नई औद्योगिक नीति की विशेषताएं या व्यूह रचना - Features or Strategy of the New Industrial Poli

 नई औद्योगिक नीति की विशेषताएं या व्यूह रचना - Features or Strategy of the New Industrial Policy


(क) लाइसेंस की समाप्तिः नई नीति में 6 उद्योगों को छोड़कर अन्य सभी उद्योगों के लिए लाइसेंस समाप्ति की घोषणा की दी गई। जिन उद्योगों के लिए लाइसेंस जरूरी है वे हैं-कोयला, पैट्रोलियम, चीनी, सिगरेट, मोटरकार, बसें, अखबारी कागज, रक्षा उपकरण, औषधि एवं विलासिता की कुछ वस्तुए। लेकिन 1999 में अब केवल 4 उद्योगों के लिए ही लाइसेंस प्रणाली लागू की है। इन उद्योगों के अतिरिक्त शेष उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में प्रतियोगी और आधुनिक बनाने के अवसर दिए जाएंगे। 


(ख) पंजीकरण की समाप्ति इस नई औद्योगिक नीति के अनुसार सभी पंजीकरण योजनाओं को समाप्त कर दिया जाएगा। उद्यमियों को नई परियोजनाओं तथा पर्याप्त विस्तार के लिए केवल एक सूचना ही देनी होगी।


(ग) सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका- इस नीति में सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को संकुचित किया गया है। इसके लिए आरक्षित उद्योगों की संख्या 17 से घटाकर 4 कर दी गई। इस नीति के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र में सैनिकों के साजो-सामान, परमाणु ऊर्जा, खनन तथा रेल परिवहन ही रहेगा। अन्य सभी क्षेत्र निजी उद्योगों के लिए खुल जाएंगे। सरकारी उपक्रमों के लिए अब तक सुरक्षित क्षेत्र धीरे-धीरे निजी क्षेत्र के लिए खोल दिए जाएंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के शेयरों का कुछ भाग म्यूचुअल फंड वित्तीय संस्थाओं एवं कर्मचारियों और आम जनता को बेचने का प्रावधान किया गया है।


नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान बना रहेगा। परंतु सरकार इनका संचालन व्यावसायिक आधार पर करेगी। सार्वजनिक उद्यम उन क्षेत्रों में भी उद्योग स्थापित करेगें जो उसके लिए सुरक्षित नहीं है। 


(घ) बोर्ड का गठन - इस नीति के अनुसार कुछ चुने हुए क्षेत्रों में सीधे विदेशी पूंजी निवेश के लिए विशेषाधिकार प्राप्त बोर्ड गठित होगा। इसका उद्देश्य भारत में उपक्रम स्थापित करने के लिए बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सारी बातें तय करनी होगी। भारी मात्रा में विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए, आधुनिकतम तकनीक प्राप्त करने के लिए तथा भारत की पहुंच विश्व भर की मंडियों तक करने के लिए विशेष कार्यक्रम निर्धारित होगा।


(ङ) विदेशी पूंजी निवेश नई नीति के अनुसार विदेशी पूंजी निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया। यह 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 51 प्रतिशत की दी गई। उच्च प्राथमिकता के 48 उद्योगों में 51 प्रतिशत तक पूंजी निवेश की अनुमति बिना रोक-टोक के दी जाएगी। निर्यात करने वाले व्यापारिक घरानों को 51 प्रतिशत तक विदेशी पूंजी निवेश की अनुमति होगी। इस संबंध में विदेशी मुद्रा नियमन कानून में आवश्यक संशोधन कर दिए जाएंगे रिजर्व बैंक विदेशों को भेजे गए लाभांशों पर नजर रखेगा,

ताकि बाहर भेजी गई विदेशी मुद्रा और उस कंपनी की निर्यात आय के बीच संतुलन बना रहे। नई नीति के अंतर्गत विदेशी पूंजी के अन्य मामलों के लिए पहले मजूरी लेनी होगी।


(च) घाटे वाले सरकारी उद्योग:- औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड अथवा इसी प्रकार का अन्य विशेष संस्थान घाटे वाले सरकारी उद्योगों के लिए अलग से योजना तैयार करेगी। इसके कारण प्रभावित कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाएगी।


(छ) विदेशी तकनीक:- कुछ चुने हुए उद्योगों में जहां आधुनिकतम तकनीक की आवश्यकता है, विदेशों से ऐसी तकनीक या विशेषज्ञ उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया सरल बना दी जाएगी। इस संबंध में विदेशी मुद्रा भुगतान की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।


