मुद्रा अपस्फीति , मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास - Inflation, inflation and economic growth

मुद्रा अपस्फीति , मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास - Inflation, inflation and economic growth


मुद्रास्फीति के दुष्परिणामों को दूर करने के उद्देश्य से जानबूझकर मुद्रा की मात्रा कम की जाती है तो उसे मुद्रा अपस्फीति की संज्ञा दी जाती है। जिस प्रकार मुद्रा संस्फीति का उद्देश्य मुद्रा संकुचन के हानिकारक प्रभावों को समाप्त करके अर्थव्यवस्था में संतुलन स्थापित करना है। उसी प्रकार मुद्रा अपस्फीति का उद्देश्य मुद्रा प्रसार के हानिकारक प्रभावों को समाप्त करना है। 


मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास


मुद्रास्फीति के लिए आर्थिक विकास टॉनिक का कार्य करती है।

मुद्रा स्फीति के कारण उद्योगपतियों व व्यापारियों के लाभ में वृद्धि होती है। लाभ में वृद्धि होने से उक्त वर्ग नए उद्योग धधे लगाने अथवा विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। नए उद्योग धंधों की स्थापना से रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है। इन सबके परिणाम स्वरूप आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। इस प्रकार से कहा जा सकता है कि मुद्रास्फीति की प्रारम्भिक अवस्था में जब मुद्रा स्फीति की दर निम्न रहती है आर्थिक विकास की प्रक्रिया त्वरित होती है। लाभों में वृद्धि के कारण विनियोग को प्रोत्साहन मिलता है तथा निवेश पूजी भी आकर्षित होती है, परंतु अनियंत्रित मुद्रास्फीति से आर्थिक विकास की गति मंद हो जाती है।