स्थिर एवं परिवर्तनशील लागतों के अन्तर का मूल्य निर्धारण में महत्व - Importance of difference between fixed and variable costs in pricing

स्थिर एवं परिवर्तनशील लागतों के अन्तर का मूल्य निर्धारण में महत्व - Importance of difference between fixed and variable costs in pricing


अल्पकालीन मूल्य निर्धारण में स्थाई एवं परिवर्तनशील लागतों का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि निम्न मूल्य सम्बन्धी निर्णय इन लागतों में अन्तर करके सही तरीके से लिये जा सकते हैं :


1. अल्पकाल के लिये उत्पादन चालू रखें या बन्द करें यदि फर्म को कम से कम कुल परिवर्तनशील लागत प्राप्त हो रही है तो फर्म उत्पादन जारी रखेगी अन्यथा फर्म के लिये उत्पादन बन्द करना शेश्ठ है।


2. नीचे मूल्य पर प्रस्ताव को स्वीकार किया जाय अथवा नीचे मूल्य पर टेण्डर प्रस्तुत किया जाय या नहीं कभी-कभी किसी फर्म की सामान्य उत्पादन एवं विक्रय क्षमता निश्क्रिय रहती है।

ऐसी स्थिति में यह समस्या सामने आती है कि क्या वर्तमान क्षमता को बढ़ाना उपयुक्त होगा, जबकि बढा हुआ उत्पादन नीचे मूल्य पर ही बेचा जा सकता है। नीचा मूल्य क्या हो?


यह परिवर्तनशील लागत पर निर्भर है। फर्म कम से कम नीचा मूल्य वह रखेगी जिस पर उसे परिवर्तनशील लागत से कुछ अधिक अशदान (Contribution) के रूप में प्राप्त होता हो । 


3. निर्यात हेतू उत्पादों का मूल्य निर्धारित करने के लिये संस्था अपनी परिवर्तनशील तथा स्थिर लागत देशी बाजार से वसूल करके निर्यात हेतू केवल परिवर्तनशील लागत एवं लाभ को ही मूल्य का आधार निर्धारित कर सकती है।