लघु उद्योग व कुटीर उद्योग का महत्व - Importance of small scale industries and cottage industries
लघु उद्योग व कुटीर उद्योग का महत्व - Importance of small scale industries and cottage industries
लघु उद्योग एवं कुटीर उद्योग का भारतीय में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। प्राचीन काल से ही भारत के लघु व कुटीर उद्योगो में उतम गुणवता वाली वस्तुओं का उत्पादन होता रहा है। यद्यपि ब्रिटिश शासन में अन्य उद्योगों के समान इस क्षेत्र का भी भारी ह्रास हुआ है। सरकार ने समय समय पर लघु तथा कुटीर उद्योगों की परिभाषा की है। लघु उद्योग वे उद्योग हैं जो छोटे पैमाने पर किए जाते हैं तथा सामान्य रूप से मजदूरों व श्रमिकों की सहायता से मुख्य धंधे के रूप में चलाए जाते हैं। वे उद्योग जिनमें 10 से 50 लोग मजदूरी के बदले में काम करते हो, लघु उद्योग के अंतर्गत आते है। लघु उद्योग एक औद्योगिक उपक्रम है, जिसमें निवेश संयंत्र एवं मशीनरी में नियत परिसंपत्तित होती है। यह निवेश सीमा सरकार द्वारा समय-समय पर बदलती रहती है। लघु उद्योग में माल बाहर से मंगाया जाता है और तकनीकी कुशलता को भी बाहर से प्राप्त किया जा सकता है।
लघु उद्योग इकाई ऐसा औद्योगिक उपक्रम है जहां संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश 1 करोड़ रू0 से अधिक न हो, किंतु कुछ मद जैसे कि हौजरी, हस्त औजार दवाइयों व औषधि, लेखन सामग्री मदें और खेलकूद का सामान आदि में निवेश की सीमा 5 करोड़ तक थी। लघु उद्योग श्रेणी को नया नाम लघु उद्यम दिया गया है।
मझौले उद्योग ऐसी इकाई जहा संयंत्र और मशीनरी में निवेश लघु उद्योग की सीमा से अधिक किंतु 10 करोड़ रू तक हो, मझौला उद्यम कहा जाता है। संशोधित परिभाषा 2 अक्टूबर, 2006 से प्रभावी छोटे, लघु एवं मझौले उपक्रम विकास अधिनियम 2006 उद्यमों के लिए तीन स्तरों अर्थात् छोटे, लघु एवं मझौले के एकीकरण के लिए अपनी तरह की पहली कानूनी रूपरेखा विहित करता है। संशोधित परिभाषा के अंतर्गत उद्यमों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभक्त किया गया है, जैसे
• विनिर्माण
• सेवाए
इन दोनों श्रेणियों को इसके अतिरिक्त संयंत्र एवं मशीनों में निवेश अथवा उपस्करों के आधार पर छोटे, लघु एवं मझौले उद्यमों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
विनिर्माण उद्यम वस्तुओं का उत्पादन, संसाधन अथवा संरक्षण करने वाले उद्यम विनिर्माण उद्यम के अंतर्गत आते है जो निम्नलिखित है-
छोटे उद्यम:- छोटे उद्यम ऐसे उद्यम है जहां संयंत्र व मशीनरी में मूल निवेश 25 लाख रु. से अधिक न हो।
लघु उद्योग:- लघु उद्योग ऐसे उद्यम है जहां संयंत्र व मशीनरी में मूल निवेश 25 लाख रू. से अधिक हो किंतु 5 करोड़ रू0 से अधिक न हो।
मझौला उद्यम- मझौले उद्यम ऐसे उद्यम है जहां संयंत्र व मशीनरी में मूल निवेश 5 करोड़ रू० से अधिक किंतु 10 करोड़ रू0 से अधिक न हो। सेवा उद्यम सेवाएं प्रदान करने वाले अथवा सेवा करने वाले उद्यम जहां उपकरणों में।
निवेश निम्नानुसार हो छोटे उद्योग:-जहा सयंत्र व मशीनरी में मूल निवेश 10 लाख रू. से अधिक न हो।
लघु उद्योग:- जहां संयंत्र व मशीनरी में मूल निवेश 10 लाख रु. से अधिक हो किंतु 2 करोड रू. से अधिक न हो।
मझौला उद्यम - ऐसा उद्यम है जहां संयंत्र एवं मशीनरी में मूल निवेश 2 करोड़ से अधिक हो, किंतु 5 करोड़ रु से अधिक न हो।
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