मानव संसाधन नियोजन प्रक्रिया - human resource planning process

मानव संसाधन नियोजन प्रक्रिया - human resource planning process


मानव संसाधन नियोजन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सही कार्य के लिए सही उम्मीदवार सुनिश्चित किया जाता है। किसी भी प्रक्रिया का संचालन करने के लिए, सबसे महत्वपूर्ण कार्य, उक्त प्रक्रिया के संचालन के माध्यम से संपन्न होने वाले संगठनात्मक उद्देश्य को विकसित करना है।


मानव संसाधन नियोजन के माध्यम से संगठन भविष्य के व्यवसाय और पर्यावर्णीय शक्तियों का पूर्वानुमान करता है। मानव संसाधन नियोजन भविष्य की अवधि के लिए जनबल की आवश्यकता का आकलन करती है। यह संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन के लिए आवश्यक पर्याप्त जनशक्ति प्रदान करने का प्रयास करता है। मानव संसाधन नियोजन एक सतत प्रक्रिया है जो मानव संसाधन उद्देश्यों की पहचान से आरम्भ होती है,

मानव संसाधन संसाधनों के विश्लेषण के माध्यम से आगे बढ़ती तथा मानव संसाधन नियोजन के मूल्यांकन पर समाप्त होती है।


मानव संसाधन नियोजन की प्रक्रिया के निम्नलिखित चरण हैं:


1) संगठनात्मक उद्देश्यों एवं योजनाओं का विश्लेषण करना- उत्पादन, विपणन, वित्त, विस्तारीकरण एवं विक्रय जैसे विभिन्न क्षेत्रों के उद्देश्य संगठन में किए जाने वाले कार्यों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। अतः मानव संसाधन नियोजन के उद्देश्यों को संगठनात्मक उद्देश्यों, नीतियों एवं योजनाओं पर आधारित होना चाहिए, अर्थात् सर्वप्रथम संगठन की दिशा का निर्धारण एवं आकलन करने की आवश्यकता होती है। उदहारणस्वरूप सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं या वर्तमान दिशा-निर्देशों का पुनरावलोकन एवं समीक्षा करनी चाहिए जो संगठन की कार्य- प्रणाली एवं नीतियों पर प्रभाव डाल सकते हैं।

साथ ही साथ संगठन की व्यावसायिक प्राथमिकताओं, बजट आवंटन और प्रदर्शन- संकेतकों की समीक्षा करने आदि की भी आवश्यकता होती है।


2) मानव संसाधन नियोजन के उद्देश्यों को निर्धारित करना- किसी भी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण कदम उन उद्देश्यों का निर्धारण होता है जिनके लिए उस प्रक्रिया को अपनाया जाता है। जिस उद्देश्य के लिए कार्यशक्ति की नियोजन किया जा रहा है, उसे उचित प्रकार से 


परिभाषित किया जाना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सही प्रकार की कार्य / पदों


के लिए, व्यक्तियों का सही संख्या में पूर्वानुमान किया गया है। संगठन के विभिन्न विभागों के उद्देश्य भिन्न हो सकते हैं जैसे कि कर्मचारियों की मांग विपणन, वित्त, उत्पादन, मानव संसाधन आदि विभागों में उनकी भूमिकाओंएवं कार्यों के आधार पर भिन्न हो सकती है।


3) वर्तमान कार्यबल सूची (इन्वेंटरी) का विश्लेषण- अगले चरण में किसी विशेष नौकरी / पद के लिए आवश्यक उनके, क्षमता, कौशल, आदि के संदार्भ में कर्मचारियों के बारे में संग्रहीत जानकारी के माध्यम से संगठन में वर्तमान जनशक्ति का विश्लेषण करना है। साथ ही, भावी रिक्तियों का अनुमान लगाया जा सकता है जिससे दोनों, आंतरिक (वर्तमान संगठनात्मक कर्मचारी) तथा बाह्य ( बाहर के उम्मीदवारों के भर्ती) स्रोतों के उपयोग से मानवशक्ति की योजना बनाई जा सके। इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया जाता है कि निकट भविष्य में होने वाली किसी भी रिक्ति को भरने के लिए प्रतिभाओं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।


4) मांग पूर्वानुमान - यह किसी संगठन में मानव संसाधनों की मांग का पूर्वानुमान करने की प्रक्रिया है। मांग पूर्वानुमान किसी संगठन की भविष्य की मानव संसाधन आवश्यकताओं का मात्रा और गुणवत्ता के संदर्भ में निर्धारित करने की एक प्रक्रिया है। यह उत्पादन के वांछित स्तर को प्राप्त करने के लिए संगठन के भविष्य के कर्मियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है। भविष्य के मानव संसाधन की आवश्यकताओं का संगठन की वर्तमान मानव संसाधन स्थिति और संगठनात्मक योजनाओं के विश्लेषण की सहायता से अनुमान लगाया जा सकता है। वार्षिक आधार पर, प्रत्येक महत्वपूर्ण स्तर एवं प्रकार के लिए यह विश्लेषण करना आवश्यक है।


