माल का स्वामित्व हस्तांतरण होने की स्थिति में - In case of transfer of ownership of goods

माल का स्वामित्व हस्तांतरण होने की स्थिति में - In case of transfer of ownership of goods


I. माल पर ग्रहणाधिकार अथवा विशेषाधिकार ग्रहणाधिकार से आशय माल का मूल्य प्राप्त करने तक उसे अपने पास रोके रखने से है। अदत्त विक्रेता जिसके अधिकार में माल हो, उस समय तक माल को अपने पास रख सकता है जब तक कि उसे मूल्य चुकाया न जाय अथवा प्रस्तुत न किया जाय। अदत्त विक्रेता अपने ग्रहणाधिकार का प्रयोग उस समय भी कर सकता है जब कि उसके पास माल पर अधिकार क्रेता के प्रतिनिधि अथवा निक्षेपगृहीता के रूप में हो।


II. माल की रास्ते में रोकने का अधिकार वस्तु विक्रय अधिनियम की धारा 50 के अनुसार, यदि माल का क्रेता दिवालिया हो गया हो तो अदत्त विक्रेता जिसके अधिकार से माल निकल गया हो,

माल को मार्ग में रोक सकता है और जब तक माल मार्ग में है, वह माल को अपने अधिकार में ले सकता है और जब तक उसे मूल्य न चुकाया जाय अथवा मूल्य प्रस्तुत न किया जाय तब तक उसे रोके रख सकता है।"


अदत्त विक्रेता को यह अधिकार उस समय प्राप्त होता है जब कि क्रेता दिवालिया हो गया हो और क्रेता अथवा उसके प्रतिनिधि ने माल की सुपुर्दगी प्राप्त न की हो अर्थात माल मार्ग में ही हो।


माल तभी रोका जा सकता है जबकि वह मार्ग में हो। माल के मार्ग में रहने की अवधि के संबंध में निम्नलिखित नियम लागु होते हैं :


• वाहक या निक्षेपगृहित की माल सौंपने पर ।


• नियत स्थान पर पहुँचने से पूर्व क्रेता द्वारा सुपूर्दगी लेना।


• क्रेता की ओर से वाहक द्वारा माल रखना।


• क्रेता द्वारा माल अस्वीकार करना।


• जहाज को सुपुर्दगी


• वाहक की त्रुटि होने पर। 


• क्रेता द्वारा आंशिक सुपुर्दगी लेना।


Ill. माल को पुनः विक्रय करने का अधिकार ग्रहणाधिकार तथा मार्ग में रोकने के अधिकार के अतिरिक्त अदत्त विक्रेता को माल को पुनः बेचने का अधिकार प्राप्त है। इस अधिकार का प्रयोग वह निम्नलिखित परिस्थितियों में कर सकता है।


• यदि माल शीघ्र नष्ट होने वाली प्रकृति का हो।


• नये क्रेता के अच्छा अधिकार


• मूल अनुबंध का परित्याग ।


• पुनः विक्रय अदत्त विक्रेता की इच्छा पर