भारत और मानवपूंजी - India and human capital

भारत और मानवपूंजी - India and human capital


इस समय भारत का अधिकतम प्रतिशत जनसंख्या युवा है इसका अर्थ है कि यदि इस वर्ग में सही निवेश किया जाता है तो राष्ट्र कि उन्नति में अत्यंत लाभकारी होगा। भारत की सातवीं पंचवर्षीय योजना में कहा गया था कि एक विशाल जनसंख्या वाले देश में विशेष रूप से मानव संसाधनों के विकास को आर्थिक विकास की युक्ति में बहुत महत्वपूर्ण स्थान देना ही होगा। उचित शिक्षा तथा प्रशिक्षण से ही हम भारत की विशाल जनसंख्या आर्थिक संवृद्धि को बढ़ाने वाली परिसंपत्ति बन जाएगी। हम जानते हैं कि शिक्षा तथा स्वास्थ्य की देखभाल निजी तथा सामाजिक लाभों को उत्पन्न करती हैं। इसी कारण इन सेवाओं के बाजार में निजी और सार्वजनिक संस्थाओं का अस्तित्व है। शिक्षा तथा स्वास्थ्य की देखभाल पर व्यय समाज पर दीर्घकालिक प्रभाव डालते हैं और उन्हें आसानी से बदला नहीं जा सकता है। इसलिए सरकारी हस्तक्षेप अनिवार्य है।

मान लीजिए जब भी किसी बच्चे को किसी स्कूल या फिर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जाता है और वहां आवश्यक सुविधाएं प्रदान नहीं की जाती है तो हम उस बच्चे को किसी अन्य संस्था में स्थानातरित करने का निर्णय लेते है। इन सेवाओं के व्यक्तिगत उपभोक्ताओं को सेवाओं की गुणवत्ताओं और लागतों के विषय में पूर्ण जानकारी नहीं होती। इन परिस्थितियों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही संस्थाए एकाधिकार प्राप्त कर लेती हैं और शोषण करने लगती है। यहां सरकार की भूमिका यह हो सकती है कि वह निजी सेवा प्रदायकों को उचित मानकों के अनुसार सेवाएं देने तथा उनकी उचित कीमत पर सेवा प्रदान करने के लिए बाध्य करें।


हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था पर दो स्वतंत्र अध्ययनों ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत अपनी मानव पूंजी निर्माण क्षमता के कारण बहुत तेजी से विकास कर पाएगा।

ड्यूश नामक जर्मनी बैंक ने अपनी विश्व स्तरीय संवृद्धि रिपोर्ट में कहा है कि भारत 2020 तक विश्व के चार प्रमुख विकास केंद्रों में से एक बनकर उभरेगा उसी में आगे कहा गया, 'हमारा व्यावहारिक अन्वेषण इस मत का पक्षधर है कि आज की अर्थव्यवस्थाओं में मानव पूंजी उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण कारक है। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में मानव पूंजी की वृद्धि का निर्णायक योगदान रहता है। भारत के संदर्भ में इसी रिपोर्ट में आगे कहा गया है हमारी आशा है कि 2005-2020 की अवधि में भारत में 7 वर्ष से ऊपर शिक्षा के औसत वर्षों में 40 प्रतिशत की वृद्धि की संभावित है।


विश्व बैंक ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट भारत और ज्ञान अर्थव्यवस्था-शक्तियों और अवसरों का सदुपयोग मे कहा है कि भारत अपने आपको एक ज्ञानाधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित कर सकता है,

यदि यह भी उतने ज्ञान का प्रयोग करे, जितना आयरलैंड करता है तो निश्चय ही भारत की प्रतिव्यक्ति आय 2020 में वर्तमान अनुमान 1,000 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 3,000 डॉलर हो सकती है। इस रिपोर्ट मे आगे कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मे इस प्रकार के संक्रमण को संभव बनाने वाले सारे मुख्य तत्व जैसे सुचारू रूप से कार्य कर रहा लोकतंत्र तथा विस्तृत एवं विविधतापूर्ण वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय आधारभूत संरचनाएं विद्यमान है। इस प्रकार इन दोनों ही रिपोर्टों में बताया गया है कि भारत में आगे चलकर मानव पूंजी निर्माण ही इसकी अर्थव्यवस्था को आर्थिक संवृद्धि के उच्च पथ पर ले जाएगा। हाल ही में केंद्र सरकार ने भारतीय युवा वर्ग के कौशल का विकास करने के लिए स्किल डेवलपमेंट योजना का आरंभ किया है जिसके अंतर्गत युवा पीढ़ी को किसी भी कार्य में कुशल बनाने का प्रावधान है। इस तरह से पढ़े लिखे युवा कार्य प्रशिक्षण से राष्ट्र के विकास के सहयोग करेंगें।