सूचना संग्रहण (संपादन), विश्लेषण - Information Collection (Editing), Analysis

 सूचना संग्रहण (संपादन), विश्लेषण - Information Collection (Editing), Analysis


विश्लेषण मॉडल के प्रकार, अलग-अलग अर्थमितीय और साख्यिकीय तरीकों द्वारा कार्यों की उपयोगिता का अनुमान लगाया जा सकता है ये उपयोगी कार्य की कथित सुविधा के मूल्यांकन और संवेदशील उपभोक्ता धारणाओं और उत्पाद सुविधाओं की वरियताओं में परिवर्तन करने में प्रयुक्त किया जाता है। वास्तविक आकलन की प्रक्रिया विनिर्देश के प्रकार में उत्तरदाताओं के लिए कार्य और परिचय के डिजाइन पर निर्भर करेगा और वरियताओं के उपाय के लिए सीमित आकारों के पैमानों पर अंकित किया जाता है विश्लेषण सामान्य चुनाव आधारित कार्यों में अधिकतम संभावना के आकलन के लिए उपयुक्त हो सकता है मूल विचरण तरीकों या रैखिक योजना तकनीक के नीरस विश्लेषण है. लेकिन समकालीन विपणन अनुसंधान अभ्यास बहुभाषी, मिश्रित संस्करण एवं अन्य अनुसंधान के उपयोग पर पसंदीदा मॉडल की और स्थानान्तरित कर दिया गया।

बेसन्स के मतानुसार, 'अनुमान भी बहुत लोकप्रिय होते हैं। आजकल श्रेणीबद्ध बासोसियन प्रक्रियाओं के रूप में अच्छी तरह से अपेक्षाकृत लोकप्रिय हैं।


लाभ


• ग्राहकों की मनोवैज्ञानिक मानसिकता का अनेकों तर्कों से मूल्यांकन करना


• व्यक्तिगत स्तर पर अपेक्षाओं का मूल्यांकन करना


• वास्तविक या अदृष्य समक जो स्वयंता आभायी है, का मूल्यांकन करना


• क्रय प्रभुत्ता एवं वास्तविक चुनाव


• भौतिक उत्पदों को उपयोग करने की क्षमता


• यदि विनियोगिक है, तो बाजार विभाजन पद्धतियों का उपयोग कर उनके अंतरंग संबंधों का विश्लेषण करने की क्षमता


दोष


• समकों का डिजाइन का अध्ययन का अस्वाभिक होना


• अनेक विकल्पों के संग उत्तरदाता सुबोधतापूर्वक उद्देश्यों का सरलीकरण कर देता है


• उत्पाद के स्थापन अनुसंधान में कठिनाई, क्योंकि अंतर्निहित उल्लेखों में कटौती का बौद्धगम्य तरीकों का कोई साधन नहीं होता ।


• उत्तरदाता उत्पादित नई श्रेणियों की ओर मनोवृत्ति का उल्लेख करने में नाकामयाब होता है यह कहा जाए कि मुद्दों पर विचार व्यक्त करने में जबरदस्ती महसूस करता है।


• अभावहीन अध्ययन ठोस परिवर्तनों के न्यूनतम आकलनों में विहगात्मक अवलोकन करने में असमर्थता दिखाता है। 


इस प्रकार, विभिन्न सांख्यिकीय तकनीकें विपणन अनुसंधान के अंतर्गत संकलित समकों के विश्लेषण हेतु (अंतरों की सार्थकता की जांच तथा अंतरों की व्याख्या) प्रयोग में लायी जा सकती है। संक्षेप में अंतरों की सार्थकता की जांच हेतु निदर्शन सिद्धान्त काई वर्ग तथा प्रसरण विश्लेषण का प्रयोग क्रमश माध्य, मध्यका आदि में दो गुण वाले समको में तथा सगृहित समको में किया जा सकता है समको के अंतरों की व्याख्या हेतु क्रॉस सारणीयन, सहसंबंध तथा प्रतिपगमन विश्लेषण विधि का प्रयोग विश्लेषण विधि का प्रयोग किया जा सकता है।


पी.वी. यंग के अनुसार समंको के विश्लेषण की प्रक्रिया में निम्न चरण सम्मिलित होते हैं-


(i) सामग्री तथ्यों का तील करना


(ii) रूपरेखा की तैयारी


(iii) व्यवस्थित वर्गीकरण


(iv) अवधारणाओं का निर्माण


(v) तुलना एवं व्याख्या


(vi) सिद्धान्तों का प्रतिपादन । रुपरेखा की प्रत्येक मद का पूर्ण विवरण दिया जाना चाहिए विश्लेषक को इन संग्रहित तथ्यों को विश्लेषण पत्र पर हस्तान्तरित कर दिया चाहिए। उदाहरण के लिए, क्या आप नाश्ते में खाशान्त का प्रयोग करते हैं?