वितरण माध्यम के चयन को प्रभावित करने वाले घटक - Factors affecting the choice of distribution medium

वितरण माध्यम के चयन को प्रभावित करने वाले घटक - Factors affecting the choice of distribution medium


वित्तरण माध्यम का चयन बहुत से तत्वों पर निर्भर करता है। इसकी चर्चा निम्नलिखत है


• विदेशी बाजार संबंधी घटक


(1) बाजार का भौगोलिक केंद्रीयकरण यदि वैश्विक उत्पादन के उत्पाद का बाजार भौगोलिक रूप से कंद्रित है, तो प्रत्यक्ष वितरण माध्यम उपयुक्त होगा। दूसरी तरफ यदि बाजार अधिक बिखरा हुआ है, तो विपणन मध्यस्थों द्वारा वितरण अर्थात् वितरण अधिक उपयुक्त होगा। 


(ii) संभावित केताओं की संख्या, यदि विदेशी बाजार में संभावित केताओं की संख्या कम होने का अनुमान है, तो प्रत्यक्ष वितरण उपयुक्त होगा। परंतु यदि समावित केताओं की संख्या अधिक होने का अनुमान है तो अप्रत्यक्ष वित्तरण मध्यम उपयुक्त होगा। 


(iii) आदेशों का आकार यदि विदेशी बाजार के कय-आदेशों की संख्या तो कम है, परंतु कय का आकार बहुत बड़ा है, तो प्रत्यक्ष विकय अधिक उपयुक्त होगा परंतु यदि बाज़ार में आदेश की संख्या तो अधिक है परंतु आदेश की मात्रा कम है तो विदेशी बाजार में विपणन मध्यस्थों द्वारा उत्पाद बेचा जाना अधिक उचित होगा।


• उत्पाद संबंधी घटक


(i) उत्पाद की प्रकृति यदि उत्पाद उद्योगों में प्रयोग होने वाला है व उसका वजन भारी है तो प्रत्यक्ष वितरण माध्यम उपयुक्त होगा। सुविधाजनक उपभोक्ता उत्पादों की दशा में विपणन मध्यस्थों द्वारा वितरण अर्थात् अप्रत्यक्ष वितरण माध्यम का चयन अधिक उपयुक्त होगा। 


(ii) उत्पाद की नाशवानता यदि विदेशी बाजार में बेचा जाने वाला उत्पाद अधिक नाशवान है तो वितरण माध्यम अधिक लंबा नहीं होना चाहिए। ऐसे उत्पादों को प्रत्यक्ष वितरण द्वारा बेचना उचित होगा।


(iii) तकनीकी उत्पाद यदि विदेशी बाजार में बेचा जाने वाला उत्पाद उच्च टेक्नोलॉजी से संबंधित है तो प्रत्यक्ष वितरण द्वारा विकय उचित होगा, क्योंकि इसमें विकय से पूर्व व विकस के बाद तकनीकी जानकारी व विकय उपरांत सेवाएँ देनी होती है।


(iv) प्रति इकाई लागत महगे उत्पादों की दशा में वितरण माध्यम की लंबाई कम होती है सस्ते उत्पादों में यह लंबाई अधिक होती है। महगे उत्पादों की दशा में प्रत्यक्ष वितरण माध्यम तथा सस्ते उत्पादों की दशा में अप्रत्यक्ष वितरण माध्यम अधिक उपयुक्त होगा।


(v) उत्पादों की संख्या यदि वैश्विक कंपनी द्वारा बहुत से उत्पाद विदेशी बाजार में बेचे जाने हैं, अर्थात कई तरह के उत्पाद है तो मध्यस्थों की संख्या अधिक होगी। इसके विपरीत यदि एक या दो ही तरह के उत्पादों को विदेशी बाजार में बेचा जाना है तो प्रत्यक्ष वितरण उचित होगा या कम मध्यस्थों द्वारा भी उत्पाद को विदेशी बाजार में बेचा जा सकता है।


(vi) विकय उपरांत सेवाएं यदि बाजार में बेचे जाने वाले उत्पादों पर विक्रय उपरांत सेवाओं की आवश्यकता अत्यधिक है तो प्रत्यक्ष वितरण व कम मध्यस्थो द्वारा वितरण उचित होगा।