5) आपूर्ति पूर्वानुमान आपूर्ति पूर्वानुमान - मानव संसाधनों के आकलन का दूसरा पक्ष है। वर्तमान संसाधनों के विश्लेषण और संगठन में मानव संसाधनों की भविष्य में उपलब्धता को देखते हुए यह मानवशक्ति की आपूर्ति के अनुमान संबंधित है।

यह मानव संसाधनों के भविष्य के स्रोतों का अनुमान लगाता है, जिनकी संगठन के भीतर एवं बाहर से उपलब्ध होने की संभावना है। आंतरिक स्रोतों में पदोन्नति, स्थानांतरण, कार्य विस्तारीकरण एव कार्य- संवर्धन सम्मिलित हैं, जबकि बाह्य स्रोतों में विज्ञापन, रोजगार एक्सचेंज, कंसल्टेंसी सेवाएँ, श्रम ठेकेदार, महाविद्यालय, विश्वविद्यालयों आदि के माध्यम से नए उम्मीदवारों की भर्ती सम्मिलित है जो संगठन में अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।


6) मांग एवं आपूर्ति के अंतर का विश्लेषण- मांग और आपूर्ति के पूर्वानुमान के पश्चात्, जनशक्ति के अंतर का मूल्यांकन आसानी से किया जा सकता है। यदि मांग मानव संसाधनों की आपूर्ति से अधिक है, तो इसका अर्थ है कि मानव संसाधनों की कमी है, अतः नए उम्मीदवारों की भर्ती आवश्यक है।


जबकि, यदि मांग आपूर्ति से कम है तो मानव संसाधनों के अधिशेष / आधिक्य की समस्या उत्पन्न होती है, अतैव कर्मचारियों को अवसान, निलंबन, निष्कासन, सेवानिवृत्ति, छंटनी, स्थानांतरण आदि के माध्यम से पदच्युत करना आवश्यक हो जाता है।


7) कार्यवाही योजना / रोजगार योजना- मांग एवं आपूर्ति के अंतर के मूल्यांकन के आधार पर कार्यवाही करने के लिए संगठन तैयार रहता है। यह वस्तुतः मानव संसाधन नियोजन का अंतिम चरण है जो कि मानव संसाधनों के अधिशेष एवं कमी की समस्या के निवारण से सम्बंधित है। इसके अंतर्गत मानव संसाधनों के अधिशेष एवं कमी की समस्या का निवारण विभिन्न मानव संसाधन गतिविधियों के माध्यम से क्रियान्वित होता है। मानव संसाधन नियोजन के प्रतिफल को कार्यवाही के रूप में निष्पादित करने के लिए आवश्यक प्रमुख गतिविधियां भर्ती, चयन, नियुक्ति, प्रशिक्षण और विकास, समाजीकरण आदि हैं।

मानव संसाधनों की कमी की परिस्थिति में संगठन भर्ती, प्रशिक्षण, अन्तर्विभागीय अंतरण गतिविधयां अपना सकता है, जबकि अधिशेष के मामले में, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजनाओं, पुनरीक्षण, स्थानांतरण, छंटनी आदि गतिविधियों को संपन्न कर सकता है।


8) जनशक्ति नियोजन की समीक्षा / मूल्यांकन एवं नियंत्रण- अंत में, मानव संसाधन नियोजन प्रक्रिया की प्रभावशीलता का मूल्यांकन एवं समीक्षा किया जाना आवश्यक है। यहां मानव संसाधन नियोजन प्रक्रिया की तुलना विभिन्न कार्यों / पदों के लिए विभिन्न कर्मचारियों की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए अपने वास्तविक कार्यान्वयन से की जाती है।


इस स्तर पर, संगठन को नियोजन की सफलता का मूल्यांकन करता है तथा इसमें किसी भी प्रकार की कमी या विसंगति, यदि कोई हो तो, उसे सुधारने एवं नियंत्रित करने का प्रयास करता है।


इस प्रकार, मानव संसाधन नियोजन एक सतत प्रक्रिया है जो संगठनात्मक उद्देश्यों के विश्लेषण से आरम्भ होकर नियोजन प्रक्रिया के मूल्यांकन एवं नियंत्रण के साथ समाप्त होती है।