वैश्विक विपणन - global marketing
वैश्विक विपणन - global marketing
विपणन का तात्पर्य उन व्यावसायिक कियाओं के निष्पादन से है जो उत्पाद व सेवाओं के प्रवाह को उत्पादक से उपभोक्ता की ओर निर्देशित करती है। विपणन की आधुनिक विचारधारा ग्राहक अभिमुखी है। इसमें उपभोक्ता संतुष्टि की और विशेष ध्यान दिया जाता है। उपभोक्ता कि पंसद, रूचि, प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए उत्पाद बनाया जाता है। उपभोक्ता को बाजार केंद्रीय बिंदु माना जाता है विपणन से उपयोगिता का सृजन होता है। इससे समाज के लोगों का जीवन-स्तर ऊंचा होता है।
• रिचर्ड बसकिक के अनुसार- विपणन एक ऐसी प्रणाली है, जो रूप, स्थान, समय एवं स्वामित्व उपयोगिताओं के सृजन द्वारा वस्तुओं में मूल्य उत्पन्न करती है।
• अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन के अनुसार, विपणन का अर्थ उन व्यावसायिक कियाओं को करने से है जो वस्तुओं तथा सेवाओं में प्रवाह को उत्पादक से उपभोक्ता तक निर्देशित करती हैं।
विपणन कियाओं को जब विश्व स्तर पर किया जाता है, तो इसे वैश्विक विपणन कहते हैं जब कोई व्यावसायिक इकाई अपनी विपणन कियाओं को एक से अधिक देश में करती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय विपणन में संलग्न है। अब बढ़ ते वैश्वीकरण के कारण बढ़ ने अंतरराष्ट्रीय विपणन से टैरिफ व गैर टैरिफ बाधाएं समाप्त हो रही है। परिवहन व संचार के तेज साधना से दूरियां कम हो गई हैं। अब विपणनकर्ता सारे विश्व को एक विपणन इकाई के रूप में देखते है। बहुत से बाड, जैसे- कोका-कोला, पेप्सी, लोरियल, सैमसंग, नोकिया, डेल, रोलेक्स घड़िया, एप्पल कम्प्यूटर, मैक्डोनल्ड, लेवाइस जीन्स, एल. जी, सोनी, वोडाफोन आदि विश्वभर में प्रसिद्ध है।
बहुत-सी बड़ी कंपनियों का मूल देश, एक छोटा देश है।
बिना विदेशी बाजारों के ये बड़ी कंपनियां अपने उत्पादन की विशाल मात्रा को अपने ही देश में नहीं बेच सकती जैसे नेसले का मूल देश स्विट्ज़रलैंड है जो एक बहुत ही छोटा देश है नोकिया का मूल देश फिनलैंड है जो एक बहुत छोटा देश है। यूनिलीवर का मूल देश नीदरलैंड है. यह भी एक छोटा देश है। यदि अंतरराष्ट्रीय विपणन न होता तो ये कंपनिया आज इतनी विशाल कंपनियां न बन पाती। वैश्विक विपणन के कारण ही छोटे देश में बनी ये कंपनियां इतने विशाल आकार में विकसित हो पाई हैं। अंतरराष्ट्रीय विपणन की परिमापाए इस प्रकार है-
(i) हैरोल्ड वर्सन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय विपणन एक ऐसी प्रकिया है जिसमें विभिन्न देशों में मौतिक वितरण मध्यम स्थापित किए जाते हैं तथा विभिन्न देशों में उत्पाद व सेवाएं बेचने के लिए कियाए की जाती है।"
(ii) वन टर्पेस्ट्रा में अनुसार, अंतरराष्ट्रीय विपणन एक ऐसी प्रकिया है, जिसमें विभिन्न देशों में विपणन उद्देश्य प्राप्त करने के लिए विपणन रणनीतिया नियोजित की जाती है य बनायी जाती है तथा इन रणनीतियों को लागू किया जाता है।"
(iii) गैस एवं कटेओरा के अनुसार अंतरराष्ट्रीय विपणन से अभिप्राय कंपनी के उत्पादों तथा सेवाओं को एक से अधिक देशों में उपभोक्ताओं के प्रयोग के
लिए उपलब्ध करवाने से है।"
(iv) बेकमेन एवं डेविडसन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय विपणन से अभिप्राय उन सभी कियाओं के निष्पादन से है जो एक से अधिक देशों में उनके बाजारों की इच्छाओं तथा आवश्यकताओं को जानने, उत्पाद उपलब्धता की योजना बनाने,
उत्पादों का स्वामित्व हस्तांतरित करने उनका भौतिक वितरण करने तथा अन्य आवश्यक विपणन कियाओं को करने से है।"
यहां यह बात उल्लेखनीय है कि केवल घरेलू विपणन सम्मिश्र को विभिन्न देशों में विस्तृत कर लेना ही अंतरराष्ट्रीय विपणन नहीं है बल्कि इसमें विपणन सम्मिश्र के विभिन्न तत्वों को विभिन्न देशों के विपणन वातावरण के अनुसार समायोजित करना पड़ता है विपणन रणनीतियों को विभिन्न देशों की स्थानीय आवश्यकताओं, संस्कृति, आर्थिक दशाओं, भौगोलिक दशाओं. सरकारी अधिनियमों के अनुसार ढालना पड़ता है जैसे-मैक्डोनल्ड ने अपने मेन्यू की विभिन्न देशों के लोगों की भोजन आदतों के अनुरूप बदल रखा है। विभिन्न देशों में व्यजनों के नाम भी वहा की भाषा के अनुसार रखे गए हैं वितरण व संवर्द्धन कार्यक्रम भी स्थानीय विशेषताओं व जरूरतों के अनुसार बनाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय विपणन निर्यात विपणन से भिन्न है।
निर्यात विपणन में कंपनी अपने मूल देश में ही वस्तुओं का उत्पादन एवं अन्य विपणन कियाए करती है। यह केवल अपने अतिरिक्त उत्पादन बेचने के लिए कोई संगठन या इकाई नही बनाती अर्थात उत्पादन या विपणन की कोई व्यवस्था प्राय: दूसरे देश में नहीं की जाती बल्कि किसी मध्यस्थ की सहायता से मूल देश के अतिरिक्त उत्पादन को अन्य देशों में बेचा जाता है अंतरराष्ट्रीय विपणन एक व्यापक अवधारणा है, जिसमे निर्यात विपणन के अलावा विदेशी बाजारों में प्रत्यक्ष विपणन भी शामिल है। प्रत्यक्ष विदेशी विपणन में अन्य देशों में संपूर्ण विपणन कियाए भी की जाती है जैसे वितरण व्यवस्था करना, विज्ञापन कार्यक्रम चलाना, वैयक्तिक विकय करवाना, विकय संवर्द्धन कार्यक्रम बनाना, आदि। कई बार विदेशों में सहायक इकाइयां स्थापित की जाती है तथा यहां के बाजार में सपूर्ण विपणन कियाए करती है।
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