सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन के सिद्धांत - holistic quality management principles
सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन के सिद्धांत - holistic quality management principles
सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन एक प्रबंधकीय प्रणाली है जिसके अंतर्गत, एक ग्राहक - केन्द्रित संगठन में निरंतर प्रगति हेतु सभी कर्मचारी सम्मिलित होते हैं। यह गुणवत्ता की अवधारणा को संगठन की संस्कृति एवं गतिविधियों के साथ एकीकृत करने के लिए आंकड़ों, रणनीति तथा प्रभावी सम्प्रेषण का उपयोग करती है। सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन के आठ प्रमुख सिद्धांत अथवा घटक हैं, जो इस प्रकार हैं:
1. ग्राहक केन्द्रित (Customer focused)
गुणवत्ता के स्तर का निर्धारण अंततः ग्राहक ही करता है। इस तथ्य से कोई फर्क नहीं पड़ता की संगठन गुणवत्ता सुधार को प्रोत्साहित करने हेतु, कर्मचारी प्रशिक्षण, गुणवत्ता को अभिकल्पन - प्रक्रिया से सम्बद्ध करना,
कंप्यूटर अथवा सॉफ्टवेयर का उन्नयन, तथा नए मापन उपकरणों को खरीदना आदि क्या-क्या उपाय करता है- ग्राहक ही यह निर्धारित करेगा की यह प्रयास सार्थक हैं अथवा नहीं।
2. पूर्ण कर्मचारी सहभागिता (Total employee involvement)
सामान लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में सभी कर्मचारियों की सहभागिता होती है। कर्मचारी प्रतिबद्धता तभी संभव है जब कार्य स्थल से डर का पलायन हो जाए, कर्मचारियों को सशक्त बनाया जाए, तथा प्रबंधन के द्वारा अनुकूल वातावरण स्थापित किया जाए। उच्च-निष्पादन वाले कार्य-तंत्र (high performance work systems), निरंतर सुधार/ प्रगति के प्रयासों को सामान्य व्यापारिक गतिविधियों से एकीकृत करते हैं।
3. प्रक्रिया केन्द्रित (Process-centred)
सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन का एक मूलभूत तत्व प्रक्रिया चिंतन पर केन्द्रित होना है। प्रक्रिया संचालन के आवश्यक कदम निर्धारित होते हैं, तथा अनपेक्षित परिवर्तनों की पहचान करने के लिए निष्पादन प्रमापों का निरंतर निरीक्षण होता है।
4. एकीकृत प्रणाली (Integrated system)
यद्यपि एक संगठन में लम्बवत संरचित विभागों में व्यवस्थित विभिन्न क्रियात्मक विशेषज्ञताएं होती हैं, तथापि इन विभिन्न कार्यों को अंतर्संबद्ध करने वाली क्षैतिज प्रक्रियाएं, सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन का केन्द्र होती हैं।
संगठन की छोटी-छोटी प्रक्रियाओं को जोड़कर बड़ी प्रक्रियाएं बनती हैं, तथा यह सभी प्रक्रियाएं मिलकर रणनीति को निर्धारित एवं क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक व्यावसायिक प्रक्रियाओं का रूप लेती हैं।
संगठन की दृष्टि, ध्येय, उद्देश्य, मार्गदर्शक सिद्धांत, गुणवत्ता नीतियां तथा अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं सभी को स्पष्ट होने चाहिए। व्यावसायिक निष्पादन का निरंतर निरीक्षण एवं सम्प्रेषण होना चाहिए।
एक एकीकृत व्यावसायिक तंत्र, बालड्रिज राष्ट्रीय गुणवत्ता कार्यक्रम (Baldrige National Quality Programme) अथवा अंतर्राष्ट्रीय प्रमाप मानक ( ISO 9000 Standards) के मानकों को आदर्श मानकर, उन पर आधारित हो सकता है। प्रत्येक संगठन की अपनी एक अनोखी संस्कृति होती है, तथा यह लगभग असंभव है की वह अपने उत्पादों या सेवाओं में, एक अच्छी गुणवत्ता संकृति को प्रोत्साहित किए बिना उत्कृष्टता प्राप्त कर ले। अतः एक एकीकृत प्रणाली निरंतर प्रगति तथा ग्राहकों, कर्मचारियों एवं संगठन से सम्बंधित अन्य लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए, व्यावसायिक सुधार के तत्वों को एकीकृत अथवा सम्बद्ध करती है।
5. सामरिक तथा व्यवस्थित दृष्टिकोण (Strategic and systematic approach)
गुणवत्ता प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण अंग, संगठन के ध्येय, दृष्टि एवं लक्ष्यों की पूर्ति के लिए एक व्यवस्थित तथा रणनैतिक दृष्टिकोण अपनाना है। सामरिक नियोजन अथवा सामरिक प्रबंधन की इस प्रक्रिया के अंतर्गत, रणनैतिक योजनाओं के निर्माण को गुणवत्ता के एक महत्वपूर्ण तत्व के साथ एकीकृत किया जाता है।
6. निरंतार प्रगति / सुधार (Continual improvement)
सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन के ध्यान का एक प्रमुख केन्द्र, प्रक्रियाओं का निरंतर सुधार है।
प्रक्रियाओं की निरंतर प्रगति के द्वारा संगठन अधिक प्रतिस्पर्धी, तथा अपने से सम्बंधित विभिन्न साझेदारों की अपेक्षाओं की पूर्ति करने में विश्लेषणात्मक तथा सृजनशील बनता है।
7. तथ्य आधारित निर्णयन (Fact based decision making)
संगठन कितना अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, इस तथ्य की जानकारी के लिए निष्पादन मापन पर आधारित आंकड़े आवश्यक होते हैं। निर्णयन की शुद्धता में प्रगति करने, सर्वसम्मति प्राप्त करने, तथा अतीत के इतिहास पर आधारित पूर्वानुमान करने के लिए, सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन के अंतर्गत यह आवश्यक है कि संगठन निरंतर निष्पादन से सम्बंधित आंकड़ों का संग्रहण एवं विश्लेषण करे।
8. सम्प्रेषण (Communication)
संगठनात्मक परिवर्तनों के साथ-साथ दैनिक गतिविधियों एवं कार्यों में, सभी स्तरों पर कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने तथा उन्हें अभिप्रेरित करने में सम्प्रेषण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सम्प्रेषण में समय की पाबंदी, विधियां तथा रणनीतियां सम्मिलित होती हैं।
यह तत्व सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन में इतने आवश्यक समझे जाते हैं, कि बहुत से संगठन इन्हें प्रमुख मूल्यों अथवा सिद्धांतों के एक वृत्त के रूप में परिभाषित करते हैं, जिनके आधार मानकर संगठन कार्य करते हैं। इस दृष्टिकोण को लागू अथवा कार्यान्वित करने के तरीके फिलिप बी क्रोसबी (Philip B. Crosby), डब्ल्यू एडवर्ड्स डेमिंग (W. Edwards Deming), आर्मंड वी फीगेनबाम (Armand V. Feigenbaum), काओरो इशिकावा (Kaoru Ishikawa), और यूसुफ एम जुरान ( Joseph M. Juran) जैसे गुणवत्ता नेताओं की शिक्षण कार्यों से आते हैं।
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