स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत की औद्योगिक नीति - Industrial Policy of India after Independence

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत की औद्योगिक नीति - Industrial Policy of India after Independence


15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ देश में जन प्रिय सरकार की स्थापना होने पर लोगों में नए विश्वास व आशा की लहर आई, परंतु उस समय विरासत में मिला औद्योगिक ढांचा अस्त-व्यस्त था । स्फीतिकारी प्रवृतियां, विदेशियों द्वारा पूंजी समेटने विभाजन के कारण कच्चे माल की कमी, पूंजी का अभाव, श्रमिकों और मालिकों के झगड़े आदि के कारण देश औद्योगिक संकट से गुजर रहा था। अतः भारत सरकार ने स्थिति सुधारने के उद्देश्य से दिसंबर, 1947 में तत्कालीन उद्योग मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में एक औद्योगिक सम्मेलन बुलाया, जिसमें औद्योगिक नीति संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात अब तक पांच औद्योगिक नीतियों की घोषणा हो चुकी है।


(i) पहली औद्योगिक नीति 1948 में, 


(ii) दूसरी 1956 में, 


(iii) तीसरी 1977 में, 


(iv) चौथी 1980 में तथा 


(v) पांचवी 1991 में।