उत्पाद अनुसंधान के मूल सिद्धान्त - Fundamentals of Product Research

उत्पाद अनुसंधान के मूल सिद्धान्त - Fundamentals of Product Research


किसी भी अनुसंधान के मूल सिद्धान्त के बारे में निम्न प्रश्न पूछे जा सकते है-


• क्या अनुसंधान का उद्देश्य स्पष्ट है जिस अनुसार किसी सम्माव्य उपभोक्ताओं को उत्पाद के हित में मनाने का कार्य कर सकते हैं? (यह उत्पाद के संभावित प्रस्ताव का उद्देश्य एवं सुबोधता दर्शाता है)।


• क्या उत्पाद मांग के अनुरूप है? सम्भाव्य उपभोक्ताओं की विशिष्ट आवश्यकताओं की प्रकृति क्या है? (यह उपभोक्ता के भाग का सही अवलोकन करेगा)


• वर्तमान उत्पाद का प्रयोग कैसे और कितना अवधि के लिए होता है और उसके उपयोग का पैमाना कैसा है? (यह उपभोक्ता की वर्तमान उत्पाद के प्रति प्रक्रिया का माप करेगा)


• वर्तमान उत्पाद के प्रयोग में उपभोक्ता क्या चुनौतिया महसूस करता है और उसकी कौन सी जरूरतें पूरी हो रही है? 


• उपभोक्ता उत्पाद के पूर्तिकर्ता और उसकी गुणवत्ता के संबंध में किस स्तर तक सतुष्ट या असंतुष्ट है? (यह बाजार में पूर्ति एवं माग के मध्य के अंतर का अवलोकन होगा)


• क्या उत्पाद की मूल्य या कीमत उसकी गुणवत्ता के अनुरूप है और क्या उत्पाद के संबंध में दिये गये फायदे संतोषजनक है? (यह उपभोक्ताओं का उस उत्पाद के प्रति रुख जानने में सहायक होगा)। 


• उपभोक्ता द्वारा उत्पाद को खरीदने का क्या औचित्य है? (यह उनके क्रय संशा, मूल कीमत या लक्षित उद्देश्य के अनुरूप सही तथा तथ्यपूर्ण होगी।


कंपनियां उस प्रमाण के संबंध में दोषी हो सकती है जिनको उपेक्षित उत्तर पहले से जानकारी में हो यह मामला सोनी के संदर्भ में खरा उतरता है जिसमें ई-विला इन्टरनेट की प्रतिस्थापना से पूर्व बाजार अनुसंधान का व्यापारिक स्तर पर अवलोकन न किये जाने के फलस्वरूप उसे नुकसान भुगतना पड़ा। इस उत्पाद के माध्यम से उत्पादक उपभोक्ता के रसोई तक पहुंच बनाने के उद्देश्य से किया गया था। इस उत्पाद को उपभोक्ता द्वारा इसलिए नकारा गया क्योंकि यह वजन ने भारी (32 पाउड) और नाप (16 इंच ) हिसाब से भी बड़ा था। परिणामस्वरुप उत्पाद को मात्र तीन माह के अन्तराल में बाजार से वापिस खींच लिया गया। हालांकि, सोनी ने आगामी बाजार विश्लेषण व अनुसंधान किया और परिणामस्वरूप मानवीय व वित्तीय संसाधनों को काफी हद तक तक बचाया जोकि उक्त उत्पाद के व्यापारीकरण व विपणनकरण कार्य में खर्च करने पड़ते।


जन्म से पूर्व उत्पाद का वर्णन करने से तात्पर्य है कि किसी उत्पाद का व्यापारीकरण से पूर्व उत्पाद का सही निदर्शन यह उत्पाद के ईद-गिर्द के लक्षणों,

\ जैसे कि पैकेजिंग, सेवाएं (तकनीकी) और विपणन से संबंधित है। उत्पाद के सभी दृष्टिकोणों से उसके डिजाईन, तालमेल, और व्यापारीकरण के रूप में स्थापित करने में वर्षों लग जाते है. विशेषकर आरोगिक रचनाओं में उदाहरण के लिए कार्बन फिल्लस का जन्म 1965 में हुआ, परन्तु बाजार में उसके उत्पादों का प्रतिस्थापन 1970 में हुआ और अपने अस्तित्व को ठोस करने में उसे 20 वर्ष लग गये। वास्तव में किसी भी नए उत्पाद को पहचानने और स्वीकार करने में समय लगता है, तभी उत्पादक उपभोक्ता के उस उत्पाद को लेने हेतु प्रोत्साहित कर सकता है।


नए उत्पाद का रचयिता ही वास्तव में उत्पाद का वास्तविक उपभोक्ता ही होता है जो अवस्थाओं में बदलाव कर सकता है अतः वह नयी योजनाओं,

