा। अब निर्यात की शर्त स्टार दर्जे के लिए निर्धारित की गई है। यह शर्त 3 वर्षों में 15 करोड़ रु की है।
(ii) निर्यातोन्मुख इकाइयों को सेवा कर से मुक्त कर दिया जाएगा। नियत लागत को कम किया जाएगा।
(iii) पूजीगत वस्तुओं के आयात के लिए ई.पी.सी. जी. योजना का उदारीकरण किया जाएगा। इसके अंतर्गत आयात किए जाने वाली पूजीगत वस्तुओं को ड्यूटी की किया जाएगा।
(iv) आयातित आगतो पर शुल्क को न्यूट्रलाइज किया गया है। इसके लिए ड्यूटी एटाइटिलमेंट पासबुक योजना जारी रहेगी। बाद में इसे किसी दूसरी योजना द्वारा बदल दिया जाएगा इस नई योजना को निर्यातकों के साथ सलाह करके बदला जाएगा।
(v) पुरानी पूजीगत वस्तुओं के आयात पर से प्रतिबन्ध हटा दिया जाएगा। इन्हें बिना आयु सीमा के आयात की आशा दी जाएगी। भारत में दोबारा स्थापित करने के लिए मशीनरी की घिसावट मूल्य 50 करोड़ रु से कम करके 25 करोड़ रु कर दी गई है।
(vi) निम्नलिखित ऐसे सभी निर्यातकों को किसी भी स्कीम में बैंक गारन्टी देने की आवश्यकता नहीं होगी।
• जिनकी न्यूनतम आय 5 करोड़ रु. होगी।
• जिन निर्यातकों का अच्छा रिकार्ड होगा।
(ङ) लक्ष्य से अधिक निर्यात करने वालों का निःशुल्क आयात सुविधा एक नई टारगेट प्लस योजना आरम्भ की गई है। इसके अन्तर्गत जो निर्यातक लक्ष्य से अधिक निर्यात करते है उन्हें निःशुल्क निर्यात की सुविधा होगी वार्षिक लक्ष्य से 20 25 तथा 100 प्रतिशत अधिक निर्यात करने पर क्रमश: 5. 10 तथा (च) नए जोन्स की स्थापना भारत को विश्व व्यापार का केन्द्र बनाने का लक्ष्य है इसके लिए विशेष आर्थिक जोन्स की तरह की ट्रेड एण्ड वेयर हाउसिंग 15 प्रतिशत ड्यूटी की केडिट होगा।
जोन्स की स्थापना की जाएगी इन जोन्स में ट्रेडिंग कम्पनियों की स्थापना हो सकेगी। ऐसे जोन्स तथा उनकी अधिकारिक / आधारभूत संरचना के विकास के लिए 100 प्रतिशत तक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति दी जाएगी।
(छ) हथकरघा क्षेत्र को प्रोत्साहन हथकरघा क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए नए हथकरघा विशेष जोन की स्थापना की जाएगी। आयात करने के लिए निःशुल्क आयात की कुछ छूट भी निर्यातकर्ताओं को दी जाएगी।
(ज) जैव प्रौद्योगिकी पार्कों की स्थापना जैव प्रौद्योगिकी को बहुत बडा वृद्धि का तत्व माना गया है।
इसलिए जैव प्रौद्योगिकी पार्कों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए सभी प्रकार की सुविधाएं दी जाएगी।
(झ) बोर्ड ऑफ ट्रेड का पुनर्गठन:- सरकार और बोर्ड ऑफ ट्रेड में तालमेल की आवश्यकता है। इसके लिए बोर्ड ऑफ ट्रेड का पुनर्गठन किया जाएगा। इस
बोर्ड ऑफ ट्रेड के अध्यक्ष पद के लिए किसी विशेषश का नियुक्त किया जाएगा।
(ञ) प्रक्रिया का सरलीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने तथा व्यापार लागत को कम करने के लिए भी कई उपायों की घोषणा की गई है।
इसके अंतर्गत सरकार द्वारा रिटर्न तथा दाखिल किए जाने वाले फार्मों की संख्या को कम कर दिया गया है विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत विपरीत सभी लाइसेंसों की वैधता अवधि को 2 वर्ष तक के लिए बढ़ा दिया है।
(ट) आयात उदारीकरण- कुछ क्षेत्रों में आयातो को भी उदार किया गया है। ये क्षेत्र निम्नलिखित है
(i) कृषि क्षेत्र में 31 प्रकार के बीजों का आयात,
(ii) उद्योगों के लिए पुरानी मशीनरी का आयात,
(iii) पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी मशीनरी का आयात
इसके अतिरिक्त घरेलू उद्योगों के संरक्षण की ओर भी ध्यान दिया गया है। इसके लिए कुछ उत्पादों के आयातों पर प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। उपरोक्त वर्णन से प्रतीत होता है कि नई विदेश व्यापार नीति में नियात वृद्धि पर अधिक ध्यान दिया गया है। आयातों का भी उदारीकरण किया गया है इस प्रकार यह नीति काफी अच्छी प्रतीत होती है परन्तु इस नीति की सफलता के लिए इसे प्रभावपूर्ण ढंग से लागू करने की आवश्यकता है तभी 2020 तक इस नीति के विभिन्न लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकेगा। विशेषकर विश्व व्यापार में भारत का दो गुना हिस्सा करने का लक्ष्य प्राप्त हो सकेगा।
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