राष्ट्रीय आय के निर्देशक - Guiding Principles
राष्ट्रीय आय के निर्देशक - Guiding Principles
राष्ट्रीय आय का मूल्यांकन करते समय दो निर्देशक सिद्धान्तों को सदैव ध्यान में रखना चाहिये। ये दो निर्देश सिद्धान्त है (i) दोहरी गणना से बचावए एवं (ii) हस्तान्तरण भुगतानों से बचाव
1 दोहरी गणना से बचाव (Escape from Double Counting )
राष्ट्रीय आय के मूल्यांकन में किसी भी वस्तु अथवा सेवा की दोहरी गणना नहीं होनी चाहिये; अन्यथा राष्ट्रीय आय के अनुमान गलत सिद्ध होंगे। उदाहरणार्थ कृषि उत्पादन में यदि तम्बाकू का मूल्यांकन कर लिया गया है तो सिगरेटों के कुल उत्पादन मूल्य का अनुमान लगाते समय तम्बाकू के मूल्य को उसमें से घटा देना चाहिये । यदि ऐसा न किया गया तो तम्बाकू के उत्पादन मूल्य को राष्ट्रीय आय के अनुमान में दो बार सम्मिलित कर लिया जायेगा।
दोहरी गणना से बचने के लिये प्रार्थना प्रायः दो सांख्यकीय विधियों का प्रयोग किया जाता है (i) अन्तिम उत्पाद विधि (final product method), (ii) मूल्य योग विधि (Value added method)। अन्तिम उत्पाद विधि के अनुसार देश में उत्पादित किये जाने वाले उपभोक्ता एवं पूंजीगत वस्तुओं के अन्तिम उत्पादों के मूल्यों को जोड़कर और उसमें सेवाओं के मूल्य को सम्मिलित करके राष्ट्रीय आय का कुल मूल्य निकाल लिया जाता है। मूल्य योग विधि के अन्तर्गत अन्तिम उत्पादों के मूल्यांकन के स्थान पर सभी वस्तुओं के उत्पादन की विभिन्न अवस्थाओं में सृजित होने वाले मूल्यों का योग करके राष्ट्रीय आय ज्ञात कर ली जाती है।
2. हस्तान्तरण भुगतानों से बचाव (Escape from Transfer payments)]
राष्ट्रीय आय की गणना का दूसरा निर्देशक सिद्धान्त हस्तान्तरण भुगतानों का राष्ट्रीय आय में सम्मिलित न करना है।
हम जानते है कि राष्ट्रीय आय का सम्बन्ध उत्पादन अथवा आर्थिक क्रियाओं से होता है। एक व्यक्ति के लिये एक निश्चित समयावधि में जहां उसकी समस्त मौद्रिक प्राप्तिया आय हैं, वहां व्यापक दृष्टिकोण से उन सभी प्राप्तियों को राष्ट्रीय आय में सम्मिलित नहीं किया जा सकता, बशर्ते कि व्यक्ति ने इसे अर्जित न किया हो। कहने का अभिप्राय यह है कि किसी भी ऐसी आय को राष्ट्रीय आय में तभी सम्मिलित किया जायेगा जबकि, उस आय को पाने के लिय व्यक्ति द्वारा किसी उत्पादक क्रिया में भाग लिया गया है। उदाहरणार्थ, यदि कोई व्यक्ति, उपहार' अथवा हतान्तरण प्राप्ति के रूप में अन्य लोगों से अथवा सरकार से आय प्राप्त करता है तो यह उसकी वैयक्तिक आय आ अग तो होगी किन्तु उसे राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जायेगा क्योंकि इस प्राप्ति के बदले कोई उत्पादन क्रिया सम्पन्न नहीं की गयी है अर्थात हस्तान्तरण भुगतानों को छोड़कर विभिन्न व्यक्तियों की आय का योग ही राष्ट्रीय आय कहलाता है।
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