अनुसंधान डिजाइन की विशेषताएं - Features of Research Design
अनुसंधान डिजाइन की विशेषताएं - Features of Research Design
लक, वाल्स टेलर तथा रुबिन ने विपणन प्ररचना की विशेषताओं को साररूप में दो शब्दों में व्यक्त किया है
(1) पूर्वानुमान तथा
(ii) निर्दिष्टीकरण।
अनुसंधानकर्ता प्रस्तावित अध्ययन की आवश्यकताओं तथा परिस्थितियों का पूर्वानुमान करता है तथा पहले ही व्यापक में यह निर्दिष्ट करता है कि क्या प्राप्त करना है तथा कैसे प्राप्त करना है।
अनुसंधान प्ररचना की प्रकृति एवं अन्य विशेषताएं निम्नलिखित है-
(iii) यह सामान्य के समाधान की आवश्यकताओं के प्रमाण का विवरण है।
(iv) यह समस्या के उत्तरों को उत्पन्न करने हेतु समको का क्या किया जायेगा का पूर्वानुमान है।
(v) यह आधारभूत योजना का विवरण है जिसके द्वारा उत्तरों को प्रकट किया जायेगा या वैधता को ज्ञात किया जायेगा।
(vi) यह निर्दिष्टीकरण का प्रमाण है कि कहां और कैसे प्राप्त किया जायेगा।
(vii) यह परियोजना की लागत और सम्भावना की गणना और अनुमति के लिए मार्गदर्शक है।
(viii) यह प्रस्तावित कार्य के मार्गदर्शन हेतु रूपरेखा का प्रावधान है।
(ix) अनुसंधान प्ररचना अनुसंधानकर्ता की एक निश्चित दिशा का बोध कराती है। इस अर्थ में अनुसंधान प्ररचना एक प्रकार की दिग्दर्शक है।
(x) अनुसंधान प्ररचना की मुख्य विशेषता विपणन समस्या की जटिल प्रकृति को सरल रूप में प्रस्तुत करना है।
(xi) यह अनुसंधान प्रक्रिया के दौरान आगे आने वाली परिस्थितियों को नियंत्रण करने एवं अनुसंधान कार्य को सरल बनाने का कार्य करती है।
(xii) यह विपणन अनुसंधान के अधिकतम उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायता करती है।
(xiii) अनुसंधान प्ररचना का चयन विपणन अनुसंधान की समस्या एवं परिकल्पना की प्रकृति के आधार पर किया जाता है।
(xiv) अनुसंधान प्ररचना समस्या की प्रतिस्थापना से लेकर अनुसंधान प्रतिवेदन के अंतिम चरण के विषय में उपलब्ध विकल्पों के बारे में व्यवस्थित रूप में श्रेष्ठ निर्णय लेने में सहायता करती है।
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