सुदृढ़ माप की विशेषताएं - Features of robust measurement

सुदृढ़ माप की विशेषताएं - Features of robust measurement


उपरोक्त विवचन से यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि एक सुदृढ माप उपकरण की क्या विशेषताएं है? सामान्य अनुभव के आधार पर यह कहा जा सकता है कि उपकरण सही गणना योग्य होना चाहिए या यह संकेतों को बताने वाला होना चाहिए जिनको मापने में अनुसंधानकर्ता की रुचि है। साथ ही यह प्रयोग में सरल और कुशल होना चाहिए।


इनका संक्षिप्त विवेचन निम्नलिखित है:


(क) वैधता - बघता भूल से सम्बन्धित है। अनुसंधान साहित्य में दो प्रकार की वैधता या प्रमाणिकता का उल्लेख मिलता है। प्रथम- अनुसंधान निष्कर्ष की बाहा प्रमाणिकता जो कि जनसंख्या चल तथा माप चलों के सामन्याकरण पर बल देती है। द्वितीय, अनुसंधान प्ररचना की आंतरिक अनुसंधान प्रमाणिकता यह मापने की योग्यता अथवा मापने का लक्ष्य है।


विपणन अनुसंधान में माप यंत्रों की प्रमाणिकता या वैधता निम्न तीन रूपों में व्यापक रूप से स्वीकृत की गयी हैं-


(i) विषय वस्तु सम्बन्धी वैधता मापन उपकरण की विषय वस्तु सम्बन्धी वैधता वह सीमा है जोकि विचारणीय अध्ययन के विषय का पर्याप्त आवरण उपलब्ध करती है। अगर उपकरण में अध्ययन या विषय के सम्बन्ध में समग्र में से प्रतिनिधित्व निदर्श सम्मिलित होता है तो विषय वस्तु को अच्छा कहा जा सकता है। अन्य शब्दों में, माप उपकरण की विषय वस्तु सम्बन्धी वैधता मापन की जाने वाली विषय की वस्तुनुसार सामग्री, निदर्शनात्मक पर्याप्तता के रूप में स्वीकार की जाती है। इसका निश्चय इस आधार पर किया जाता है कि वह मापन विषय वस्तु के समय का पर्याप्त मात्रा में प्रतिनिधित्व करता है या नहीं। विशेष रूप से जब अध्ययन का विषय मनोवैज्ञानिक होता है तब मापन यंत्र वैधता लाने हेतु इस आधार पर बल दिया जाता है

कि क्या उस मापक से उस अध्ययन विषय की सभी विशेषताओं का मापन किया जा रहा है या नहीं। एमौर्य के अनुसार एक माप की विषयवस्तु सम्बन्धी वैधता के मूल्यांकन के लिए:


• क्या तत्व समस्या के पर्याप्त आवरण को सम्मिलित करते हैं


• इन अभिमतो का कौनसा स्वरूप इस विषय की संगत स्थितियों को सम्मिलित करता है।


• यदि प्रश्नावली विषय को पर्याप्त रूप से कवर करती है, जोकि संगत आयाम के रूप में परिभाषित किया जाता है, तो यह कहा जा सकता है कि उपकरण में अच्छी विषय वस्तु वैधता है।


(iii) कसौटी सम्बन्धी वैधता


वैधता का यह स्वरूप कुछ अनुभारित अनुभावों के लक्षणों में प्रयोग की जाने वाली मापन की सफलता को परिवर्तित करता है। मूलत इसमें समवर्ती एवं भविष्यात्मक वैधता को सम्मिलित किया जाता है।


→ समवर्ती वैधता इसमें एक विशेष प्रक्रिया का अनुसरण करना होता है सर्वप्रथम किसी बाहा कसौटी के आधार पर उत्तरदाताओं से प्राप्त उत्तरा के आधार पर अंक निर्धारित किये जाते है। द्वितीय, माप द्वारा प्राप्त अंकों के बीच सह-सम्बन्ध निर्धारित किया जाता है। तृतीय गणना से प्राप्त परिणामों के आधार पर वैधता को देखा जाता है एवं अवलोकनात्मक पद्धति जो कि वर्तमान आय वर्ग के आधार पर परिवारों को श्रेणीकरण करती है, समवर्ती वैधता है।


→भविष्यात्मक वैधता - यह भी उपरोक्त वर्णित वैधता के समान ही है। केवल समय आयाम का अन्तर है इस वैधता का आशय यह है कि इकाइयों का वैध मापन इस प्रकार किया जाय कि उसकी पुष्टि भविष्य में भी की जा सके।

वास्तव में, विपणन अनुसंधान में यह बात पूर्णतय समय नहीं है, क्योंकि भविष्य के बारे में उचित पूर्वानुमान ही किया जा सकता है। पूर्ण वैधता के साथ उसकी पुनः पुष्टि नहीं की जा सकती है। एक अभिमत प्रश्नावती जो कि एक संघ के चुनावों का शुद्ध पूर्वानुमान करती है, भविष्यात्मक वैधता होती है।


भविष्यात्मक वैधता या प्रमाणिकता मूलत व्यावहारिक विपणन अनुसंधान से सम्बन्धित है। कुछ भविष्यात्मक वैधता प्रश्न निम्नलिखित है-


• क्या प्रवृत्तियों का नाप भावी क्रय का अनुमान करेगा?


