मुद्रा का इतिहास - history of currency

मुद्रा का इतिहास - history of currency


मुद्रा ऐतिहासिक वस्तु के रूप में स्वीकार की जाती है। यह बाजार का मापक होती है, ऐतिहासिक रूप से ही इसका आस्तित्व रहा है। लेकिन व्यावहारिक रूप से सभी समकालीन मुद्रा फिएट प्रणाली पर आधारित होती है। फिएट मुद्रा का अर्थ है कोई चेक की राशि जोकि आंतरिक रूप से मूल्यरहित हो और उसे भार रूप में स्वीकार किया जा सकता है कोई चीज जो उपरोक्त मानकों को पूरा करता है, उसे हम मुद्रा के रूप में मान सकते हैं।


मुद्रा ऐतिहासिक वस्तु के रूप में स्वीकार की जाती है। यह बाजार का मापक होती है। ऐतिहासिक रूप से ही इसका अस्तित्व रहा है। लेकिन व्यावहारिक रूप से सभी समकालीन मुद्रा फिएट प्रणाली पर आधारित है। फिएट मुद्रा का अर्थ है कोई चेक या उधारी की राशि जोकि आंतरिक रूप से मूल्यरहित हो और उसे भौतिक रूप से स्वीकार किया जा सकता है।

यह अपने मूल्य की स्वतः ही खोज करती है अर्थात् इसके मूल्य का निर्धारण सरकारों द्वारा किया जाता है जोकि एक कानूनी विधा है अर्थात् यह वह है कि जोकि देश के परिसर के भीतर भुगतान के एक फार्म के रूप में स्वीकार किया जाता है। एक देश की मुद्रा की आपूर्ति मुद्रा के रूप में होती है जिसके अंदर बैंक की मुद्राएं भी शामिल होती है। विकसित देशों में यह इसका रिकार्ड कागजी तौर ब्राड मनी के तौर पर रखा जाता है। ब्राड मनी से तात्पर्य यह है कि इसके अंतर्गत आमतौर पर वाणिज्यिक बैंको में माँग जमाओं को शामिल किया जाता है इसके अंतर्गत उस मुद्रा को भी शामिल किया जाता है जिस तक आसानी से पहुँच को बनाये रखा जा सकता हो, ब्राड मनी के अंतर्गत तरल मुद्रा और गैर नकद घटक को शामिल किया जाता है जोकि आम तौर पर बहुत आसानी से नकदी में परिवर्तित किया जा सकता है।