विपणन अनुसंधान का महत्व - Importance of Marketing Research

विपणन अनुसंधान का महत्व - Importance of Marketing Research


वर्तमान समय में विपणन अनुसंधान के अभाव में कोई भी व्यावसायिक संस्था पूर्ण रूप से अपना कार्य नही कर सकती। क्रेता-बाजार की स्थिति ने प्रत्येक उत्पादक या निर्माता के लिए यह आवश्यक कर दिया है कि वह स्वयं को उपभोक्ताओं / ग्राहकों की बदलती हुई आवश्यकताओं, रुचियों, आदतों आदि से अवगत रखे यह कार्य विपणन अनुसंधान द्वारा ही सम्भव है विपणन अनुसंधान के अभाव में ग्राहकों से संबंधित सूचनाओं की प्राप्ति सम्भव नही है, क्योंकि बृहत् पैमाने पर उत्पादन किये जाने के कारण उत्पादक और उपभोक्ता के मध्य प्रत्यक्ष संपर्क नही है। इन दोनों के मध्य मध्यस्थों की एक लम्बी श्रृंखला विद्यमान है। उत्पादक और अंतिम उपभोक्ता के मध्य प्रत्यक्ष संपर्क / संबंध के अभाव में विपणन अनुसंधान के महत्व में वृद्धि की है। अन्य शब्दों में विपणन अनुसंधान के द्वारा वितरण लागत विश्लेषण एवं श्रम कार्यकुशलता एवं क्षमतासंबंधी अनेक जटिल समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। इतना ही नहीं, अनुसंधान द्वारा उपभोक्ताओं द्वारा चाही गयी वस्तुओं एवं सेवाओं की मांग एवं पूर्ति की सर्वोत्तम विधियों का निर्धारण किया जा सकता है।


यद्यपि विगत कुछ वर्षों में विपणन अनुसंधान पर व्यय की जाने वाली राशि में निरंतर वृद्धि हुई है, फिर भी आज अधिकाश संस्थाओं में (विशेषत भारतीय सदर्भ) में विपणन अनुसंधान व्यय बहुत ही कम है और बहुत ही कम व्यावसायिक संस्थाए विपणन व्यवस्था में सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। फिर भी विकसित राष्ट्रों (अमेरिका, ब्रिटेन, फास, स्विटजरलैंड, पजर्मनी आदि) की तुलना में विकासशील राष्ट्रों में विपणन अनुसंधान पर व्यय की जाने वाली राशि लगभग न के बराबर है। सार रूप में विपणन अनुसंधान की अपेक्षा के निम्न कारण रहे हैं:


(i) व्यवसायिक संस्थाओं द्वारा उत्पादन संबंधी समस्याओं की तुलना में विपणन संबंधी समस्याए अत्याधिक जटिल महसूस की गई है और प्रत्यक्ष रूप से बहुत कम समझी गयी है।


(ii) विपणन कार्य क्षमता के ठोस एवं व्यापक प्रमापों का अभाव रहा है।


(iii) उपरोक्त बात के परिणामस्वरुप आधिशासियों का एक मात्र लक्ष्य उत्पादन रहा है न कि विपणन अन्य शब्दों में, इस बात को बहुत कम सोचा गया है कि T किसी भी वस्तु की मांग स्थिर नहीं होती, अपितु परिवर्तनशील होती है इच्छा क्रय शक्ति, आदत स्वभाव आदि में परिवर्तन से मांग की बात को अधिशासियों ने उपेक्षा की नजर से देखा है।


विपणन अनुसधान के द्वारा उपरोक्त सभी तथ्यों को शांत किया जा सकता है। इसके द्वारा नाग एवं पूर्ति में समन्वय स्थापित किया जा सकता है तथा विपणन से संबंधित सभी विषयों एवं समस्याओं के संदर्भ में आवश्यक सूचनाएं प्राप्त की जा सकती है।

संक्षेप में विपणन अनुसंधान के महत्व एवं लामो को निम्नलिखित बिदुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है


