सूचकांक के प्रकार - index type
सूचकांक के प्रकार - index type
. मानव विकास सूचकांक
मानव विकास सूचकांक एक समग्र पद के लिए मानव विकास स्तर से देशों, जीवित या जीवन की गुणवता के पुराने अवधि के मानकों का एक पर्याय के रूप में लिया और बहुत उच्च मानव विकास भेद चलता है, उच्च मानव विकास, मध्यम मानव विकास और कम मानव विकास देशों, एचडीआई तैयार है।
मानव विकास सूचकांक जीवन प्रत्याशा, साक्षरता, शिक्षा और दुनिया भर के देशों के लिए रहने के मानकों का एक तुलनात्मक उपाय है। यह अच्छी तरह से किया जा रहा है विशेष रूप से बच्चे के कल्याण को मापने का एक मानक का मतलब है। यह भेद है कि देश में एक विकसित की है
या एक विकासशील देश के तहत विकसित की है जीवन की गुणवता पर भी आर्थिक नीतियों के प्रभाव को मापने के लिए है के लिए प्रयोग किया जाता है वहां भी कर रहे हैं, स्थानीय संगठनों या कंपनियों द्वारा राज्यों, शहरों, गावों आदि के । 2. थोक मूल्य सूचकांक
थोक मूल्य सूचकांक एक मूल्य सूचकांक है जो कुछ हुई वस्तुओं के सामूहिक औसन मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है। भारत और फिलीपिन्स आदि देश थोक मूल्य सूचकाक में परिवर्तन को महगाई में परिवर्तन के सूचक के रूप में इस्तेमाल करते हैं किंतु भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका अब उत्पादक मूल्य सूचकांक का प्रयोग करने लगे हैं। भारत में थोक मूल्य सूचकांक को आधार मान कर महगाई दर की गणना होती है
क्योंकि थोक मूल्य और खुदरा मूल्य में काफी अंतर होने के कारण इस विधि को कुछ लोग सही नहीं मानते है ।
थोक मूल्य सूचकांक के लिए एक आधार वर्ष होता है। भारत में अभी 2014-15 के आधार वर्ष के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक की गणना हो रही है। इसके अलावा वस्तुओं का एक समूह होता है जिनके औसत मूल्य का उतार-चढ़ाव थोक मूल्य सूचकांक के उतार चढाव को निर्धारित करता है। अगर भारत की बात करे तो यहाँ थोक मूल्य सूचकांक में 435 पदार्थों को शामिल किया गया है जिनमें खाद्यान्न, धातु, ईंधन, रसायन आदि हर तरह के पदार्थ है और इनके चयन मे कोशिश की जाती है कि ये अर्थव्यवस्था के हर पहलू का प्रतिनिधित्व करें। आधार वर्ष के लिए सभी 435 सामानों का सूचकांक 100 मान लिया जाता है। उदाहरण
मान लीजिए हमें वर्ष 2004 के लिए गेहूँ का थोक मूल्य सूचकांक निकालना है। अगर 1994 में गेहूं की कीमत 8 रु. प्रति किलो थी और वर्ष 2004 में यह 10 रू. प्रति किलो है तो कीमत अंतर हुआ 2 रू. का
अब यही अंतर अगर प्रतिशत में निकालें तो 25 प्रतिशत बैठता है। आधार वर्ष (2004-05) के लिए सूचकांक 100 मान जाता है, इसलिए वर्ष 2004 में गेहूँ का थोक मूल्य सूचकांक होगा 100+25=125
इसी तरह सभी 435 पदार्थों के अलग-अलग थोक मूल्य सूचकांक निकाल कर उन्हें जोड़ दिया जाता है।
लेकिन ऐसा करते समय अगर ये लगता है कि अर्थव्यवस्था में किसी खास सामान की उपयोगिता अधिक है तो सूचकांक में उसकी हिस्सेदारी का भाराक को कृत्रिम तौर पर बढ़ाया जा सकता है।
थोक मूल्य सूचकांक की गणना हर हफ्ते होती है। समानों के थोक भाव लेने और सूचकांक तैयार करने में समय लगता है, इसलिए मुद्रास्फीति की दर हमेशा दो हफ्तों पहले की जाती है। भारत में हर हफ्ते थोक मूल्य सूचकांक का आकलन किया जाता है। इसलिए महंगाई दर का आकलन भी हफ्ते के दौरान कीमतों में हुए परिवर्तन को दिखाता है।
अब मान लीजिए 13 जून को खत्म हुए हफ्ते में थोक मूल्य सूचकांक 120 है और यह बढ़ कर 20 जून को 122 हो गई। तो प्रतिशत में अंतर हुआ लगभग 1.6 प्रतिशत और यही महंगाई दर मानी जाती है।
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