ग्लोकलाइजेशन - Glocalization
ग्लोकलाइजेशन - Glocalization
आजकल वैश्विक बाजार के संदर्भ में एक नयी विचारधारा ग्लोकलाइजेशन का प्रयोग किया जाता है इसके अंतर्गत वैश्विक कंपनिया अपने उत्पादों को विभिन्न देशों की घरेलू आवश्यकताओं, संस्कृति फैशन आदि के अनुसार बदल देती है। वैश्विक कंपनियां विभिन्न देशों की संस्कृति, फैशन, पसंद, भौगोलिक वातावरण आदि को ध्यान में रखते हुए, विभिन्न देशों में भिन्न-भिन्न विशेषताओं वाले उत्पाद बेचती है। उत्पाद को विभिन्न देशों की घरेलू आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जाता है। इसके अंतर्गत वैश्विक कपनियां स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अपने उत्पाद को बदल देती है। इस तरह ग्लोकलाइजेशन शब्द दो शब्दों ग्लोबलाइजेशन व लोकलिजेशन का मिश्रण है, जिसका अर्थ है- वैश्विक उत्पादों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार बदलना आजकल वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियां विभिन्न देशों ने अपने उत्पाद तभी बेच सकती है, जब इनके उत्पाद उस देश के लोगों की पसंद, संस्कृति, रीति-रिवाज, आय स्तर कानूनों,
भौगोलिक वातावरणीय विशेषताओं आदि से मेल खाते हो। आज बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विभिन्न देशों में भेदभावपूर्ण उत्पादन व विपणन रणनीतियां अपनाती है। इसमें उत्पाद विश्वस्तरीय बाजार में बेचे जाते हैं, परंतु इसके साथ-साथ विभिन्न देशों की स्थानीय विशेषताओं व आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाता है। साधारण शब्दों में ग्लोकलाइजेशन का अर्थ है- वैश्विक सोच तथा स्थानीय कार्यकरण जैसे मैकडोनल्ड, जो एक विश्वस्तरीय फास्ट फूड ब्रांड के रूप में जाना जाता है, यह भारत में भारतीयों की संस्कृति, रीति-रिवाज, पसंद को ध्यान में रखते हुए अपने खान- उत्पादों को भारतीय बाजार में बेचता है, जैसे- अधिकतर भारतीय शाकाहारी है तथा मासाहारी लोग भी गाय के मांस का उपभोग नहीं करते। इस बात को ध्यान में रखते हुए मैकडोनल्ड के भारतीय बाजार में अधिकतर खारा उत्पाद शाकाहारी है मासाहारी खारा उत्पादों में चिकन व मटन को ही शामिल किया गया है। खाद्य उत्पादों के नाम भी स्थानीय नामों में अनुरूप है जैसे-महाराजा मैक, चिकन टिक्का आलू आदि।
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