(क) उपभोक्ताओं को संतुष्टि विपणन अनुसंधान के अंतर्गत उपभोक्ताओं की आदतों, रुचियों प्राथमिकाओं एवं आवश्यकताओं का अध्ययन किया जाता है। इस अध्ययन के आधार पर तथ्यों का संकलन, विश्लेषण एवं निकर्ष ज्ञात करके यही वस्तुएं उपभोक्ताओं की इच्छानुसार उत्पादन करके उनको अधिकतम संतुष्टि उपलब्ध करायी जा सकती है।


(ख) विपणन निर्णयों के जोखिम में कमी विपणन अनुसंधान के द्वारा विपणन निर्णय मे सम्मिलित जोखिम एवं अनिश्चितता को बहुत कम किया जा सकता है चूँकि अधिकांश महत्वपूर्ण विपणन निर्णय उन व्यक्तियों द्वारा लिये जाते है जो बाजार से बहुत दूर होते हैं तथा जिनको ग्राहकों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी प्रकार का संपर्क नही होता है। अत ऐस निर्णय पर्याप्त सूचनाओं के उपलब्ध होने पर ही लिये जा सकते है।

विपणन अनुसंधान की सहायता से अधिशासियों को निर्णयन हेतु पर्याप्त एवं सही सूचना उपलब्ध होने के कारण जोखिम एवं अनिश्चितता की संभावना बहुत कम हो जाती है। विपणन अनुसंधान से प्राप्त किये गये तथ्यों के आधार पर नियोजन विक्रय संवर्द्धन, विज्ञापन, विक्रय आदि का कार्य सफलतापूर्वक किया जा सकता है। उदाहरण के लिए एक नये उत्पाद को प्रस्तुत करना विपणन प्रबंध का प्राथमिक दायित्व है विपणन अधिशासी इस संबंध में अपेक्षाकृत अच्छा निर्णय ले सकता है यदि उसके पास उपभोक्त प्राथमिकता, वैकल्पिक पैकिंग सामग्री का निष्पादन, प्रतिस्पर्धा उत्पादों का मूल्य, विभिन्न प्रकार के विक्रय सवर्द्धन प्रारूपों के प्रति व्यापारियों की प्रतिक्रिया आदि से संबंधित संगत सूचनाएं उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में आवश्यक सूचनाएं या तो प्रत्यक्ष अवलोकन द्वारा उपलब्ध की जा सकती है या विपणन प्रबंधक का विगत का अनुभव किसी निर्णय तक पहुंचने के लिए एक आधार प्रस्तुत कर सकता है। इस संदर्भ में प्रत्यक्ष अवलोकन या सामन्य अनुभव पर्याप्त नही होता है, अपितु पर्याप्त सूचनाओं की आवश्यकता होती है जो कि विपणन अनुसंधान द्वारा ही सम्भव होती है।


विपणन अनुसंधान निम्न दो प्रकार से विपणन समस्याओं में सम्मिलित जोखिम को कम कर सकता है-


(i) विपणन प्रबंधक को निर्णय लेने हेतु आवश्यक चालू सूचनाएं उपलब्ध कराके ।


(ii) विपणन प्रक्रिया के बारे समन्वित ज्ञान या विचार उपलब्ध कराके विपणन प्रबंधक विपणन अनुसंधान से प्राप्त सूचनाओं, तथ्यों, समंकों आदि का विश्लेषण करके जो निर्णय लेता है, वह अधिक व्यावहारिक तथा प्रभावी होता है फलतः उसके असफल होने की सम्भावनाएं लगभग शून्य हो जाती हैं।


विपणन अनुसंधान उपयुक्त विपणन कार्यक्रम के विकास में सहायता करता है तथा निम्नलिखित के संदर्भ मे निर्णयन हेतु वांछित सूचनाएं प्रदान करता है


(i) खण्डकरण निर्णय :


• कौन सा खण्ड लक्ष्य होना चाहिए?


• प्रत्येक खण्ड के लिए कौन से लाभ सर्वाधिक महत्वपूर्ण है?


• कौन से भौगोलिक क्षेत्र में प्रवेश किया जाना चाहिए?


