अवैधानिक प्रतिफल एवं उद्देश्य - Illegal considerations and motives
अवैधानिक प्रतिफल एवं उद्देश्य - Illegal considerations and motives
भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 23 के अनुसार, प्रत्येक ठहराव में निम्नलिखित दशाओं को छोड़कर प्रतिफल एवं उद्देश्य वैधानिक माना जाता है:
i. यदि वह राजनियम द्वारा वर्जित हो यदि कोई भी कार्य राजनियम द्वारा वर्जित हो तथा अनुबंध का वचन अथवा वचन का प्रतिफल अथवा उद्देश्य राजनियम द्वारा वर्जित हो, तो इस प्रकार से हुआ ठहराव अवैध होगा।
ii. अन्य अधिनियम के आदेशों को निष्फल करना यदि किसी अनुबंध का प्रतिफल अथवा उद्देश्य ऐसा है कि उसकी अनुमति दिये जाने पर वह किसी अन्य राजनियम के आदेशों को निष्फल कर देगा, तो ऐसी स्थिति में प्रतिफल अथवा उद्देश्य अवैधानिक मने जायेंगे और इस प्रकार का अनुबंध व्यर्थ होगा।
iii. कपटमय कार्य - यदि किसी अनुबंध का वचन अथवा प्रतिफल कपटमय हो या कपटमय तरीके से प्राप्त की गई हो तो ऐसा ठहराव व्यर्थनीय होगा।
iv. न्यायालय की दृष्टि में अनैतिक ऐसा ठहराव जिससे व्यक्तियों के बीच अनैतिक संबंधों को प्रोत्साहन मिलता है, अनैतिक कहलाता है। जैसे वेश्यागमन। साथ ही कोई भी ऐसा कार्य जो न्यायालय की दृष्टि में अनैतिक है।
V.दुसरे व्यक्ति के शरीर अथवा संपत्ति को क्षति पहुँचाने वाला कार्य किसी भी ऐसे कार्य का ठहराव जिससे दुसरे व्यक्ति के शरीर अथवा संपत्ति की क्षति हो, व्यर्थ होता है।
vi. न्यायालय की दृष्टि में लोकनीति के विरुद्ध कार्य ऐसा ठहराव जो सामान्य हित अथवा देश के विरुद्ध हो, लोकनीति के विरुद्ध कहलाते हैं। लोक नीति के विरुद्ध होने के आधार पर भी ठहराव व्यर्थ हो सकते हैं।
वार्तालाप में शामिल हों