उद्योग तथा व्यापार - industry and trade
उद्योग तथा व्यापार - industry and trade
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि गरीब देश तभी विकास कर पाते हैं जब उनमें अच्छे औद्योगिक क्षेत्र होते हैं। उद्योग से लोगों को रोजगार मिलता है तथा ये कृषि में रोजगार से अधिक स्थायी होते हैं। इससे देश का आधुनिकीकरण तथा संपूर्ण विकास होता है। हमारी पंचवर्षीय योजनों में औद्योगिक विकास पर अत्यधिक जोर दिया गया है। आजादी के बार भारत मे बहुत कम उद्योग थे। इनमें से अधिकांश उद्योग सूती वस्त्र, पटसन आदि तक सीमित थे। जमशेदपुर तथा कोलकाता में लोहा व इस्पात की सुप्रबंधित फर्मों थीं। यदि अर्थव्यवस्था का विकास करना था तो हमें ऐसे औद्योगिक आधार का विस्तार करने की आवश्यकता थी जिसमें विभिन्न प्रकार के उद्योग हों।
भारत में दूसरी योजना, वास्तव में औद्योगिक योजना थी। इसमें आधारभूत उद्योगों के विकास को उच्च प्राथमिकता दी गई तथा इसे रोजगार प्रेरित क्षेत्र स्वीकार किया गया। यह योजना 1956 की औद्योगिक नीति पर आधारित थी जिसमें उद्योगों के तीव्र विकास का उतरदायित्व सरकार ने अपने ऊपर ले लिया।
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