मानव संसाधन नियोजन को प्रभावित करने वाले कारक - Factors Affecting Human Resource Planning

मानव संसाधन नियोजन को प्रभावित करने वाले कारक - Factors Affecting Human Resource Planning


1) संगठन का प्रकार और रणनीति


संगठन का प्रकार एक महत्वपूर्ण कारक है क्योंकि यह निर्धारित करता है कि उत्पादन प्रक्रियाएं कैसी हैं, किस संख्या और प्रकार के कर्मचारियों की आवश्यकता है तथा कितने पर्यवेक्षी और प्रबंधकीय कर्मियों की आवश्यकता है। इस संबंध में, सेवाएँ प्रदान करने वाले संगठनों की तुलना में विनिर्माण संगठन अधिक जटिल होते हैं।


संगठन की रणनीतिक योजना संगठन की मानव संसाधन आवश्यकताओं को परिभाषित करती है। उदाहरण के लिए, आंतरिक विकास की रणनीति का अर्थ है कि अतिरिक्त कर्मचारियों को काम पर रखने की आवश्यकता है। दूसरी ओर, अधिग्रहण या विलय जैसी परिस्थितियों में संगठनों को छंटनी के लिए योजना बनाने की आवश्यकता होगी, क्योंकि विलय, में सामान एवं अतिव्यापी स्थिति वाले पदों की उत्पत्ति होती है जिसे कम कर्मचारियों के साथ अधिक कुशलतापूर्वक संभाला जा सकता है।


मुख्य रूप से, संगठन या तो मानव संसाधन नियोजन में सक्रिय या प्रतिक्रियाशील होने का निर्णय लेता है। वह या तो भविष्य की मानव संसाधन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर उन्हें व्यवस्थित रूप से भरने के लिए पहले से तैयार रहने का निर्णयले सकता है अथवा वह सिर्फ इन आवश्यकताओं के उत्पन्न होने पर प्रतिक्रिया कर सकता है। निस्संदेह मानव संसाधन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मानव संसाधन नियोजन सावधानीपूर्वक एवं बेहतर ढंग से सहायता करता है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आवश्यकता पड़ने पर संगठन मानव संसाधनों को सही संख्या और उचित कौशल तथा दक्षताओं के साथ प्राप्त कर लेगा।


इसी तरह, संगठन को नियोजन की व्यापकता का निर्धारण करना चाहिए। अनिवार्य रूप से, संगठन केवल एक या दो मानव संसाधन क्षेत्रों, जैसे कि भर्ती या चयन में नियोजन के द्वारा एक संकीर्ण दृष्टिकोण अपना सकता है, या यह प्रशिक्षण, पारिश्रमिक आदि सहित सभी क्षेत्रों में योजना बनाकर और व्यापक दृष्टिकोण अपना सकता है।


संगठन को योजना की औपचारिकता पर भी निर्णय करना चाहिए। यह एक अनौपचारिक योजना का निर्णय ले सकता है जो कि अधिकतर प्रबंधकों और कर्मचारियों के दिमाग में होती है। वैकल्पिक रूप से, संगठन एक औपचारिक योजना बना सकता है जो स्पष्ट एवं लिखित रूप में, प्रलेखन, दस्तावेजों और आंकड़ों द्वारा समर्थित हो।


अंततः संगठन को योजना के लचीलेपन पर निर्णय लेना चाहिए- अनिश्चितताओं तथा आकस्मिकताओं का अनुमान करने, समझने और उनसे निपटने के लिए मानव संसाधन नियोजन को समर्थ एवं क्षमतावान होना चाहिए। किसी भी संगठन को उच्च स्तर की अनिश्चितता पसंद नहीं है। संगठन नियोजन के माध्यम से इन अनिश्चितताओं को कम करना चाहते हैं, जिसमें संभावित भविष्य की स्थितियों और घटनाओं की भविष्यवाणी और पूर्वानुमान सम्मिलित है।

मानव संसाधन नियोजन में कई आकस्मिकताओं को सम्मिलित कर अलग-अलग परिदृश्यों को दर्शाया जा सकता है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि योजना लचीली और अनुकूलनीय है।


(2) संगठनात्मक विकास चक्र और योजना


किसी संगठन के विकास के चरणों का मानव संसाधन नियोजन पर काफी प्रभाव पड़ सकता है। भ्रूणावस्था के चरण में छोटे संगठनों में कार्मिक नियोजन नहीं हो सकता है। नियोजन की आवश्यकता महसूस होती है जब संगठन विकास के चरण में प्रवेश करता है। मानव संसाधनों का पूर्वानुमान आवश्यक हो जाता है। विकास के साथ- साथ स्वयं को समायोजित करने तथा उन्नत करने में कर्मचारियों का आंतरिक विकास भी ध्यान आकृष्ट करता है।


एक परिपक्व संगठन कम लचीलेपन और परिवर्तनशीलता का अनुभव करता है। विकास की गति धीमी हो जाती है। कार्यबल वृद्ध हो जाता है तथा बहुत कम युवा कर्मचारियों को काम पर रखने की आवश्यकता होती है। योजना अधिक औपचारिक, ध्यानपूर्वक तथा कम लचीली एवं नवाचारी हो जाती है। सेवानिवृत्ति और संभावित छंटनी जैसे मुद्दों नियोजन पर अधिक हावी हो जाते हैं।