• क्या एक नियंत्रित स्टोर के विक्रय माप का परीक्षण भावी बाजार भाग का अनुमान करेगा?


• क्या प्रारम्भिक विक्रय का माप भावी विक्रय का अनुमान करेगा ?


(iii) शब्द विन्यास सम्बन्धी वैधता शब्द विन्यास सम्बन्धी वैधता से तात्पर्य कारकों की समझ से है जोकि प्राप्त किये गये मापों के नीचे रहते है। यह वैधता का सबसे जटिलतम रूप है जो यह बताता है कि वर्तमान मापक यंत्र की सहायता से प्राप्त माप किस सीमा तक समस्या के अध्ययन के लिए प्रयोग में लाये गये शब्द विन्यासों तथा अवधारणाओं का सैद्धान्तिक आधार पर समावेश करते हैं। अन्य शब्दों में शब्द विन्यास सम्बन्धी वैधता के निर्धारण के प्रयास में हम मापक यंत्रों के प्रयोग द्वारा प्राप्त परिणामों से एक अन्य विशेषताओं के समूह का समागम करते है यदि अनुसंधानकर्ता की खोज के नाप पैमाने, अन्य विशेषताओं के साथ भावी या अनुमानित तरीके से सह सम्बन्धित है, तो यहां यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यहां कुछ शब्द विन्यास सम्बन्धी वैधता है।


उदाहरण के लिए उपभोक्ताओं की दृष्टिकोण को ज्ञात करना है, तो नापक यंत्र में यह देखना होगा कि दृष्टिकोण सम्बन्धी सभी आधार उसमे सम्मिलित कर लिये गये है या नहीं इस प्रकार अध्ययनकर्ता या शोधकर्ता यहां मापन का अर्थ जानना या समझना चाहता है। टल एवं हॉकिन्स का मत है कि इसमें केवल इतना ही जानना सम्मिलित नहीं है कि एक दिया हुआ माप कैसे कार्य करता है, अपितु इसमें यह जानना भी सम्मिलित है कि यह क्यों करता है।


कोनबेच ने शब्द विन्यास सम्बन्धी वैधता के लिए निम्न तीन चरणों की एक सूची प्रस्तुत की है।


(i) शब्द विन्यास प्राप्त करना, जोकि जांच निष्पादन के लिए कारक होंगे


(ii) शब्द रचना में सम्मिलित विचारधाराओं से परिकल्पनाओं का अनुमान करना।


(iii) परिकल्पनाओं का अनुभावाश्रित रूप से परीक्षण करना।


इस प्रकार शब्द विन्यास सम्बन्धी वैधता में नाप और विचारधारा दोनों से सम्बन्धित शब्द विन्यासों का अन्य शब्द विन्यासों के साथ मूल्यांकन किया जाता है।


(ख) विश्वसनीयता - विश्वसनीयता शब्द का प्रयोग एक माप में चल त्रुटि की मात्रा के संदर्भ में किया जाता है अन्य शब्दों में विश्वसनीयता वह सीमा है जिनमें एक माप चल त्रुटियों से स्वतन्त्र होता है। यह प्रमाणिकता या वैधता का ही एक योगदानकर्ता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि एक वैध उपकरण विश्वसनीय होता है।


विश्वसनीयता उतनी महत्वपूर्ण नहीं है,

जितनी कि प्रमाणिकता या वैचता फिर भी यहां तक पहुंच अपेक्षाकृत सरल होती है। टल एवं डॉकिन्स के अनुसार विश्वसनीयता समय के साथ दृढ़ता और स्थिरता से सम्बन्धित होती है। अधिकाश व्यावहारिक अनुसंधान अध्ययन एक समय के लिए होते हैं, अत हमे विश्वसनीयता के बारे में सम्बन्धित होने की आवश्यकता नहीं है।


विपणन अनुसंधान में विश्वसनीयता की आवश्यकता सदैव बनी रहती है। इसके लिए माप में निम्न विशेषताओं का होना आवश्यक है।


स्थिरता से आशय यह है कि मापन के द्वारा मात्रा माप की प्रक्रिया स्थिर होनी चाहिए। अनुसंधान सम्बन्धी तथ्य मापने के लिए यह अति महत्त्वपूर्ण है।

विश्वसनीयता का दूसरा पहलू समता है, जो यह विचार करने से सम्बन्धित है कि अध्ययन किये जाने वाले नदों की विभिन्न निर्देशों या अनुसंधानकर्ताओ द्वारा कितनी त्रुटिया प्रवेश कर सकती है संगतता से आशय है कि इकाइयों का विभाजन इस प्रकार होना चाहिए कि पहले व दूसरे भाग का अंतर वही हो, जो दूसरे और तीसरे भाग का प्रकट किया है।


