सरकार के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम - government poverty alleviation program

सरकार के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम - government poverty alleviation program


गरीबी निवारण हेतु भारत सरकार ने समय-समय पर अनेक कदम उठाए है। पांचवीं पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी हटाना था। छठी योजना में भी गरीबी हटाने के लक्ष्य को प्राथमिकता दी गई। दसवी योजना तक गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के अनुपात को 20% तक करने का लक्ष्य रखा गया।


गरीबी की समस्या को हल करने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यक्रम बनाए गए हैं-


(क) स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना- यह योजना 1999 में आरंभ की गई। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनता तथा बेरोजगारी को समाप्त करना है। इस योजना में समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम तथा अन्य कार्यक्रमों को शामिल किया गया है।

इसका मुख्य लक्ष्य बड़ी संख्या में लघु उद्यमों की स्थापना करना है। सामूहिक रूप से उद्यमों को स्थापित करने के लिए स्वयं सहायता समूहों का भी प्रावधान है। इस योजना के अंतर्गत निर्धनों को रोजगार प्रदान करने के लिए ऋण तथा अनुदान दिया जाता है। केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा 7525 के अनुपात में इस योजना के लिए व्यय किया जाता है। इसके अंतर्गत स्वरोजगार प्राप्त करने वालों में 50% अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, 40% महिलाएं और 3% विकलांग होंगे। 2005 तक लगभग 51 लाख स्वरोजगारियों को लाभ हुआ है। इस योजना पर 31 दिसंबर 2007 तक 19340 32 करोड़ रूपए व्यय हुए।


(ख) स्वर्ण जयंती शहरी स्वरोजगार योजना- इस योजना को 1 दिसंबर, 1997 से आरंभ किया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरों में बेरोज़गारों को स्वरोजगार तथा मजदूरी प्रदान करवाना है।

इसके अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों तथा नौवी कक्षा तक पढ़े-लिखे लोगों को शामिल किया गया है। इस योजना में 75% केन्द्र तथा 25% राज्य द्वारा व्यय किया जाता है। दिसंबर 2007 तक इस योजना से 325 लाख लोगों को लाभ मिला। 


(ग) संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना-यह योजना सितंबर 2001 में आरंभ की गई। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:


• ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार तथा 


• खाद्य सुरक्षा उपलब्ध करवाना,


स्थायी सामाजिक, सामुदायिक तथा आर्थिक परिसंपत्तितयों का निर्माण करना ।

इस योजना में व्यय 75% केंद्र तथा 25% राज्य द्वारा किया जाता है। रोजगार आश्वासन योजना तथा जवाहर ग्राम योजना को अप्रैल 2002 से संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में सम्मिलित कर दिया गया है। 31 दिसंबर 2007 तक इस योजना से 116 करोड़ मानव दिनों का रोजगार प्राप्त हुआ पर 1 अप्रैल 2008 से इस योजना को राष्ट्रीय ग्रामीण योजना में शामिल कर लिया गया।


(घ) प्रधानमंत्री रोजगार योजना- यह योजना शहरी क्षेत्र में 1993-94 में आरंभ की गई। इस योजना का 1994-95 में ग्रामीण क्षेत्र में भी विस्तार किया गया। इसमें शिक्षित बेरोजगार युवकों को रोजगार प्रदान करवाया जाता है। 2004-2005 तक इस योजना से 375 लाख लोगों को लाभ पहुचा।


(ङ) प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना- यह योजना 2000-2001 में आरंभ की गई। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है। इसमें ग्रामीण स्तर पर विकास के लिए पाच क्षेत्रों की ओर विशेष ध्यान दिया गया है। ये क्षेत्र निम्नलिखित है (क) स्वास्थ्य, (ख) प्राथमिक शिक्षा, (ग) पीने का पानी, (घ) आवास, (ड) ग्रामीण सड़कें, (च) 2001-02 में ग्रामीण विद्युतीकरण को भी जोड़ा गया है। इस योजना पर 2004-05 में 2800 करोड़ रूपए व्यय किए गए।


(च) लघु तथा कुटीर उद्योग-सरकार का उद्देश्य निर्धनता तथा बेरोज़गारी को कम करना है। इसके लिए लघु तथा कुटीर उद्योगों के विकास के लिए विशेष प्रयत्न किए गए हैं। इन उद्योगों के अंतर्गत 2004-05 में लगभग 283 लाख लोगों को रोजगार मिला। स्वयं रोजगार योजना को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त धन खर्च किया जा रहा है। 2005-06 में लघु उद्योगों की कारोबार सीमा 3 करोड़ रूपए से बढ़कर 4 करोड़ रु कर दी गई। इससे लघु उद्योगों में और अधिक रोजगार के अवसर बढेगे।


