पंचवर्षीय योजनाओं के लक्ष्य - goals of five year plans

पंचवर्षीय योजनाओं के लक्ष्य - goals of five year plans


किसी योजना के स्पष्ट लक्ष्य होने चाहिए। पंचवर्षीय योजनाओं के लक्ष्य है.


• आधुनिकीकरण


• आत्मनिर्भरता


• आर्थिक विकास


• समानता


इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक योजना में इन लक्ष्यों को समान महत्व दिया गया है।

सीमित संसाधनों के कारण प्रत्येक योजना में ऐसे लक्ष्यों का चयन करना पड़ता है, जिनको प्राथमिकता दी जानी है। योजनाकारों को यह सुनिश्चित करना होता है कि चारों उद्देश्यों में कोई अंतर्विरोध न हो।


(i) आर्थिक विकास - संवृद्धि का अर्थ है देश में वस्तुओं और सेवाओं की उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना। इसका अर्थ यह है उत्पादक पूंजी का विस्तार, बैंकिग परिवहन आदि सेवाओं का विस्तार या उत्पादक पूजी तथा सेवाओं की क्षमता में वृद्धि। अर्थशास्त्र की भाषा में आर्थिक संवृद्धि से अभिप्राय देश की जी.डी.पी. में निरंतर वृद्धि से है। जी.डी.पी. का अर्थ एक वर्ष में किसी देश में हुए सभी वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन का बाजार मूल्य जी.डी.पी. जितनी अधिक होगी वह देश उतना ही अधिक समृद्ध होगा। यदि भारत के लोगों को अधिक समृद्ध होना है तो देश में वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पाद अधिक करना होगा।


(ii) आधुनिकीकरण - वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि करने के लिए नई टेक्नोलाजी का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए किसान पुराने किस्म के बीजों के स्थान पर नई किस्म के बीजों तथा खादों का प्रयोग करके कृषि उत्पादन को बढ़ा सकते हैं। इसी प्रकार उद्योगों में नई मशीनों के प्रयोग से वस्तुओं के उत्पादन वृद्धि तथा उनकी क्वालिटी बेहतर होती है। आधुनिकीकरण केवल उत्पादन तथा सेवाओं में वृद्धि करना ही नहीं है, बल्कि समाज के दृष्टिकोण में भी परिवर्तन लाना है। जैसे महिलाओं तथा पुरुषों को समान अधिकार देना परंपरागत समाज में नारी का कार्यक्षेत्र घर के अंदर तक ही सीमित माना जाता था। आधुनिक समाज में नारी अपनी प्रतिभा को घर से बाहर जैसे बैंको, कारखानों, विद्यालयों आदि स्थानों पर प्रयोग करती है और ऐसा करने से समाज समृद्ध होता है।


(iii) आत्मनिर्भरता - कोई देश आधुनिकीकरण और आर्थिक संवृद्धि अपने अथवा अन्य देशों से आयायित संसाधनों के प्रयोग के द्वारा कर सकता है। हमारी प्रथम सात पंचवर्षीय योजनाओं का मुख्य उद्देश्य देश को आत्मनिर्भर बनाना था। 


इन योजनाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि हमें उन वस्तुओं के आयात से बचना चाहिए जिनका उत्पादन हम अपने देश में कर सकते हैं। इस नीति में विशेषकर देश को खाद्यान्न के लिए निर्भर बनाना था जिससे अन्य देशों पर निर्भरता कम हो सके। यह आशंका भी थी कि आययित खाद्यान्न, विदेशी प्रौद्योगिकी तथा पूंजी निवेश किसी-न-किसी रूप में हमारे देश की संप्रभुता में बाधा डाल सकती है। (iv) समानता - हम केवल संवृद्धि, आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता के द्वारा ही अपने लोगों के जीवन में सुधार नहीं ला सकते। किसी देश में संवृद्धि दर तथा विकसित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग होने के बाद भी अधिकांश लोग गरीब हो सकते है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आर्थिक समृद्धि का लाभ देश के निर्धन वर्ग को मिल सके तथा यह केवल धनी लोगों तक सीमित न रहे। प्रत्येक भारतीय अच्छा भोजन, अच्छा आवास, शिक्षा, चिकित्सा, जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा कर सके देश में धन का वितरण समान हो सके।