अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय: परिचय व अर्थ - International Business: Introduction and Meaning
अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय: परिचय व अर्थ - International Business: Introduction and Meaning
कोई भी देश अन्य देश की कंपनी को अपनी सीमाओं में प्रवेश नहीं करने देता, जब तक कि उसे स्वयं इससे कुछ लाभ प्राप्त न हो। इसके अलावा प्रवेश का एक ही ढंग अपनाना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय के मुख्य ढंग हैं व्यापार रूट अनुबंधीय प्रवेश रूट निवेश रूट ।
(i) व्यापार रूट में उत्पादों को अन्य देशों में निर्यात करके विदेशी बाजार में प्रवेश लिया जाता है।
(ii) अनुबंधीय प्रवेश रूट में अमूर्त संपत्तियों, जैसे- पेटेन्ट कॉपीराइट, टेक्नोलॉजी आदि का अन्य देशों में निर्यात किया जाता है।
(iii) निवेश रूट में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश द्वारा विदेशों में सहायक कंपनिया स्थापित की जाती है।
विलयन व अधिग्रहण द्वारा विदेशों में व्यवसाय का प्रसार किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय के उचित प्रारूप का चयन विभिन्न घटकों पर निर्भर करता है जैसे कंपनी के पास उपलब्ध संसाधन, मेजबान देश अर्थात् जिस देश में व्यवसाय फैलाया जाना है, वहां का घरेलू व्यावसायिक वातावरण, जोखिम स्तर निवेश स्तर मेजबान देश में उत्पादक के घटकों की लागत आदि विदेशी बाजार में प्रवेश के ढंग का चयन बहुत ही व्यूहरचनात्मक निर्णय है। प्रत्येक ढंग प्रत्येक स्थिति में उपयुक्त नहीं होता। निवेश प्रारूप में अतिरिक्त पूंजी निवेश की जरूरत होती है। इसमें विदेशी बाजार पर पूर्ण नियंत्रण होता है, परंतु इसमें जोखिम स्तर बहुत अधिक होता है। दूसरी तरफ, व्यापार प्रारूप में अतिरिक्त पूंजी निवेश की आवश्यकता नहीं होती, इसमें जोखिम का स्तर कम होता है परंतु इसमे विदेशी बाजार पर नियंत्रण होता है अंत अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में प्रवेश के प्रत्येक प्रारूप के अपने गुण व दोष होते है प्रवेश प्रारूप के चयन से पहले इसे प्रभावित करने वाले विभिन्न घटकों का गहन अध्ययन किया जाना चाहिए।
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