विपणन अनुसंधान में दृष्टिकोण माप का महत्व - Importance of Attitude Measurement in Marketing Research

विपणन अनुसंधान में दृष्टिकोण माप का महत्व - Importance of Attitude Measurement in Marketing Research


विपणन अनुसंधान में उपरोक्त दृष्टिकोण तथा उसका माप सदैव से विपणनकर्ताओं के लिए उच्च प्राथमिकता का मुद्दा रहा है विपणन कार्यक्रम विज्ञापन, बाजार खंडकरण आदि में उपभोक्ता विपणन अनुसंधान दृष्टिकोण की अहं भूमिका होती है विपणन अनुसंधान में दृष्टिकोण माप के महत्व को निम्न बिन्दुओं में स्पष्ट किया जा सकता है-


(i) विपणन अधिशासियों के विपणन कार्यक्रम उनके उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की दृष्टिकोण के अवबोधन पर आधारित होते हैं। अधिशासी उपभोक्ताओं में किस प्रकार की दृष्टिकोण देखना चाहते हैं तथा बाद में ये उसे किस प्रकार परिवर्तित कर सकते है पर ही अपने विपणन कार्यक्रम तैयार करते हैं।


(ii) निश्चित बाजार वर्ग में उत्पाद की प्रस्तुति विभिन्न बाजार खंडों में उसी प्रकार के उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की मनोवृत्ति व दृष्टिकोण के अनुमान पर आधारित होती है।


(iii) बाजार खडीकरण की अधिकांश व्यूहरचना के प्रति मनोवृत्ति व दृष्टिकोण खडीकरण पर आधारित होती है।


(iv) विज्ञापन की प्रभावशीलता को मापने के वृद्धित प्रयासों में मनोवृत्ति व दृष्टिकोण माप की भी अह भूमिका होती है। विज्ञापन की प्रभावशीलता को मापने हेतु मनोवृत्ति व दृष्टिकोण में परिवर्तनों को नापना आवश्यक होता है जो विज्ञापन के कारण हो सकता है।


(v) मनोवृत्ति व दृष्टिकोण का ज्ञान एक विपणनकर्ता को उसके उत्पादों तथा विज्ञापन संदेश के बारे में उपभोक्ता प्रतिक्रिया का अनुमान लगाने में सहायता करता है।


उपरोक्त बिन्दु इस बात को स्पष्ट करते हैं कि विपणन अनुसंधान में मनोवृत्ति व दृष्टिकोण माप का महत्वपूर्ण स्थान है तथा एक विपणनकर्ता को इस ओर पृथक रूप से ध्यान देना चाहिए।



मनोवृत्ति माप तकनीके


उपभोक्ता मनोवृत्ति व दृष्टिकोण को मापना अति जटिल कार्य है।


पेसिमीयर तथा विल्के का मत है कि उपभोक्ता मनोवृत्ति को समझने तथा व्यवहार का अनुमान लगाने हेतु अनेक मॉडलों का विकास किया जा चुका है, लेकिन उनमें अभी तक कोई पूर्ण संतुष्टि प्रदान नहीं कर सका है। वास्तव में उपभोक्ता का समय मनोवृत्ति को जानना और उसे स्पष्ट रूप से समझना


अत्यधिक जटिल है जिसके निम्न कारण हैं


(i) दृष्टिकोण एक अमूर्त तथ्य है। एक व्यक्ति बरगर या मैगी के बारे में क्या सोच रहा है. इसका केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है।


(ii) दृष्टिकोण अनेक घटकों से प्रभावित होती है और निस्तर परिवर्तित होती रहती है।


(iii) दृष्टिकोण के किसी सार्वभौमिक माप या पैमाने का आज तक विकास नहीं हुआ है।


(iv) अत्यधिक व्यक्तिगत भिन्नताओं के कारण दृष्टिकोण का यथार्थ माप समय नही है।