गर्भित शर्तें - implied conditions
गर्भित शर्तें - implied conditions
माल के विक्रय के अनुबंध में निम्नलिखित गर्भित शर्तें होती है :
1. माल के अधिकार संबंधी शर्ते :- वस्तु विक्रय अधिनियम की धारा 14 (2) के अनुसार प्रत्येक विक्रय अनुबंध में जब तक कि अनुबंध की परिस्थितियों से कोई विपरीत आशय न प्रकट होता हो, यह गर्भिय शर्त रहती है कि विक्रेता की -
अ) विक्रय की दशाम में माल बेचने का अधिकार प्राप्त है तथा
आ) विक्रय के ठहराव की दशा में, स्वामित्व के हस्तांतरण के समय माल के बेचने का अधिकार प्राप्त है।
2. वर्णन द्वारा विक्रय के संबंध में :- वस्तु विक्रय अधिनियम की धारा 15 के अनुसार जहाँ वर्णन द्वारा विक्रय अनुबंध हुआ हो, वहाँ पर गर्भिय शर्त है कि
(अ) माल वर्णन से मेल खायेगा तथा
(आ) यदि माल का विक्रय नमूने तथा वर्णन दोनों के द्वारा किया गया हो, तो केवल यह पर्याप्त नहीं है कि अधिकांश माल नमूने से मेल खाता है अर्थात माल का नमूने तथा वर्णन दोनों से मेल खाना परम आवश्यक है।
3. माल की किस्म अथवा उपयुक्ता के संबंध में :- वस्तु विक्रय अधिनियम की धारा 16 के अनुसार, सामान्यतः किसी भी विक्रय अनुबंध में ऐसी कोई भी गर्भित शर्त अथवा आश्वासन नहीं रहता कि माल किसी विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ति के लिए उपयुक्त होगा जिसके लिए वह खरीदा जा रहा है। इसमें क्रेता की सावधानी का नियम लागु होता है।
4. माल की व्यापार योग्यता के संबंध में वस्तु विक्रय अधिनियम की धारा 16(2) के अनुसार जहाँ माल के वर्णन के अधार पर ऐसे विक्रेता से क्रय किया जाय जो उसी प्रकार के माल को बेचता है तो ऐसी दशा में यह गर्भित शर्त है कि माल व्यापार योग्य होगा, किन्तु यदि विक्रेता ने माल की जाँच की ये तो ऐसे दोषी के लिए भी गर्भित शर्त नहीं होगी जो साधारण जाँच से पता लग जाने लायक हो।
5. व्यापार की रीति के संबंध में :- वस्तु विक्रय अधिनियम की धारा 16 (3) के अनुसार व्यापार की रीति के अनुसार भी माल के गुण, उपयुक्तता अथवा किसी विशेष आशय के लिए गर्भित शर्त हो सकती है।
6. नमूने द्वारा विक्रय के संबंध में : वस्तु विक्रय अधिनियम की धारा 17 के अनुसार-
(अ) अधिकांश माल नमूने के समान होगा;
(आ) क्रेता को नमूने के साथ तुलना करने का उचित अवसर प्राप्त होगा; इ) माल में ऐसा कोई दोष नहीं होगा जिससे वह व्यापार योग्य न रहे और जो नमूने की उचित जाँच के बाद भी ज्ञान न थे सके।
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