सार रूप में विश्वसनीयता के दो पहलूओं (स्थिरता और समता) समय और दिशाओं का अंतर ही परिचय के लिए निम्न विधिया बतायी है-


टल एवं हॉकिन्स ने मापक उपकरणों में विश्वसनीयता का अनुमान करने के लिए निम्न विधिया बतायी है- 


(i) परीक्षण पुनः परीक्षण विश्वसनीयता जिसमे समान मापों को समान उद्देश्यों के लिए पुन प्रयोग किया जाता है। तत्पश्चात दोनों बार के मापों की - तुलना की जाती है तथा परिणाम एक से होने पर मापक उपकरण को विश्वसनीय माना जाता है, अन्यथा नहीं अन्य शब्दों में अन्तर अधिक होने पर विश्वसनीयता कम मानी जाती है।


(ii) विभाजित निदर्श विश्वसनीयता विभाजित निदर्श सम्बन्धी विश्वसनीयता माप निदर्श को प्रायिकता चयन पर आधारित दो या अधिक उप-निदर्श में विभक्त करके किया जाता है, और प्रत्येक उप-निदर्श के लिए रुचि के प्रत्येक मद के लिए उप-निदर्श के साथ परिणामों की तुलना की जाती है। यदि दोनों उप-निदशों में सामान्य अन्तर से कम होता है तो उपकरण को विश्वसनीय माना जाता है।


(iii) वैकल्पिक रुप वैकल्पिक रुप विश्वसनीयता अनुमान उसी विषय पर नापक यंत्र को दो बराबर रूपों के प्रयोग द्वारा प्राप्त किये जाते हैं। 


अन्य शब्दों में इसमें केवल एक ही पैमाना नहीं बनाया जाता, अपितु उसके बहुत से विकल्प तैयार किये जाते है। तत्पश्चात पहले विकल्प द्वारा किसी प्रवृत्ति या प्राथमिकता का माप किया जाता है। बाद में दूसरे विकल्प द्वारा उसी प्रवृत्ति या प्राथमिकता का माप किया जाता है। दोनों में अन्तर न होने पर नाप उपकरण को विश्वसनीय माना जाता है।


(iv) आंतरिक तुलना विश्वसनीयता आंतरिक तुलना विश्वसनीयता अनुमान व बहुल मद सूचकांक पर मदों के स्कोर के मध्य अंतर सह-सम्बन्ध द्वारा किया जाता है।

अर्द्ध विभाजित विश्वसनीयता सम्भवत आतंरिक तुलना हेतु व्यापक रूप में प्रयोग किया जाने वाला प्रकार है यह बहु मद माप के आधार पर आधे मदों के परिणामों की शेप के परिणामो से तुलना द्वारा प्राप्त किया जाता है। 


(v) स्कोरर विश्वसनीयता विपणन अनुसंधानकर्ता जब प्रोजेक्टिव तकनीक, खुले-बंद प्रश्न या अवलोकन का प्रयोग करता है तो वह अपने निर्णय के अनुसार उपभोक्ता प्रतिक्रिया को वर्गीकृत कर सकता है। ऐसी दशा में उपकरण या उत्तररदाता की बजाय निर्णायक या स्कोरर अविश्वसनीय हो सकता है।


(ग) व्यवहारिकता - एक विपणन अनुसंधान परियोजना के लिए वैज्ञानिक आवश्यकता रूप में यह मांग होती है कि प्रक्रिया प्रमाणिकता तथा विश्वसनीय के साथ व्यवहारिक भी हो तथा उसका परिचालन सुविधापूर्वक किया जाना संभव हो एमोर्य के अनुसार इस संदर्भ में निम्न बाते महत्वपूर्ण है—


(i) बचत माप प्रक्रिया कम खर्चीली हो ।


(ii) सुविधा माप प्रक्रिया सुविधाजनक हो।


(iii) व्याख्यात्मक योग्य माप ऐसा हो, जिसकी सरलता से व्याख्या की जा सकती हो।


सार रूप में, सुदृढ माप में प्रमाणिकता, विश्वसनीय तथा व्यावहारिक होती है। अब प्रश्न यह है कि माप उपकरण की विकास प्रक्रिया क्या हो या एक नाप उपकरण का विकास कैसे किया जाये। एक विद्वान के अनुसार, इसके लिए सर्वप्रथम अवधारणाओं को परिचालानात्मक परिभाषाओं को स्पष्ट करना होता है और तब उन्हें प्रभावी माप प्रक्रिया में परिवर्तित किया जाता है। इनके अनुसार इस परिवर्तन प्रक्रिया में निम्न चार चरण सम्मिलित होते हैं-


(i) अवधारणा विकास


(ii) आयाम निर्दिष्टीकरण


(iii) अवलोकन योग्य सकेतों का का चयन तथा


(iv) इन संकेतकों का सूचकांक में संयोजन।