(ज) सरकारी प्रोत्साहन नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत क्षेत्रीय असंतुलन को कम किया जाएगा। पिछड़े क्षेत्रों में स्थापित उद्योगो को सरकार प्रोत्साहन देगी। (झ) कर्मचारियों को सुविधाएं सामाजिक सुरक्षा योजना बनाई जाएगी, ताकि छंटनी किए गए कर्मचारियों और श्रमिकों का पुनर्वास हो सके। इसके लिए राष्ट्रीय नवीनीकरण निधि की स्थापना की जाएगी। इसके द्वारा तकनीकी परिवर्तन के दौरान प्रभावित श्रमिकों को सहायता दी जाएगी। (ञ) उद्योगों की स्थापना- दस लाख तक की जनसंख्या वाले शहरों को छोड़ दिया जाएगा। अन्य नगरो से (ऐसे उद्योगों के अतिरिक्त जिनके लिए लाइसेंस अनिवार्य है) उद्योग लगाने के लिए केंद्रीय सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। दस लाख जनसंख्या वाले नगरों के मामले में इलेक्ट्रानिक्स और इसी तरह से गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को छोड़ दिया जाएगा। शेष सभी इकाइयां नगर की सीमा से 20 किलोमीटर दूर लगाने का प्रावधान होगा।


(ट) एकाधिकारी कानून में संशोधन एकाधिकारी कानून संशोधन कर लागू कर दिया गया है निर्धारित पूंजी निवेश सीमा को समाप्त कर दिया है। इससे बड़ी कंपनियों और औद्योगिक घराने उद्योगों के विस्तार कर सकेगें। उन्हें नए उद्योग खोलने, कंपनियां खरीदने एवं विलय करने के लिए रोक-टोक नहीं होगी। परंतु इस नीति में अनुचित उद्योग एवं व्यापारिक प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने के लिए अधिक महत्व दिया जाएगा। इसके अंतर्गत किसी भी उपभोक्ता की शिकायत पर नए अधिकार प्राप्त एकाधिकार बोर्ड को किसी भी मामले की जांच का अधिकार होगा।


(ठ) लघु उद्योगों को आरक्षण- नई नीति में लघु उद्योगों के लिए सुविधाओं की घोषणा अलग से की जाएगी। इनके लिए कुछ वस्तुओं का उत्पादन सुरक्षित रखा जाएगा। इन वस्तुओं का उत्पादन बड़े उद्योग नहीं कर सकेंगे। इस प्रकार लघु उद्योगों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।


(ड) आयात सुविधाएं - इस नीति के अनुसार दो करोड़ रुपए से अथवा कुल पूजी के 25 प्रतिशत से कम की उत्पादन मशीनों को आयात करने की स्वतंत्रता होगी। उत्पादन मशीनों के आयात के अन्य मामलों में औद्योगिक विकास मंत्रालय का औद्योगिक सचिवालय, विदेशी मुद्रा उपलब्धि के अनुसार आयात की अनुमति देगा। 


(द) प्रशासनिक नियंत्रणों का अभाव - वर्तमान उद्योगों को बिना किसी अतिरिक्त पूंजी निवेश के अपने लाइसेंस प्राप्त क्षेत्र की किसी भी वस्तु के उत्पादन की पूरी छूट दे दी जाएगी। नए उद्योगों के उत्पादन में वृद्धि करने के लिए प्रशासनिक नियंत्रणों से मुक्त कर दिया जाएगा। मूल्यांकन- नई औद्योगिक नीति उदारवादी नीति है। इसका उद्देश्य भारतीय उद्योगों को अनावश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी नियंत्रणों से स्वतंत्र करना है।

इस नीति के कारण भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में क्रांतिकारी एवं आधारभूत परिवर्तन हुए हैं। इस नीति के मुख्य प्रभाव निम्नलिखित है।


(i) औद्योगिक लाइसेंसिंग की समाप्ति के फलस्वरूप उद्योगों की स्थापना सरल


(ii) विदेशी पूंजी का देश में अधिक आगमन हो सकेगा


(iii) भारतीय उद्योग आन्तरिक तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतियोगी हो सकेंगे। 


(iv) सार्वजनिक क्षेत्र अधिक लाभप्रद तथा कुशल बन सकेगा


(v) लघु उद्योगों का अधिक विकास हो सकेगा


(vi) सार्वजनिक क्षेत्र का घाटा कम होगा।


(vii) निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।