• निर्माता कंपनी संबंधी घटक


(i) वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता यदि वैश्विक कंपनी के पास वित्तीय संसाधन पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है

तो यह विदेशी बाजारों में स्वयं की बाजार अधोसंरचना स्थापित करके प्रत्यक्ष वितरण कर सकती है परंतु यदि इसके पास पर्याप्त मात्रा में वित्तीय संसाधन नहीं है तो इसे मध्यस्थों की सहायता से अर्थात अप्रत्यक्ष वितरण से ही उत्पाद बेचने होंगे।


(i) विपणन अनुभव व प्रबंधकीय कौशल: यदि उत्पादनकर्ता को विपणन अनुभव कम है या इसके प्रबंधकीय कौशल का अभाव है, तो इसे विदेशी बाजारों में उत्पाद बेचने के लिए मध्यस्थों की आवश्यकता होगी अर्थात् अप्रत्यक्ष वितरण उपयुक्त होगा। परंतु यदि इसके पास अंतरराष्ट्रीय विपणन का अच्छा अनुभव है तथा इसके पास उच्चस्तरीय प्रबंधकीय कौशल है तो वह प्रत्यक्ष विपणन द्वारा विदेशी बाजारों में उत्पाद बेच सकता है।


• मध्यस्थों से संबंधित घटक


(1) मध्यस्थों की उपलब्धता कई बार विदेशी बाजार में अच्छी सेवाएं प्रदान करने वाले मध्यस्थ उपलब्ध ही नहीं होते। ऐसे वैश्विक कंपनी को प्रत्यक्ष वितरण व्यवस्था को अपनाना पड़ता है। दूसरी ओर, यदि विदेशी बाजारों में अच्छी सेवाएं प्रदान करने वाले मध्यस्थ उपलब्ध है तो अप्रत्यक्ष वितरण अर्थात मध्यस्थों की सहायता से उत्पाद बेचना उचित होगा।


(ii) लागत तत्व यदि मध्यस्थों की कमीशन की दर अत्यधिक है तो प्रत्यक्ष वितरण अधिक उचित होगा। दूसरी ओर, यदि प्रत्यक्ष वितरण में विदेशी बाजार में अधोसरचना स्थापित करने में अत्यधिक खर्चा आता है, तो मध्यस्थों द्वारा उत्पाद बेचना अर्थात अप्रत्यक्ष वितरण अधिक उपयुक्त होगा।


(iii) उत्पादकों की विपणन नीतियों के प्रति मध्यस्थों का दृष्टिकोण कई बार उत्पादकों की विपणन संबंधी नीतियाँ बहुत सख्त होती है, जो मध्यस्थों को पसंद नहीं आती, जैसे-उत्पादक मध्यस्थों पर अत्यधिक शर्तें लगा देते है ऐसे में मध्यस्थ उत्पादक का सामान बेचना पसंद नहीं करते। विवश होकर उत्पादक को प्रत्यक्ष वितरण ही करना पडता है।


• सरकार द्वारा बनाए गए प्रावधान


कुछ देशों में सरकार कुछ विशेष उत्पादों के लिए केवल सरकार द्वारा नियंत्रित व्यापारिक कंपनियों को ही उत्पाद आयात करने की अनुमति देती है। इसी तरह कई बार कुछ विदेशी उत्पादों के प्रत्यक्ष वितरण पर सरकार प्रतिबंध लगा देती है। इसी तरह कुछ देशों में सरकार एकाधिकारी विकय एजेंट नियुक्त करने पर भी प्रतिबंध लगाती है ये प्रावधान भी वितरण माध्यम को प्रभावित करते हैं। उपरोक्त घटक वितरण माध्यम के चयन में केवल मार्गदर्शन का कार्य करते हैं। ये घटक प्रत्येक उत्पाद संस्था, समय, स्थान, परिस्थितियों के अनुसार बदलते हैं। इसके अलावा यह भी कोई आवश्यक नहीं कि वितरण माध्यम की केवल एक ही विधि अपनायी जाए। आवश्यकता अनुसार वितरण के माध्यमों में परिवर्तन भी करना पड़ता है।