कीन्स के रोजगार सिद्धांत की विशेषताएँ - Features of Keynes's Employment Theory

कीन्स के रोजगार सिद्धांत की विशेषताएँ -  Features of Keynes's Employment Theory


1. यह सिद्धांत सार्वभौम हैजो रोजगार की सभी परिस्थितियों तथा न्यूनरोजगारपूर्णरोजगार एवं पूर्ण से अधिक रोजगार जैसी परिस्थितियों में लागु होता है। इससे पूर्व वाला सिद्धांत केवल पूर्ण रोजगार की स्थिति में ही लागु हो सकता था


2. कीन्स के मतानुसार विनियोग ही केवल मात्र एक ऐसा तत्व है जो रोजगार की मात्र निश्चित करता है । कीन्स ने अपनी व्याख्या में रोजगार में वृद्धि अथवा कमी के लिए उपभोग तथा विनियोग को ही उत्तरदायी माना है। अल्पकाल में उपभोग तो स्थिर होता है क्योंकि उपभोग में आसानी से परिवर्तन संभव नहीं है। अतः विनियोग ही एक ऐसा तत्व है जिसमें परिवर्तन करके रोजगार की मात्र बढाया घटाया जा सकता है।


3. यह सिद्धांत समष्टि दृष्टिकोण पर आधारित है धान थाजबकि प्रतिष्ठित सिद्धांत व्यष्टि प्र 


4. सरकार का नियंत्रण एवं हस्तक्षेप रोजगार में वृद्धि करता है। इससे पूर्व प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री आर्थिक क्रियाओं में सरकार के हस्तक्षेप को बुरा मानते थे। कीन्स के मतानुसार सरकार का आर्थिक क्रियाओं में हस्तक्षेप अर्थव्यवस्था के हित में होता है। रोजगार की मात्र वृद्धि के लिए परिस्थितियां स्वतः उत्पन्न नहीं होती हैबल्कि सरकार अपनी नीतियों तथा नियंत्रणों से रोजगार की मात्र में वृद्धि अथवा कमी करती है ।


5. संतुलित बजट के स्थान पर घाटे का बजट श्रेष्ठ हैउत्पादन तथा रोजगार क्योंकि इससे आय है की मात्र बढती


6. मंदी एवं बेरोजगारी डर कम करने के लिए सार्वजानिक निर्माण कार्य एक श्रेष्ठ उपाय है। 


7. अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी एक सामान्य बात है।