मानव संसाधन प्रबंधन के निहितार्थ - Human Resource Management Implications

मानव संसाधन प्रबंधन के निहितार्थ - Human Resource Management Implications


मानव संसाधन प्रबंधन के निहितार्थों को समझने के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक है:


1. संगठन मात्र ईंट, सीमेंट आदि से निर्मित भवन अथवा यंत्रों एवं विभिन्न् भण्डारणों का संग्रह नही है। संगठन से अर्थ उसके लोगों अर्थात् मानव संसाधनों से है जो कि अन्य सभी संसाधनों का समन्वय, क्रियान्वयन, निर्देशन एवं प्रबंधन करते हैं।


2. मानव संसाधन प्रबंधन, प्रबंधन के कार्यों एवं सिद्धांतों का संगठन के सदस्यों का प्रबंधन करने में अनुप्रयोग है। इन कार्यों एवं सिद्धांतो का प्रयोग कर्मचारियों के उपार्जन / प्रतिधारण, संभरण, पारिश्रमिक प्रशासन एवं विकास के निर्धारण में होता है।


3. कर्मचारियों / मानव संसाधनों से संबंधित कोई भी निर्णय स्वीकृत होना चाहिए। कर्मचारियों के विभिन्न पक्षों से संबंधित निर्णयों तथा मानव संसाधन प्रबंधन के अन्य निर्णयों में समरूपता होनी चाहिए।


4. निर्णय, संगठन की प्रभावशीलता के पक्ष में होने चाहिए तथा प्रभावशीलता का परिणाम, उपभोक्ताओं/ ग्राहकों उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों / सेवाओं आदि की प्राप्ति के रूप में मिलना चाहिए।


5. मानव संसाधन प्रबंधन का कार्य सिर्फ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रयोग शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन आदि व्यावसायिक एवं गैर व्यावसायिक क्षेत्रों तथा संस्थानों के लिए भी समान रूप से किया जा सकता है।


मानव संसाधन प्रबंधन, वस्तुतः कर्मचारियों के प्रबंधन में व्यवहारवादी दृष्टिकोण का अनुप्रयोग है। मानव संसाधन प्रबंधन की अवधारणा का विकास 1980 के दशक में हुआ है।

उसके पहले से चली आ रही कार्मिक प्रबंधन (Personnel Management) की अवधारणा, सिद्धांतो एवं तकनीकों में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं, जिससे इसके क्षेत्र एवं व्यवहार में भी सुधार की दिशा में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। कार्मिक प्रबंधन की अवधारणा के अंतर्गत मानव को उत्पादन प्रक्रिया में एक उपकरण मात्र की दृष्टि से देखा जाता था, जिसका उपयोग पूंजीपतियों, उद्योगपतियों तथा उद्योगों के लाभ के लिए मनमाने ढंग से किया जाता था। जब उनकी उपयोगिता समाप्त हो जाती थी तो उन्हें सहजता से कार्य मुक्त कर दिया जाता था। तात्पर्य यह है कि उस समय उद्योग में मानव वर्ग शोषण का शिकार था । किन्तु वर्तमान में उद्योगों में मानव तत्व का महत्व दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। संगठन में मानव संसाधनों तथा उनके मानवीय पक्षों को तकनीकी, प्रौद्योगिकी यंत्रों, उपकरणों, एवं विधियों की अपेक्षा अधिक महत्त्व एवं प्राथमिकता दी जाने लगी है। उपक्रमों में मानवीय मूल्यों(human values) की स्थापना के कारण कर्मचारियों के प्रति प्रबंधकों के दृष्टिकोण में भी काफी परिवर्तन हुआ है। फलस्वरूप कार्मिक प्रबंधन व्यवहारवादी मूल्यों (behavioral values) तथा मनोवैज्ञानि एवं समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण का प्रार्दुभाव हुआ है। कर्मचारियों की समस्त समस्याओं का विश्लेषण, वर्तमान में व्यवहारवादी दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर किया जाने लगा है। कार्मिक प्रबंधन की पेशेवर तथा तकनीकी विचारधारा अब दार्शनिक एवं व्यवहारवादी होती जा रही है। इस विचारधारा में मानवीय मूल्यों तथा मानवीय संबंधों (human relations) का समावेश हो चुका है। कार्मिक प्रबंधन का यह बदलता हुआ, आधुनिक स्वरूप ही मानव संसाधन प्रबंधन के नाम से प्रचलित है।