(छ) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना- यह योजना 25 दिसंबर 2000 को आरंभ की गई। यह केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना है। इसमें सड़क निर्माण के साथ निर्धनों को मजदूरी भी प्राप्त होती है। सन 2004-05 में इस योजना पर 2468 करोड़ रूपए व्यय किए गए 2005 तक लगभग 61 हजार सड़क निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। लगभग 13,000 इलाकों को सड़क संपर्क प्राप्त हुआ है। इस योजना के अनुसार 7 वर्ष की अवधि में 60,000 करोड रूपए खर्च करने का लक्ष्य है। आशा की जाती है कि इस कार्यक्रम के पूरा होने के पश्चात 10 करोड़ गरीबों को गरीबी रेखा से ऊपर लाए जाने की संभावना है अर्थात इस योजना से 10 करोड़ गरीबों को लाभ होगा।


31 दिसंबर 2007 तक इस योजना के अधीन 1.43 लाख कि.मी. सड़के 27382 करोड़ रूपए खर्च करके पूरी कर ली गई।


(ज) राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रमः यह कार्यक्रम 1995-96 में आरंभ किया गया।

इसका लक्ष्य निर्धनों को तीन प्रकार की सेवाएं प्रदान करना है- (i) राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेन्शन योजना, (ii) राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना, (iii) राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना, इनमें सारा व्यय केंद्रीय सरकार द्वारा किया जाता है, परंतु 11 अप्रैल 2001 से एन.एम.बी.एस. को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को सौंप दिया जाता है।


(झ) अंत्योदय अन्न योजना- वह योजना प्रधानमंत्री ने 25 दिसम्बर, 2001 को आरंभ की इसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों में से 1 करोड़ सबसे अधिक गरीब परिवारों की पहचान की गई है। ऐसे परिवार को 2 रूपये किलो गेहु और 3 रूपये किलो चावल की दर से 35 किलोग्राम खाद्यन्न की मात्रा उठाई गई है।


2005-06 में अत्योदय अन्न योजना को दायरा बढ़ा दिया गया है। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 2.5 करोड़ परिवार इसमें शामिल किए जाएंगे। इससे 63 मिलियन मानव दिनों को रोजगार पैदा होगा। अब इस परियोजना को राज्यों को सौंप दिया गया है। 


(ञ) अन्नापूर्णा योजना :- यह योजना 1 अप्रैल 2000 से आरंभ हुई है। यह शत प्रतिशत केंद्रीय प्रयोजित योजना है।


उद्देश्य:


(i) वरिष्ठ नागरिकों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे नागरिक जो वृद्ध अवस्था पेंशन के अंतर्गत आते हैं, परंतु उन्हें पेन्शन नहीं मिलती।


(ii) प्रति व्यक्ति 10 किलाग्राम खाद्यान्न निःशुल्क दिया जाता है। 2002-2003 में यह योजना राज्य योजना को दे दी गई है। 


(ट) सार्वजनिक वितरण प्रणाली खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए चार लाख उचित दरों की दुकानो से निर्धनों को सस्ती कीमतों पर खाद्यान्न उपलब्ध करवाए गए। कुछ राज्यों में ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था की गई। इस पर सरकार के बजट का लगभग 3 प्रतिशत व्यय किया जाता है। सार्वजनिक वितरण व्यवस्था से निर्धनों को कुछ हद तक सहायता प्राप्त हुई है। 


(ठ) वाल्मीकी अंबेडकर आवास योजना- इस कार्यक्रम को गंदी बस्तियों में रहने वाले हरिजन वर्ग के लोगों के लिए दिसंबर 2001 में आरंभ किया गया। इसमें निर्मल भारत अभियान कार्यक्रम के अधीन इन लोगों के रहन-सहन के स्तर को ऊंचा उठाना था। 31 दिसंबर, 2004 तक इस योजना के लिए 753 करोड़ रु. खर्च करा गया। जिससे 3,50,084 घरों को 49,312 नई किस्म के टाएलेट सीट प्रदान किए गए। अब इस योजना को इंदिरा आवास योजना में शामिल कर लिया गया है।


(ड) समन्वित बाल विकास योजना:- इस योजना के अंतर्गत माताओं तथा 8 वर्ष से नीचे के बच्चों को कुछ सहायता प्राप्त हुई है।


(ढ) मध्य दिवस भोजन योजना- इस योजना के अंतर्गत स्कूलों में बच्चों को मुफ्त दोपहर का भोजन दिया जाता है।


(ण) इंदिरा आवास योजना:- इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जातियों, अनुसूचित कबीलों तथा निर्धनता रेखा से नीचे रह रहे श्रमिकों को निशुल्क घर प्रदान करना है। यह योजना केंद्र तथा राज्यों में 75:25 पर लागत सहन करने को आधार बना कर अपनाई गई, जिसमें इन घरों को बनाने की 75 प्रतिशत लागत केंद्र सहन करेगा। 2007-08 वित्तीय वर्ष में 4,0327 करोड़ रु. से 21.27 लाख घर बनाने की योजना थी। किंतु नवंबर 2007 तक केवल 9.39 लाख घर बना कर विभिन्न राज्यों में इस वर्ग को बांटे गए।