विचारों एवं सुझावों का जन्मदाता होता है। नये उत्पाद की उपभोक्ता द्वारा स्वीकृति आचित्यता पूर्ण होने से पहले और बाद में नये विचारों के साथ उत्पाद में परस्पर बदलाव लाया जा सकता है और यह तभी स्वीकार्य होता है जब बहुलाश उसमें पूर्ण रूप से सहमत हो। अंततः प्रथाओं के चलते नये विचार व सुझाव पिछड़ जाते हैं और नये उत्पादों को मुख्यधारा में लाने के लिए झुकाव सहना पड़ता है।


किसी भी बाजार को भेदने के लिए और लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है कि बाजार में उत्पाद को जीवत किया जाये। यह अति आवश्यक है कि भविष्य की रणनीति के लिए बाजार के परिवेश को गहराई से मापा जाए। उदाहरण के लिए विश्व में शराब के सबसे बड़े निर्माता ई.एण्ड गेलो वाइनरी ने एक बार सोचा कि नई शराब के आधार पर बाजार में पेय प्रस्तुत किया जाये,

जोकि एस तत्वों से युक्त हो जिनसे उपभोक्ता संतुष्ट हो। बोध के समय यह अस्पष्ट था कि तत्व कैसा होगा, परन्तु अपेक्षित था कि यह चमकदार पानी, बुलबुलेदार अथवा फलों का रस होगा बाजार अनुसंधान जिस पर अनुमानित 100 लाख पाउंड व्यय किये गये से व्यर्थ ही थे अत स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि उपभोक्ता इस समावित पेय से नफरत करते हैं। अत: उपभोक्ताओं ने अपेक्षा की कि यह पेय मात्र शुद्ध शराब को पानी से मिश्रित कर बनाया गया है। इस पेय के उद्देश्य को समझ नहीं पाये है। इस न्यूनतम कौशल एवं उत्पाद के अभाव में उत्पाद लुप्त हो गया।


ऐसी परिस्थितयों में न कवल ई. एण्ड गेला ध्वस्त हुआ, पर उस समय के दृश्य को अवमानित किया,

जबकि अन्य जगह पर दो नवयुवकों जिन्होंने बदलते बाजार को परखा और उपभोक्ताओं (विशेषकर स्त्रियों ने कम मात्रा में एलकोहल युक्त पेय में हल्की प्रतिक्रिया व्यक्त की। इन दो नवयुवकों ने 'स्प्रिंटजर नामक बोतलबंद पेय उत्पाद बाजार में प्रस्तुत किया जोकि ई एण्ड गेलों बाइनरी ने दावा किया कि यह भी तीव्र गति से ध्वस्त हो जाएगा 'स्प्रिंटजर को एक किफायती विनियोग एवं थोड़े पैसों के सहारे अपने उत्पाद को कैलिफोर्निया में प्रस्तुत किया जिसे एक बहुतायत मिलियन डालर में यू.एस. डिस्टिलर ने खरीदा बाजार अनुसंधान के आधार पर ही ई. एण्ड गेलो वाइनरी ने सोचने में गलती की कि नया उत्पाद अनचाही माग में जबरदस्ती घुस कर बीचोबीच झगड़े की जड़ बनेंगे।


किसी उत्पाद को विकसित करके उसे जीवन चक्र पर उतारने में बाजार अनुसंधान में ठोस कदम उठाने पड़ते हैं।

इन्हीं अध्ययनों के आधार पर ही उत्पाद की परीक्षा एवं अनचाही मांग के बारे में जानकारी इकट्ठी करने का प्रयास किया जाता है) विचारधाराओं को छिपाने लिए उपभोक्ता से उस संबधित उत्पाद के संदर्भ में प्रतिपुष्टी की जाती है और उपभोक्ता को उत्पाद की गुणवत्ता के बारे में राय आकने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाता है।


किसी भी उत्पाद को विवेकपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करने से पूर्व तीन निर्णायक प्रश्नों के उत्तर खोजना अति आवश्यक है, जो निम्नलिखित है-


(i) उत्पाद की कंपनी इस क्षण पर किस स्तर पर है?


(ii) यह कहा जाने की इच्छा रखती है?


(iii) यह अपने लक्ष्य को कैसे सम्पन्न कर सकती है?


बाजार अनुसंधान इन प्रश्नों के उत्तर देने में पूर्ण रुप में सक्षम है। यह बाजार के आकार वृद्धि, विकास वितरण नेटवर्क मार्ग एवं क्रय पद्धति को प्रभावित करने वाले कारको निर्णायकों, पूर्तिकर्ताओं एवं उनके बोध करने के कारको, शक्तियों और कमजोरियों का आकलन करती है। यह उत्पाद के डिजाईन, कीमत, पैकेजिंग, प्रोत्साहन एवं सेवाओं (जैसे- विपणन मिश्रण के तत्त्व) के संबंध में कारकों को नियंत्रित करती है।


कुछ कंपनिया इन प्रश्नों के उत्तरार्थ बाजार अनुसंधान कराती है परन्तु इनके परिणाम आंतरिक राजनीतिक विवादों और नये उत्पाद को अपनाने में अनावश्यक देरी करते हैं एक स्वतन्त्र बाजार में अध्ययनरत वितरणकर्ता प्रयोजनों का गतिमान करते हैं।