अंत में, वृद्धावस्था या हास की अवस्था में, मानव संसाधन नियोजन एक अलग दृष्टिकोण अपनाता है। नियोजन कार्य, छंटनी, और सेवानिवृत्ति के लिए किए जाते हैं। चूंकि संगठन द्वारा निर्णय प्रायः, गंभीर बिक्री एवं वित्तीय घाटों के बाद लिए जाते हैं, इसलिए नियोजन की प्रकृति वस्तुतः प्रतिक्रियाशील होती है।


3) पर्यावरण अनिश्चितता


मानव संसाधन प्रबंधकों को शायद ही कभी एक स्थिर और पूर्वानुमानित वातावरण में संचालन का विशेषाधिकार प्राप्त होता है। राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन सभी संगठनों को प्रभावित करते हैं। कार्मिक नियोजन, सावधानीपूर्वक भर्ती, चयन, तथा प्रशिक्षण और विकास नीतियों और कार्यक्रमों को तैयार करके पर्यावरणीय अनिश्चितताओं से निपटता है। उत्तराधिकार नियोजन, पदोन्नति माध्यम, छंटनी, समय लोचशीलता, नौकरी साझाकरण, सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति एवं कर्मियों से संबंधित अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से मानव संसाधन प्रबंधन कार्यक्रम में संतुलन तंत्र को सन्निहित गया है।


4) समय सीमा


एक अन्य प्रमुख कारक जो कार्मिक नियोजन को प्रभावित करता है,

वह समय सीमा है। एक योजना किसी समय सीमा पर बहुत लंबे समय तक प्रभावशाली नहीं हो सकती क्योंकि संचालनात्मक वातावरण स्वयं परिवर्तनों तथा विसंगतियों से गुजर सकता है। एक तरफ छह महीने से एक साल तक की अल्पकालिक योजनाएं हैं तो दूसरी ओर, दीर्घकालिक योजनाएं- जो तीन से बीस वर्षों तक चलती हैं। हालांकि, सटीक समय अवधि, संगठन के वातावरण में प्रचलित अनिश्चितता की मात्र पर निर्भर करता है।


अस्थिर वातावरण में काम कर रहे संगठनों के लिए लघुकालीन या अल्पकालीन होनी चाहिए, उदाहरण के लिए कंप्यूटर अन्य संगठन जिनके लिए पर्यावरण अपेक्षाकृत स्थिर है, उनके लिए योजनाएं दीर्घकालिक हो सकती हैं, उदाहरण के लिए किसी विश्वविद्यालय की योजना सामान्य तौर पर, अधिक अनिश्चित वातावरण में योजना की समय सीमा लघुकालीन तथा अपेक्षाकृत स्थिर वातावरण में दीर्घकालीन होनी चाहिए।


5) सूचना की गुणवत्ता एवं प्रकार


कर्मचारीयों की आवश्यकताओं का पूर्वानुमान करने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली सूचनाएं विभिन्न प्रकार के स्रोतों से उत्पन्न होती है। कार्मिक नियोजन में एक प्रमुख मुद्दा सूचना का वह प्रकार है जिसे पूर्वानुमान करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।


सूचना के प्रकार से ही निकट संबंधित, उपयोग में लाई गयी डेटा की गुणवत्ता है। सूचना की गुणवत्ता और सटीकता, स्पष्टता पर निर्भर करती है, जिसके आधार पर संगठनात्मक निर्णयकर्ता अपनी रणनीति, संगठनात्मक संरचना, बजट, उत्पादन कार्यक्रम आदि को परिभाषित करते हैं। इसके अतिरिक्त, मानव संसाधन विभाग को सावधानीपूर्वक विकसित कार्य-विश्लेषण सूचनाएं और मानव संसाधन सूचना प्रणाली (एचआरआईएस) को बनाए रखना चाहिए जो समय पर और सटीक डेटा प्रदान करती हैं।

सामान्यतया, स्थिर वातावरण में सक्रिय संगठन, दीर्घकालीन योजना अवधि, स्पष्ट रूप से परिभाषित रणनीति एवं उद्देश्यों तथा कम अवरोधों के कारण, व्यापक, सयिक एवं सटीक सूचनाएं प्राप्त करने की अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में होते हैं।


6) श्रम बाजार


श्रम बाजार में ऐसे कौशलों एवं क्षमताओं वाले लोग होते हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर प्राप्त किया जा सकता है। शैक्षिक, पेशेवर और तकनीकी संस्थानों के प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन सदीव बाजार में उपलब्ध हैं। तथापि, मानव संसाधनों की कमी होती है। उदाहरण के लिए,

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) का अनुमान था कि 2015 तक भारत को स्वास्थ्य देखभाल, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं, खुदरा, ऑटो और निर्माण जैसे क्षेत्रों में 30 लाख अतिरिक्त कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होगी।


यह संदेहास्पद ही है कि देश में कुशल श्रमिक इतनी संख्या में उपलब्ध होंगे या नहीं।


श्रम आपूर्ति के सन्दर्भ में, निम्नलिखित तथ्य विचारणीय हैं:


क) आबादी का आकार, आयु, लिंग और शैक्षिक संरचना


ख) देश में उत्पाद और सेवाओं की मांग


ग) उत्पादन तकनीक की प्रकृति


घ) लोगों की रोजगारपरकता।