प्रशिक्षण का महत्त्व- importance of training

प्रशिक्षण का महत्त्व- importance of training


प्रशिक्षण मानव संसाधन विकास का सार है (राव, 1991)। इसे एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है जो ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करता है कि लोगों को स्वयं और उनके जीवन से सर्वोत्तम प्राप्त करा सके। विकास एक कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है। जैसे-जैसे लोग खुद को और अपनी दिशाओं को विकसित करते हैं, नई समस्याएं और मुद्दे सामने आते हैं जिससे लोगों को बदलती आवश्यकताएं, आकांक्षाएं और समस्याओं का समाधान करने के लिए नई दक्षता विकसित करने की आवश्यकता होती है। संगठन के स्तर पर मानव संसाधन विकास का लक्ष्य आम तौर पर, संगठन की उत्पादकता, लाभप्रदता और विकास के उच्च स्तर को सुनिश्चित करने के लिए सक्षम और अभिप्रेरित लोगों की प्राप्ति है। संगठन व्यक्तिगत रूप से या समूहों में कर्मचारियों के बीच दक्षता, संस्कृति और प्रतिबद्धता के विकास की दिशा में अपने मानव संसाधन विकास प्रयासों का निर्देशन करता है।

सक्षम और प्रतिबद्ध कर्मचारियों के अभाव में संगठन अपेक्षित परिणाम नहीं पा सकता है, भले ही उसके पास उत्कृष्ट तकनीकी और अन्य संसाधनों के आधार हों।


मानव संसाधन विकास, कर्मचारियों के प्रदर्शन सुधार और / या व्यक्तिगत विकास की संभावना के दृष्टिकोण से एक नियोक्ता द्वारा निर्धारित समय के भीतर प्रदान किए गए सीखने के अनुभवों का एक व्यवस्थित कार्यक्रम है (नाडलर,1970) । मानव संसाधन विकास के अंतर्गत मुखतः तीन गतिविधियां हैं: प्रशिक्षण, शिक्षा और विकास जो ( नाडलर, 1970); प्रशिक्षण का परिणाम अधिगम है जो कि कर्मचारी की वर्तमान नौकरी पर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रशिक्षण पर केंद्रित है; शिक्षा भविष्य की नौकरी के लिए अधिगम पर केंद्रित है; और विकास से तात्पर्य उस अधिगम से है जो किसी विशेष नौकरी पर केंद्रित नहीं है बल्कि पूरे संगठन पर केंद्रित है।


मानव संसाधन प्रबंधन का महत्व बहुत हद तक मानव संसाधन विकास पर निर्भर करता है। प्रशिक्षण मानव संसाधन विकास की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है। जैसा कि स्पष्ट है, किसी भी संगठन ऐसा उम्मीदवार को ऐसा उम्मेदवार मिलना कठिन है जो नौकरी और संगठनात्मक आवश्यकताओं के साथ पूरी तरह से मेल खाता हो। इसलिए, कर्मचारियों को विकसित करने के लिए प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है और वह उसे नौकरी के लिए उपयुक्त बनाते हैं। नौकरी और संगठनात्मक आवश्यकता स्थिर नहीं हैं तथा तकनीकी उन्नति एवं कुल गुणवत्ता और उत्पादकता प्रबंधन की जागरूकता में परिवर्तन को देखते हुए वह समय-समय पर परिवर्तित होते हैं। कुल गुणवत्ता एवं उत्पादकता प्रबंधन के उद्देश्यों को प्रशिक्षण के माध्यम से हासिल किया जा सकता है क्योंकि प्रशिक्षण मानव कौशल और दक्षता को विकसित करता है। प्रशिक्षित कर्मचारी एक संगठन के लिए मूल्यवान संपत्ति होते हैं। संगठनात्मक दक्षता, उत्पादकता, प्रगति और विकास, प्रशिक्षण पर निर्भर करता है। प्रशिक्षण के जरिए व्यवहारिकता, स्थिरता और विकास जैसे संगठनात्मक उद्देश्यों को भी हासिल किया जा सकता है। प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रबंधन नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण अंग है।