(ii) उत्पाद निर्णय


• उत्पाद में किन विशेषताओं को सम्मिलित किया जाना चाहिए?


• उत्पाद को किस प्रकार प्रस्तुत या स्थापित किया जाना चाहिए?


• उपभोक्ताओं द्वारा किस प्रकार के पैकेज को प्राथमिकता प्रदान की जाती है?


(iii) वितरण एवं संवर्द्धन निर्णय


• किस प्रकार के फुटकर विक्रेता या मध्यस्य प्रयोग किया जाना चाहिए?


• मूल्य घटाने की नीति क्या होनी चाहिए?


• क्या सीमित वितरण वाहिका का उपयोग किया जाना चाहिए या विस्तृत का?


(iv) विज्ञापन वितरण एवं संवर्द्धन निर्णय


• विज्ञापन में किस अपील का प्रयोग किया जाना चाहिए?


• किस मध्यम के द्वारा विज्ञान किया जाना चाहिए?


• विज्ञापन बजट कितना होना चाहिए?


• विक्रय संवर्द्धन कब प्रयोग किया जाना चाहिए या किस रूप मे?


(v) वैयक्तिक विक्रय निर्णय


• किस प्रकार के ग्राहक सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है?


• कितने विक्रय कर्ताओं की आवश्यकता है?


(vi) कीमत निर्णय:


• कितना मूल्य वसूल किया जाना चाहिए?


• वर्ष भर में कितना विक्रय प्रस्तुत किया जाना चाहिए?


• प्रतिस्पर्धायों द्वारा कीमत बदलने की दशा में किस प्रकार प्रत्युत्तर दिया जाना चाहिए।


(ग) उत्पादन में विपणन अनुसंधान का महत्त्व विपणन अनुसंधान का उत्पादन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान होता है इसके द्वारा उत्पादन अधिक या न्यून उत्पादन की स्थिति को समाप्त किया जा सकता है। अन्य शब्दों में, विपणन अनुसंधान के द्वारा विक्रय क्षेत्र, सीमा, नियम, उपभोक्ता रुधि प्रतियोगिता की स्थिति आदि तथ्यों को ज्ञात करके सही उत्पादन की मात्रा एवं विक्रय का मूल्य निश्चित किया जा सकता है। इस प्रकार उत्पादन एवं विक्रय का क्रम निरंतर जारी रह सकता है।


(घ) वितरण एवं विपणन अनुसंधान विपणन अनुसंधान वितरण क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अंतर्गत स्थिति का व्यापक विश्लेषण करके तदानुसार वितरण व्यवस्था की जा सकती है।

अन्य शब्दों में इसके द्वारा मांग के अनुसार ही वितरण व्यवस्था का भी प्रभावी प्रबंध किया जा सकता है कि वितरण के कौन-कौन से माध्यम उपलब्ध है तथा संस्था के उत्पाद के लिए कौन सा माध्यम सर्वोत्तम हो सकता है। सार रूप में विपणन अनुसंधान आज लगभग सभी व्यावसायिक संस्थाओं के लिए एक अनिवार्यता सा बन गया है बढ़ती हुई व्यावासायिक जटिलता, बड़े पैमाने पर उत्पादन, क्रेता बाजार उपभोक्ताओं की रुचियों एवं प्राथमिकताओं में तेजी से आते हुए परिवर्तन, विपणन जोखिम एवं अनिश्चितता बाजार की गतिशीलता, ग्लोबल बाजार आदि ने विपणन अनुसंधान के महत्व को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है। वास्तव में, विपणन अनुसंधान के पास एक ऐसा हथियार है जिसके द्वारा विपणन संबंधी जटिल समस्याओं को आसानी से हल किया जा सकता है आज सभी व्यवसायों के लिए निर्णय की असफलता से होने वाली गंभीरता को देखते हुए बाजार संबंधी सभी सूचनाओं की प्राप्ति, विश्लेषण एवं सकलन आवश्यक हो गया है। यह कार्य विपणन अनुसंधान द्वारा आसानी से किया जा सकता है।